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रोजाना प्रयोग होने वाले शब्द || #shorts #englishvocabulary #upsc #ssc #ssccgl

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तत्सम शब्द- परिभाषा|अ, आ से शुरू होने वाले तत्सम|इ, ई से शुरू होने वाले तत्सम शब्द|उ, ऊ से शुरू होने वाले तत्सम शब्द|क और ख से शुरू होने वाले तत्सम शब्द|तत्सम शब्दों को पहचानने के नियम|OMR

अरबी, उर्दू और फारसी के उपसर्ग|अंग्रेजी के उपसर्ग|उपसर्ग के समान प्रयुक्त होने वाले संस्कृत के अव्यय शब्द|स्मरणीय तथ्य|उपसर्ग के अन्य अर्थ|प्रश्न|OMR

'पाठ में ठिठियाकर हँसने लगी' जैसा वाक्य आया है। ठिठियाना शब्द में 'आना' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'आना' प्रत्यय से बनने वाले चार सार्थक शब्द लिखिए। - इस प्रश्न का स्वरूप को पोषित करता है।

Statement/ कथन : “On October 2, let us pledge to make the country free of single-use plastic.”- Prime Minister of India/ “2 अक्टूबर को, आइये हम देश को एकल प्रयोग वाले प्लास्टिक से मुक्त करने की शपथ लें |” -भारत के प्रधानमंत्री Conclusion/ निष्कर्ष: I. All Indians should reduce and then completely eliminate the consumption of single-use plastic like packaged drinking water / सभी भारतीयों को पैकेज्ड पेयजल जैसे एकल प्रयोग वाले प्लास्टिक की खपत को कम करना चाहिए तथा फिर पूरी तरह से समाप्त कर देना चाहिए | II.India is going to be completely plastic free on October 2 / भारत 2 अक्टूबर को प्लास्टिक से पूरी तरह मुक्त होने जा रहा है |

निम्नलिखित गद्यांश के आधार प उत्तर दीजिए: गांधीजी सत्य और अहिंसा को जीवन में सर्वाधिक महत्व देते थे, सत्याग्रह व असहयोग आंदोलन द्वारा उन्होंने अंग्रेजों का मुकाबला किया। गांधीजी सब मनुष्यों को समान मानते थे। धर्म, जाति, संप्रदाय, रंग आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को वे मानवता का कलंक मानते थे। वे आर्थिक असमानता को भी मिटा डालना चाहते थे। सामाजिक न्याय, शारीरिक श्रम को महत्व देते थे। गांधीजी प्रजातांत्रिक राज्य को कल्याणकारी मानते थे। गांधीजी के अनुसार, नैतिक आचरण का जीवन में विशेष स्थान होना चाहिए। सत्य, न्याय, धर्म, अहिंसा, अपरिग्रह, निःस्वार्थ सेवा को मानवता के लिए सच्ची सेवा मानते थे। उनके राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय विचारों में वसुधैव कुटुम्बकम का दृष्टिकोण प्रमुख था। उनकी मान्यता थी कि किसी राष्ट्र का समुचित उत्थान अपने परिवार, जाति, गांव, प्रदेश तथा देश की समस्याओं के सुधार से हो सकता है। स्वयं को सुधारों, सारा विश्व सुधरेगा उनका कहना सही था। शरीर यात्रा के लिए जितना आवश्यक हो उससे पैसा, अन्न आदि का न लेना' अर्थ को व्यक्त करने वाला शब्द है

कमज़ोर विचारक तत्काल उत्तर की ओर दौड़ता है। पर सोचने वाले बच्चे .. समय लेते हैं। सवाल पर विचार करते हैं। क्या यह अन्तर केवल सोचने के कौशल के होने या न होने के कारण है? एक ऐसा कौशल जो केवल एक तकनीक है और जिसे, अगर भाग्य ने साथ दिया तो, हम बुद्धि से बच्चों कों सिखा सकते हैं। क्या बच्चों को इस कौशल में प्रशिक्षित कर सकते हैं? मुझे भय है कि ऐसा नहीं है। अच्छा विचारक सोचने में समय इसलिए लगा सकता है, क्योकि वह अनिश्चय को सह सकता है। वह इस बात को भी झेल सकता है कि वह कोई चीज नहीं जानता। पर कमजोर विचारक को कुछ न जानने की कल्पना ही असहनीय लगती है। क्या इस पूरे विश्लेषण से हम यह नहीं पाते कि असल में इन बच्चों में 'गलत' होने का भय बैठा होता है? बेशक यही भय है जो मॉनिका जैसे बच्चों पर भयानक दबाव डालता है। ठीक ऐसे ही दबाव हैल भी महसूस करता है। शायद मैं भी। मॉनिका अकेली नहीं है जो सही होना चाहती है और गलत होने से डरती है। पर यहाँ शायद एक दूसरी असुरक्षा की भावना काम करती होती है। यह असुरक्षा की भावना पैदा होती है सवाल के लिए कोई भी जवाब नहीं होने से। . वह गलत होने से ... डरती है।' वाक्य में उचित क्रिया-विशेषण शब्द आएगा।