बाज़ की तरह उड़ान भरो , हालातों से डरो मत उनका सामना करो! #shorts #eagle #thoughts hindiquotes
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अधिकतर लोगों की यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए, नहीं तो आज वे काफी आगे होते और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इन्तजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इन्तजार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायणमूर्ति ने महज दस हजार रुपये में अपने छ: दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कम्पनी है। करौली टैकस, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाजी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलम्पिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विची, रवीन्द्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिज्नी-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये सभी अपने-अपने क्षेत्र के शीर्ष पर पहुँचे। अगर ये लोग भी इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इन्तजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते, जहाँ वे मौजूद है? अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुंचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इन्तजार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इन्तजार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इन्तजार करेंगे, तो करते रह जाएंगे। 'समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता' यहाँ 'एकदम' का अर्थ है
अधिकतर लोगों की यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए, नहीं तो आज वे काफी आगे होते और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इन्तजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इन्तजार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायणमूर्ति ने महज दस हजार रुपये में अपने छ: दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कम्पनी है। करौली टैकस, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाजी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलम्पिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विची, रवीन्द्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिज्नी-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये सभी अपने-अपने क्षेत्र के शीर्ष पर पहुँचे। अगर ये लोग भी इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इन्तजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते, जहाँ वे मौजूद है? अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुंचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इन्तजार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इन्तजार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इन्तजार करेंगे, तो करते रह जाएंगे। 'हमें अपनी इच्छाशक्ति को मंजबूत कर जुट जाना होगा।' उपयुक्त वाक्य से बना संयुक्त वाक्य होगा
अधिकतर लोगों की यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए, नहीं तो आज वे काफी आगे होते और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इन्तजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इन्तजार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायणमूर्ति ने महज दस हजार रुपये में अपने छ: दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कम्पनी है। करौली टैकस, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाजी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलम्पिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विची, रवीन्द्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिज्नी-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये सभी अपने-अपने क्षेत्र के शीर्ष पर पहुँचे। अगर ये लोग भी इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इन्तजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते, जहाँ वे मौजूद है? अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुंचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इन्तजार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इन्तजार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इन्तजार करेंगे, तो करते रह जाएंगे। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है रेखांकित अंश का संकेत है
अधिकतर लोगों की यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए, नहीं तो आज वे काफी आगे होते और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इन्तजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इन्तजार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायणमूर्ति ने महज दस हजार रुपये में अपने छ: दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कम्पनी है। करौली टैकस, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाजी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलम्पिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विची, रवीन्द्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिज्नी-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये सभी अपने-अपने क्षेत्र के शीर्ष पर पहुँचे। अगर ये लोग भी इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इन्तजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते, जहाँ वे मौजूद है? अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुंचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इन्तजार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इन्तजार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इन्तजार करेंगे, तो करते रह जाएंगे। नारायणमूर्ति, ग्राहम बेल आदि के उदाहरण क्यों दिए गए है?
अधिकतर लोगों की यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए, नहीं तो आज वे काफी आगे होते और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इन्तजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इन्तजार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायणमूर्ति ने महज दस हजार रुपये में अपने छ: दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कम्पनी है। करौली टैकस, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाजी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलम्पिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विची, रवीन्द्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिज्नी-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये सभी अपने-अपने क्षेत्र के शीर्ष पर पहुँचे। अगर ये लोग भी इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इन्तजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते, जहाँ वे मौजूद है? अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुंचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इन्तजार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इन्तजार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इन्तजार करेंगे, तो करते रह जाएंगे। 'इन्तजार करेंगे तो करते रह जाएँगे' कथन का तात्पर्य है
अधिकतर लोगों को यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए. नहीं तो आज वे काफी आगे होते! और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इंतजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इंतज़ार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए, और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायण मूर्ति ने महज दस हज़ार रुपये में अपने छह दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की, और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी है। करौली टैक्स, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाज़ी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलांपिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विंची, रवींद्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिल्ली-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये लोग अगर इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इंतजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते. जहाँ वे मौजूद हैं?. अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुँचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इंतज़ार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इंतज़ार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसीलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इंतजार करेंगे, तो करते रह जाएँगे। 'समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता' - यहाँ एकदम' का अर्थ है
अधिकतर लोगों को यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए. नहीं तो आज वे काफी आगे होते! और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इंतजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इंतज़ार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए, और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायण मूर्ति ने महज दस हज़ार रुपये में अपने छह दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की, और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी है। करौली टैक्स, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाज़ी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलांपिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विंची, रवींद्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिल्ली-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये लोग अगर इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इंतजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते. जहाँ वे मौजूद हैं?. अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुँचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इंतज़ार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इंतज़ार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसीलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इंतजार करेंगे, तो करते रह जाएँगे। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है'-रेखांकित अंश का संकेत है
अधिकतर लोगों को यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए. नहीं तो आज वे काफी आगे होते! और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इंतजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इंतज़ार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए, और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायण मूर्ति ने महज दस हज़ार रुपये में अपने छह दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की, और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी है। करौली टैक्स, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाज़ी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलांपिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विंची, रवींद्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिल्ली-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये लोग अगर इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इंतजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते. जहाँ वे मौजूद हैं?. अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुँचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इंतज़ार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इंतज़ार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसीलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इंतजार करेंगे, तो करते रह जाएँगे। नारायण मूर्ति, ग्राहम बेल आदि के उदाहरण क्यों दिए गए हैं?
अधिकतर लोगों को यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए. नहीं तो आज वे काफी आगे होते! और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इंतजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इंतज़ार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए, और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायण मूर्ति ने महज दस हज़ार रुपये में अपने छह दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की, और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी है। करौली टैक्स, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाज़ी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलांपिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विंची, रवींद्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिल्ली-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये लोग अगर इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इंतजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते. जहाँ वे मौजूद हैं?. अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुँचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इंतज़ार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इंतज़ार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसीलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इंतजार करेंगे, तो करते रह जाएँगे। 'इंतजार करेंगे तो करते रह जाएंगे'- कथन का तात्पर्य है
अधिकतर लोगों को यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए. नहीं तो आज वे काफी आगे होते! और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इंतजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इंतज़ार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए, और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायण मूर्ति ने महज दस हज़ार रुपये में अपने छह दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की, और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी है। करौली टैक्स, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाज़ी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलांपिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विंची, रवींद्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिल्ली-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये लोग अगर इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इंतजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते. जहाँ वे मौजूद हैं?. अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुँचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इंतज़ार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इंतज़ार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसीलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इंतजार करेंगे, तो करते रह जाएँगे। 'हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा।' उपर्युक्त वाक्य से बना संयुकत वाक्य होगा