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आजकल की बाइक में हेड लाइट हमेशा ऑन क्यों रहता? | Why Two-Wheeler Headlight Always On | #shorts

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Introduction(परिचय)|1st Phase Of Nationalization(राष्ट्रीयकरण का पहला चरण)|2nd Phase Of Nationalization(राष्ट्रीयकरण का दूसरा चरण)|Impact Of Nationalization(राष्ट्रीयकरण का प्रभाव)|Major limitations of nationalisation of bank in India(भारत में बैंक के राष्ट्रीयकरण की प्रमुख सीमाएँ)|Why there was need of reforms in banking sector(बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों की आवश्यकता क्यों पड़ी?)|Banking Reform phase(बैंकिंग सुधार चरण)|OMR|Summary

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पूछना ही क्या। कभी चारदीवारी पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।म जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साइब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें। लेखक हॉस्टल की दीवारों को क्यों पार करते थे?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पुछना ही क्या। कभी चारदीवारी __ पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।न जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साहब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें।लेखक हॉस्टल की दीवारों को क्यों पार करते थे?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पूछना ही क्या। कभी चारदीवारी पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।म जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साइब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें। बड़े भईया के सवाल पर प्रेमचंद मौन क्यों रहते थे?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पुछना ही क्या। कभी चारदीवारी __ पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे ? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।न जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साहब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें।बड़े भईया के सवाल पर प्रेमचंद मौन क्यों रहते थे?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पूछना ही क्या। कभी चारदीवारी पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।म जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साइब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें। प्रेमचंद की भाषा कैसी थी?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पुछना ही क्या। कभी चारदीवारी __ पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ थे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।न जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साहब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें। प्रेमचंद की भाषा कैसी थी?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मेरा जी पढ़ने में बिल्कुल न लगता था। एक घंय मी किताब लेकर बैठना पहाड़ था। मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता कभी कागज की वितलियाँउड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया तो पुछना ही क्या। कभी चारदीवारी __ पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं तो कभी फाटक पर सवार उसे आगे-पीछेचलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रूद्र रूप देखकर प्राण सुख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- 'कहाँ धे? हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था।न जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई साहब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करें। मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं" रेखांकित वाक्य में कौनसा कारक प्रयुक्त हुआ है?