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धातु तथा आधातु की , चमक , कठोरता,अघातवर्...

धातु तथा आधातु की , चमक , कठोरता,अघातवर्धनीयता ,तन्यता,ध्वनिक , चालकता

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दोहरान |धातुओं के गुण : ध्वनिक |धातु एवं अधातु की पहचान : सारणी |विद्युत चालकता |ऊष्मीय चालकता |सारांश

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धातु न्यूनता दोष|ठोस के गुण|चालकों की चालकता का कारण|धात्विक चालकों की चालकता का बैंड सिद्धांत|चालक, कुचालक|अर्द्धचालक|Summary

धातुओं के गुणधर्म |अधातु व् उसके गुणधर्म |धातु तथा अधातु की परिभाषा |रासायनिक क्रिया |पानी के साथ क्रिया

Recap|प्रतिरोधकता |ओह्म के नियम की सीमाए|विधयुत चालकता तथा विशिष्ट चालकता |OMR|Summary

A metallic hemispherical bowl is made up of steel. The total steel used in making the bowl is 342 pi cm^3, The bowl can hold 144 pi cm^3 water. What is the thickness (in cm) of bowl and the curved surface area (in cm^2 ) of outer side? इस्पात से धातु का एक अर्धगोलाकार कटोरा बनाया गया है। कटोरे को बनाने में कुल 342 pi से.मी.^3 इस्पात का प्रयोग किया गया है। कटोरा में 144 pi से.मी.^3 जल आ सकता है। कटोरे की मोटाई (से,मी. में) तथा बाहरी सतह का वक्र पृष्ठिय क्षेत्रफल ( से.मी.^2 में) क्या हें?

कठोर जल तथा मृदु जल |अभिक्रिया |जल की कठोरता के प्रकार |अस्थायी और स्थायी कठोरता कों दूर करना के तरीके |हाइड्रोजन पेरोक्साइड -संरचना |Summary

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये वायु प्रदूषण आज की प्रमुख समस्या है। जंगलों के कटने तथा खनिज ईंधन के जलने से वायु में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा दिनों बढ़ रही है। विश्व पर्यावरण विकास आयोग' के अनुसार औद्योगीकरण के पूर्व वायु के प्रति 10 लाख में 280 कार्बन डाई-ऑक्साइड' थी। यह घनत्व अस्सी के दशक में 340 पहुंच गया तथा इक्कीसवीं शताब्दी के मध्य से अन्त तक यह 560 तक पहुंच जाएगा। वातावरण में छोड़ा जाने वाला धुआं अब सामान्य लकड़ी का धुआं न होकर अब उसमें कार्बन-ऑक्साइड के साथ-ही-साथ नाइट्रसऑक्साइड, धूल जैसे पदार्थों का आधिक्य भी हो रहा है। धातु कणों में सीसा, पारा, निकल, क्रोमियम, तांबा, आदि होते हैं। सीसे के जहर से मानव मस्तिष्क के तन्तु नष्ट हो जाते हैं। सीसे का जहर किस अंग के तन्तुओं को नष्ट कर देता है।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये वायु प्रदूषण आज की प्रमुख समस्या है। जंगलों के कटने तथा खनिज ईंधन के जलने से वायु में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा दिनों बढ़ रही है। विश्व पर्यावरण विकास आयोग' के अनुसार औद्योगीकरण के पूर्व वायु के प्रति 10 लाख में 280 कार्बन डाई-ऑक्साइड' थी। यह घनत्व अस्सी के दशक में 340 पहुंच गया तथा इक्कीसवीं शताब्दी के मध्य से अन्त तक यह 560 तक पहुंच जाएगा। वातावरण में छोड़ा जाने वाला धुआं अब सामान्य लकड़ी का धुआं न होकर अब उसमें कार्बन-ऑक्साइड के साथ-ही-साथ नाइट्रसऑक्साइड, धूल जैसे पदार्थों का आधिक्य भी हो रहा है। धातु कणों में सीसा, पारा, निकल, क्रोमियम, तांबा, आदि होते हैं। सीसे के जहर से मानव मस्तिष्क के तन्तु नष्ट हो जाते हैं। निकल, क्रोमियम से श्वास लेने में कष्ट होता है। फोम, रबर, रेफ्रिजरेशन, एयरोसोल कारखानों से वातावरण में घुलती गैस से प्राणवायु के स्रोत 'ओजन परत' के टूटने का खतरा 1986 में विदित हुआ है। आज की प्रमुख समस्या क्या है: