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चीन का ऐक फूल जो दिखने मे हूबहू ऐक पक्षी...

चीन का ऐक फूल जो दिखने मे हूबहू ऐक पक्षी जैसा..

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Select the option that represents the correct order of the given words as they would appear in an English dictionary. उस विकल्प का चयन करें जो दिए गए शब्दों के सही क्रम का प्रतिनिधित्व करता है जैसा की वे एक अंग्रेजी शब्दकोश में दिखाई देंगे। 1. Pristine 2. Precious 3. Pressure 4. Presume 5. Precaution

Select the option that represents the correct order of the given words as they would appear in an English dictionary. उस विकल्प का चयन करें जो दिए गए शब्दों के सही क्रम का प्रतिनिधित्व करता है जैसा की वे एक अंग्रेजी शब्दकोश में दिखाई देंगे। 1 Lexicon 2 Lacuna 3 Lacerate 4 Lactation 5 Locust

हमें स्वतंत्र हुए 15 वर्ष ही हुए थे कि पड़ोसी चीन ने हमारी पीठ में छुरा भोंक दिया। उत्तरी सीमा की सफेद बर्फीली चोटियाँ शहीदों के खून से सनकर लाल हो गई। हज़ारों माँओं की गोदें सूनी हुई. हज़ारों की माँग का सिंदूर पुंछ गया और लाखों अभागे बच्चे पिता के प्यार से वंचित हो गए। गणतंत्र दिवस निकट आ रहा था। देश का हौसला पस्त था। कोई उमग नहीं रह गई थी पर्व मनाने की। तब यह सोचा गया कि जानी-मानी फिल्मी हस्तियाँ आयोजन में शामिल हों तो भीड़ उमड़ेगी। वहाँ कोई ऐसा गीत प्रस्तुत हो जो लोगों के दिलों को छूकर उन्हें झकझोर सके। चुनौती फिल्म जगत तक पहुँची। एक नौजवान गीतकार प्रदीप ने चुनौती स्वीकारने का मन बनाया और गीत लिखना शुरू किया। लेकिन सुर और स्वर के बिना गीत का क्या! प्रदीप संगीत निर्देशक सी. रामचंद्र के पास पहुंचे। उन्हें गीत पंसद आया और रक्षा मंत्रालय को सूचना दे दी गई। 26 जनवरी का शुभ दिन आया। लाखों की भीड़ बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही थी। तब तक जो धुन बज रही थी वह हटी और थोड़ी देर शाति रही। तभी उस शांति को चीरता हुआ लता मंगेशकर का वेदना और चुनौती भरा स्वर सुनाई पड़ा -"ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी।" समय जैसे थम गया। सभी के मन एक ही भाव, एक ही रस में डूब गए। गीत समाप्त हुआ तो लगभग दो लाख लोग सिसक रहे थे। आँसू थे कि थमते ही न थे। 'मांग का सिंदूर पुंछ जाना' मुहावरे का अर्थ है:

हमें स्वतंत्र हुए 15 वर्ष ही हुए थे कि पड़ोसी चीन ने हमारी पीठ में छुरा भोंक दिया। उत्तरी सीमा की सफेद बर्फीली चोटियाँ शहीदों के खून से सनकर लाल हो गई। हज़ारों माँओं की गोदें सूनी हुई. हज़ारों की माँग का सिंदूर पुंछ गया और लाखों अभागे बच्चे पिता के प्यार से वंचित हो गए। गणतंत्र दिवस निकट आ रहा था। देश का हौसला पस्त था। कोई उमग नहीं रह गई थी पर्व मनाने की। तब यह सोचा गया कि जानी-मानी फिल्मी हस्तियाँ आयोजन में शामिल हों तो भीड़ उमड़ेगी। वहाँ कोई ऐसा गीत प्रस्तुत हो जो लोगों के दिलों को छूकर उन्हें झकझोर सके। चुनौती फिल्म जगत तक पहुँची। एक नौजवान गीतकार प्रदीप ने चुनौती स्वीकारने का मन बनाया और गीत लिखना शुरू किया। लेकिन सुर और स्वर के बिना गीत का क्या! प्रदीप संगीत निर्देशक सी. रामचंद्र के पास पहुंचे। उन्हें गीत पंसद आया और रक्षा मंत्रालय को सूचना दे दी गई। 26 जनवरी का शुभ दिन आया। लाखों की भीड़ बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही थी। तब तक जो धुन बज रही थी वह हटी और थोड़ी देर शाति रही। तभी उस शांति को चीरता हुआ लता मंगेशकर का वेदना और चुनौती भरा स्वर सुनाई पड़ा -"ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी।" समय जैसे थम गया। सभी के मन एक ही भाव, एक ही रस में डूब गए। गीत समाप्त हुआ तो लगभग दो लाख लोग सिसक रहे थे। आँसू थे कि थमते ही न थे। 'उमड़ना' क्रिया का कौन-सा प्रयोग ठीक नहीं है?

हमें स्वतंत्र हुए 15 वर्ष ही हुए थे कि पड़ोसी चीन ने हमारी पीठ में छुरा भोंक दिया। उत्तरी सीमा की सफेद बर्फीली चोटियाँ शहीदों के खून से सनकर लाल हो गई। हज़ारों माँओं की गोदें सूनी हुई. हज़ारों की माँग का सिंदूर पुंछ गया और लाखों अभागे बच्चे पिता के प्यार से वंचित हो गए। गणतंत्र दिवस निकट आ रहा था। देश का हौसला पस्त था। कोई उमग नहीं रह गई थी पर्व मनाने की। तब यह सोचा गया कि जानी-मानी फिल्मी हस्तियाँ आयोजन में शामिल हों तो भीड़ उमड़ेगी। वहाँ कोई ऐसा गीत प्रस्तुत हो जो लोगों के दिलों को छूकर उन्हें झकझोर सके। चुनौती फिल्म जगत तक पहुँची। एक नौजवान गीतकार प्रदीप ने चुनौती स्वीकारने का मन बनाया और गीत लिखना शुरू किया। लेकिन सुर और स्वर के बिना गीत का क्या! प्रदीप संगीत निर्देशक सी. रामचंद्र के पास पहुंचे। उन्हें गीत पंसद आया और रक्षा मंत्रालय को सूचना दे दी गई। 26 जनवरी का शुभ दिन आया। लाखों की भीड़ बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही थी। तब तक जो धुन बज रही थी वह हटी और थोड़ी देर शाति रही। तभी उस शांति को चीरता हुआ लता मंगेशकर का वेदना और चुनौती भरा स्वर सुनाई पड़ा -"ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी।" समय जैसे थम गया। सभी के मन एक ही भाव, एक ही रस में डूब गए। गीत समाप्त हुआ तो लगभग दो लाख लोग सिसक रहे थे। आँसू थे कि थमते ही न थे। 'पीठ में छुरा भोंकना' का अर्थ है:

हमें स्वतंत्र हुए 15 वर्ष ही हुए थे कि पड़ोसी चीन ने हमारी पीठ में छुरा भोंक दिया। उत्तरी सीमा की सफेद बर्फीली चोटियाँ शहीदों के खून से सनकर लाल हो गई। हज़ारों माँओं की गोदें सूनी हुई. हज़ारों की माँग का सिंदूर पुंछ गया और लाखों अभागे बच्चे पिता के प्यार से वंचित हो गए। गणतंत्र दिवस निकट आ रहा था। देश का हौसला पस्त था। कोई उमग नहीं रह गई थी पर्व मनाने की। तब यह सोचा गया कि जानी-मानी फिल्मी हस्तियाँ आयोजन में शामिल हों तो भीड़ उमड़ेगी। वहाँ कोई ऐसा गीत प्रस्तुत हो जो लोगों के दिलों को छूकर उन्हें झकझोर सके। चुनौती फिल्म जगत तक पहुँची। एक नौजवान गीतकार प्रदीप ने चुनौती स्वीकारने का मन बनाया और गीत लिखना शुरू किया। लेकिन सुर और स्वर के बिना गीत का क्या! प्रदीप संगीत निर्देशक सी. रामचंद्र के पास पहुंचे। उन्हें गीत पंसद आया और रक्षा मंत्रालय को सूचना दे दी गई। 26 जनवरी का शुभ दिन आया। लाखों की भीड़ बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही थी। तब तक जो धुन बज रही थी वह हटी और थोड़ी देर शाति रही। तभी उस शांति को चीरता हुआ लता मंगेशकर का वेदना और चुनौती भरा स्वर सुनाई पड़ा -"ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी।" समय जैसे थम गया। सभी के मन एक ही भाव, एक ही रस में डूब गए। गीत समाप्त हुआ तो लगभग दो लाख लोग सिसक रहे थे। आँसू थे कि थमते ही न थे। देश का हौसला पस्त था, क्योंकि: