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English बोलना चाहते हो तो अपने आस-पास की...

English बोलना चाहते हो तो अपने आस-पास की चीज़ों को English में बोलना सीखों | Kitchen Vocabulary

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निर्देश: नीचे दिए गये गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा गद्यांश में वर्णित तथ्यों के आधार पर पर्श्नों के उत्तर दीजिए भाग्य को भी मैं इसी तरह मानता हूँ कि वह तो विधाता का ही दूसरा रूप है। वे सर्व्यान्तर्यामी और सार्वकालिक रूप मैं है, उनका अस्त ही कब हुआ कि उदय हो। यानी भाग्य के उदय का प्रश्न सदा हमारी अपनी अपेक्षा से है। धरती का रुख सूरज की तरफ हो जाए, यही उसके लिए सूर्योदय है। हमारा मुख सही भाग्य की तरफ हो जाए तो इसी को भाग्योदय कहना चाहिए। भाग्य को कहीं से खींचकर उदय में लाना नहीं, न अपने साथ ही ज्यादा खींचतान करनी है। सिर्फ मुँह को मोड़ लेना है। मुख हम हमेशा अपनी तरफ रखा करते हैं। अपने से प्यार करते हैं, अपने ही को चाहते हैं, अपने को आराम देते हैं, अपनी सेवा करते हैं, दूसरों को अपने लिए मानते हैं, सब कुछ अपने अनुकूल चाहते हैं। चाहते यह हैं कि हम पूजा और प्रशंसा के केंद्र हो और दूसरे आस-पास हमारे इसी भाव में मंडराया करें। इस वासना से हमें छुट्टी नहीं मिल पाती। प्रस्तुत गद्यांश में सूर्योदय शब्द को कैसा बताया गया है?