भारत के राष्ट्रीय प्रतीक / सामान्य ज्ञान / राष्ट्रीय प्रतीक / national symbols #shorts #gk #gkquiz
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 के अनुसार कौन-सा कथन सही है?
राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं में व्यक्तिगत गुणों के अतिरिक्त संगठन में काम करने का गुण भी होना चाहिए। उनमें आज्ञापालन का भाव हो और वे अपने विकारों को राष्ट्रीय इच्छा की वेदी पर न्योछावर कर दें। जो काम हो वह संगठन के साथ। राष्ट्रीय महासभा की आकांक्षाओं का उल्लंघन कभी न किया जाए। यदि सत्य अंत:करण किसी भी तरह न माने तब भी राष्ट्रीय नेता की सम्मति अवश्य ही ले ली जाए। हम यह नहीं कह सकते कि अपने अंत:करण और विचार-शक्ति को बेच दिया जाए. परंतु हम यह अवश्य कहेंगे कि बहुत ही असाधारण अवस्थाओं को छोड़कर हमारे कार्य राष्ट्रीय महासभा के अधीन हों। व्यक्तिगत स्वतंत्रता बड़ी अच्छी चीज है - बड़ी अच्छी और अत्यंत ऊँची - परंतु राष्ट्र की स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए उसे संकुचित कर देना एक ऐसा त्याग है, जिसकी समता नहीं हो सकती, जो सब त्यागों में श्रेष्ठ है। वर्तमान परिस्थितियों में यदि किसी त्याग से तुरंत सफलता मिल सकती है, तो वह यही त्याग है। हमें आशा ही नहीं बल्कि विश्वास है कि जिन उत्साही और त्यागी आत्माओं ने सच्चे हृदय से राष्ट्रीय आहान का उत्तर दिया है, वे इस त्याग को करने में भी समर्थ होंगे। राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं में किस प्रकार का गुण होना चाहिए?
राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं में व्यक्तिगत गुणों के अतिरिक्त संगठन में काम करने का गुण भी होना चाहिए। उनमें आज्ञापालन का भाव हो और वे अपने विकारों को राष्ट्रीय इच्छा की वेदी पर न्योछावर कर दें। जो काम हो वह संगठन के साथ। राष्ट्रीय महासभा की आकांक्षाओं का उल्लंघन कभी न किया जाए। यदि सत्य अंत:करण किसी भी तरह न माने तब भी राष्ट्रीय नेता की सम्मति अवश्य ही ले ली जाए। हम यह नहीं कह सकते कि अपने अंत:करण और विचार-शक्ति को बेच दिया जाए. परंतु हम यह अवश्य कहेंगे कि बहुत ही असाधारण अवस्थाओं को छोड़कर हमारे कार्य राष्ट्रीय महासभा के अधीन हों। व्यक्तिगत स्वतंत्रता बड़ी अच्छी चीज है - बड़ी अच्छी और अत्यंत ऊँची - परंतु राष्ट्र की स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए उसे संकुचित कर देना एक ऐसा त्याग है, जिसकी समता नहीं हो सकती, जो सब त्यागों में श्रेष्ठ है। वर्तमान परिस्थितियों में यदि किसी त्याग से तुरंत सफलता मिल सकती है, तो वह यही त्याग है। हमें आशा ही नहीं बल्कि विश्वास है कि जिन उत्साही और त्यागी आत्माओं ने सच्चे हृदय से राष्ट्रीय आहान का उत्तर दिया है, वे इस त्याग को करने में भी समर्थ होंगे। राष्ट्रीय आह्वान का उत्तर किसने दिया है?
राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं में व्यक्तिगत गुणों के अतिरिक्त संगठन में काम करने का गुण भी होना चाहिए। उनमें आज्ञापालन का भाव हो और वे अपने विकारों को राष्ट्रीय इच्छा की वेदी पर न्योछावर कर दें। जो काम हो वह संगठन के साथ। राष्ट्रीय महासभा की आकांक्षाओं का उल्लंघन कभी न किया जाए। यदि सत्य अंत:करण किसी भी तरह न माने तब भी राष्ट्रीय नेता की सम्मति अवश्य ही ले ली जाए। हम यह नहीं कह सकते कि अपने अंत:करण और विचार-शक्ति को बेच दिया जाए. परंतु हम यह अवश्य कहेंगे कि बहुत ही असाधारण अवस्थाओं को छोड़कर हमारे कार्य राष्ट्रीय महासभा के अधीन हों। व्यक्तिगत स्वतंत्रता बड़ी अच्छी चीज है - बड़ी अच्छी और अत्यंत ऊँची - परंतु राष्ट्र की स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए उसे संकुचित कर देना एक ऐसा त्याग है, जिसकी समता नहीं हो सकती, जो सब त्यागों में श्रेष्ठ है। वर्तमान परिस्थितियों में यदि किसी त्याग से तुरंत सफलता मिल सकती है, तो वह यही त्याग है। हमें आशा ही नहीं बल्कि विश्वास है कि जिन उत्साही और त्यागी आत्माओं ने सच्चे हृदय से राष्ट्रीय आहान का उत्तर दिया है, वे इस त्याग को करने में भी समर्थ होंगे। लेखक के अनुसार हमारे कार्य किसके अधीन होने चाहिए?
राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं में व्यक्तिगत गुणों के अतिरिक्त संगठन में काम करने का गुण भी होना चाहिए। उनमें आज्ञापालन का भाव हो और वे अपने विकारों को राष्ट्रीय इच्छा की वेदी पर न्योछावर कर दें। जो काम हो वह संगठन के साथ। राष्ट्रीय महासभा की आकांक्षाओं का उल्लंघन कभी न किया जाए। यदि सत्य अंत:करण किसी भी तरह न माने तब भी राष्ट्रीय नेता की सम्मति अवश्य ही ले ली जाए। हम यह नहीं कह सकते कि अपने अंत:करण और विचार-शक्ति को बेच दिया जाए. परंतु हम यह अवश्य कहेंगे कि बहुत ही असाधारण अवस्थाओं को छोड़कर हमारे कार्य राष्ट्रीय महासभा के अधीन हों। व्यक्तिगत स्वतंत्रता बड़ी अच्छी चीज है - बड़ी अच्छी और अत्यंत ऊँची - परंतु राष्ट्र की स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए उसे संकुचित कर देना एक ऐसा त्याग है, जिसकी समता नहीं हो सकती, जो सब त्यागों में श्रेष्ठ है। वर्तमान परिस्थितियों में यदि किसी त्याग से तुरंत सफलता मिल सकती है, तो वह यही त्याग है। हमें आशा ही नहीं बल्कि विश्वास है कि जिन उत्साही और त्यागी आत्माओं ने सच्चे हृदय से राष्ट्रीय आहान का उत्तर दिया है, वे इस त्याग को करने में भी समर्थ होंगे। विकारों को किस वेदी पर न्योछावर करना चाहिए?
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