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चाँद

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निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। एक ही दीया, स्नेह से भरा, प्रेम का प्रकाश, प्रेम से धरा, झिलमिला हवा को तिलमिला रहा ज्योति का निशान जो हिला रहा मुस्करा रहा है अंधकार पर। यह मजार है किसी शहीद का, दर्शनीय था जो चाँद ईद का, देश का सपूत था, गुमान था सत्य का स्वरूप नौजवान था जो चला किया सदा दुधार पर। ईद का चाँद किसे कहा गया है ?

कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। एक ही दीया, स्नेह से भरा, प्रेम का प्रकाश, प्रेम से धरा, झिलमिला हवा को तिलमिला रहा ज्योति का निशान जो हिला रहा मुस्करा रहा है अंधकार पर। यह मजार है किसी शहीद का, दर्शनीय था जो चाँद ईद का, देश का सपूत था, गुमान था सत्य का स्वरूप नौजवान था जो चला किया सदा दुधार पर। ईद का चाँद किसे कहा गया है?

निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। एक ही दीया, स्नेह से भरा, प्रेम का प्रकाश, प्रेम से धरा, झिलमिला हवा को तिलमिला रहा ज्योति का निशान जो हिला रहा मुस्करा रहा है अंधकार पर। यह मजार है किसी शहीद का, दर्शनीय था जो चाँद ईद का, देश का सपूत था, गुमान था सत्य का स्वरूप नौजवान था जो चला किया सदा दुधार पर। हवा क्यों तिलमिला रही है ?

निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। एक ही दीया, स्नेह से भरा, प्रेम का प्रकाश, प्रेम से धरा, झिलमिला हवा को तिलमिला रहा ज्योति का निशान जो हिला रहा मुस्करा रहा है अंधकार पर। यह मजार है किसी शहीद का, दर्शनीय था जो चाँद ईद का, देश का सपूत था, गुमान था सत्य का स्वरूप नौजवान था जो चला किया सदा दुधार पर। शहीद की कौन-सी विशेषता बताई गई है ?

निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। एक ही दीया, स्नेह से भरा, प्रेम का प्रकाश, प्रेम से धरा, झिलमिला हवा को तिलमिला रहा ज्योति का निशान जो हिला रहा मुस्करा रहा है अंधकार पर। यह मजार है किसी शहीद का, दर्शनीय था जो चाँद ईद का, देश का सपूत था, गुमान था सत्य का स्वरूप नौजवान था जो चला किया सदा दुधार पर। कविता में 'अंधकार' शब्द से आशय है-

कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। एक ही दीया, स्नेह से भरा, प्रेम का प्रकाश, प्रेम से धरा, झिलमिला हवा को तिलमिला रहा ज्योति का निशान जो हिला रहा मुस्करा रहा है अंधकार पर। यह मजार है किसी शहीद का, दर्शनीय था जो चाँद ईद का, देश का सपूत था, गुमान था सत्य का स्वरूप नौजवान था जो चला किया सदा दुधार पर। हवा क्यों तिलमिला रही है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 1 है जन्म लेते जगह में एक ही एक ही पौधा उन्हें है पालता रात में उन पर चमकता चाँद भी एक ही-सी चाँदनी है डालता छेद कर काँटा किसी की अँगुलियाँ फाड़ देता है किसी का वर वसन। प्यार डूबी तितलियों के पर कतर भौंर का है बेध देता श्याम तन फूल लेकर तितलियों को गोद में भौंर को अपना अनूठा रस पिला निज सुगन्धों का निराले ढंग से है सदा देता कली का जी खिला। है खटकता एक सबकी आँख में दूसरा है सोहता सुर-सीस पर। किस तरह कुल की बड़ाई काम दे जो किसी में हो बड़प्पन की कसर। कवि ने 'कांटे' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 1 है जन्म लेते जगह में एक ही एक ही पौधा उन्हें है पालता रात में उन पर चमकता चाँद भी एक ही-सी चाँदनी है डालता छेद कर काँटा किसी की अँगुलियाँ फाड़ देता है किसी का वर वसन। प्यार डूबी तितलियों के पर कतर भौंर का है बेध देता श्याम तन फूल लेकर तितलियों को गोद में भौंर को अपना अनूठा रस पिला निज सुगन्धों का निराले ढंग से है सदा देता कली का जी खिला। है खटकता एक सबकी आँख में दूसरा है सोहता सुर-सीस पर। किस तरह कुल की बड़ाई काम दे जो किसी में हो बड़प्पन की कसर। 'फूल' किसे कहा गया है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 1 है जन्म लेते जगह में एक ही एक ही पौधा उन्हें है पालता रात में उन पर चमकता चाँद भी एक ही-सी चाँदनी है डालता छेद कर काँटा किसी की अँगुलियाँ फाड़ देता है किसी का वर वसन। प्यार डूबी तितलियों के पर कतर भौंर का है बेध देता श्याम तन फूल लेकर तितलियों को गोद में भौंर को अपना अनूठा रस पिला निज सुगन्धों का निराले ढंग से है सदा देता कली का जी खिला। है खटकता एक सबकी आँख में दूसरा है सोहता सुर-सीस पर। किस तरह कुल की बड़ाई काम दे जो किसी में हो बड़प्पन की कसर। पद्यांश में किसे महत्त्व दिया गया है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 1 है जन्म लेते जगह में एक ही एक ही पौधा उन्हें है पालता रात में उन पर चमकता चाँद भी एक ही-सी चाँदनी है डालता छेद कर काँटा किसी की अँगुलियाँ फाड़ देता है किसी का वर वसन। प्यार डूबी तितलियों के पर कतर भौंर का है बेध देता श्याम तन फूल लेकर तितलियों को गोद में भौंर को अपना अनूठा रस पिला निज सुगन्धों का निराले ढंग से है सदा देता कली का जी खिला। है खटकता एक सबकी आँख में दूसरा है सोहता सुर-सीस पर। किस तरह कुल की बड़ाई काम दे जो किसी में हो बड़प्पन की कसर। 'बड़प्पन' शब्द का आशय है