Home
Class
DN_SHORTS
सामान्य ज्ञान / general knowledge / सामा...

सामान्य ज्ञान / general knowledge / सामान्य विज्ञान #viralshorts #gkinhindi #gk #gkquestions #short

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

Revision|General Term (सामान्य पद)|OMR

Binomial Formula(द्विपद सूत्र)|Number Of Terms (शर्तों की संख्या)-Questions(प्रश्न)|General Term (सामान्य पद)-Questions(प्रश्न)|Middle Term/(मध्य पद)-Questions (प्रश्न)|OMR

Maximum & Minimum Value of Trigonometric Function (त्रिकोणमिति फलन के उच्चतम एवं निम्नतम मान)|Trigonometrical Equations with their General Solution (त्रिकोणमितीय समीकरण उनके सामान्य हल)|Practice Questions (अभ्यास प्रश्न)|OMR

General Term (सामान्य पद)|Exercise Questions (प्रश्न)|Middle Term (मध्य पद)|Exercise Questions (प्रश्न)|OMR

General Geographical Introduction Of India(भारत का सामान्य भौगोलिक परिचय)|Summary

General Geographical Introduction Of India(भारत का सामान्य भौगोलिक परिचय)|Summary

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। महात्मा गाँधी- जैसे महान पुरुष की सहधर्मचारिणी के तौर पर पूज्य कस्तूरबा के बारे में राष्ट्र को आदर मालूम होना स्वाभाविक है। राष्ट्र ने महात्मा जी को 'बापू जी' के नाम से राष्ट्रपिता के स्थान पर कायम किया ही है। इसलिए कस्तूरबा-भी 'बा' के एकाक्षरी नाम से राष्ट्रमाता बन सकी हैं। किन्तु सिर्फ महात्मा जी के साथ के सम्बन्ध के कारण ही नहीं, बल्कि अपने आंतरिक सद्गुण और निष्ठा के कारण भी कस्तूरबा राष्ट्रमाता बन पायी हैं। चाहे दक्षिण अफ्रीका में हों या हिन्दुस्तान में, सरकार के खिलाफ लड़ाई के समय जब-जब चारिभ्य का तेज प्रकट करने का मौका आया कस्तूरबा हमेशा इस दिव्य कसौटी से सफलतापूर्वक पार हुई हैं। इससे भी विशेष बात यह है कि बड़ी तेजी से बदलते हुए आज के युग में भी आर्य सती स्त्री का जो आदर्श हिन्दुस्तान ने अपने हृदय में कायम रखा है, उस आवर्श की जीवित प्रतिमा के रूप में राष्ट्र पूज्य कस्तूरबा को पहचानता है। इस तरह की विविध लोकोत्तर योग्यता के कारण आज सारा राष्ट्र कस्तूरबा की पूजा करता है। कस्तूरबा अनपढ़ थीं। हम यह भी कह सकते हैं कि उनका भाषा ज्ञान सामान्य देहाती से अधिक नहीं था। दक्षिण अफ्रीका में जाकर रहीं इसलिए वह कुछ अंग्रेजी समझ सकती थीं और पचीस-तीस शब्द बोल भी लेती थीं। मिस्टर एंडूज-जैसे कोई विदेशी मेहमान घर आने पर उन शब्दों की पूँजी से वह अपना काम चला लेती और कभी-कभी तो उनके उस सम्भाषण से विनोद भी पैदा हो जाता। कस्तूरबा को गीता के ऊपर असाधारण श्रद्धा थी। पढ़नेवाला कोई मिले तो वह भक्तिपूर्वक गीता पड़ने के लिए बैठ जाती। किन्तु उनकी गाड़ी कभी भी बहुत आगे नहीं जा सकी। फिर भी आगांखाँ महल में कारावास के दरमियान उन्होंने बार-बार गीता के पाठ लेने की कोशिश चालू रखी थीं।किस कारण कस्तूरबा राष्ट्रमाता बन पायौं?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। महात्मा गाँधी- जैसे महान पुरुष की सहधर्मचारिणी के तौर पर पूज्य कस्तूरबा के बारे में राष्ट्र को आदर मालूम होना स्वाभाविक है। राष्ट्र ने महात्मा जी को 'बापू जी' के नाम से राष्ट्रपिता के स्थान पर कायम किया ही है। इसलिए कस्तूरबा-भी 'बा' के एकाक्षरी नाम से राष्ट्रमाता बन सकी हैं। किन्तु सिर्फ महात्मा जी के साथ के सम्बन्ध के कारण ही नहीं, बल्कि अपने आंतरिक सद्गुण और निष्ठा के कारण भी कस्तूरबा राष्ट्रमाता बन पायी हैं। चाहे दक्षिण अफ्रीका में हों या हिन्दुस्तान में, सरकार के खिलाफ लड़ाई के समय जब-जब चारिभ्य का तेज प्रकट करने का मौका आया कस्तूरबा हमेशा इस दिव्य कसौटी से सफलतापूर्वक पार हुई हैं। इससे भी विशेष बात यह है कि बड़ी तेजी से बदलते हुए आज के युग में भी आर्य सती स्त्री का जो आदर्श हिन्दुस्तान ने अपने हृदय में कायम रखा है, उस आवर्श की जीवित प्रतिमा के रूप में राष्ट्र पूज्य कस्तूरबा को पहचानता है। इस तरह की विविध लोकोत्तर योग्यता के कारण आज सारा राष्ट्र कस्तूरबा की पूजा करता है। कस्तूरबा अनपढ़ थीं। हम यह भी कह सकते हैं कि उनका भाषा ज्ञान सामान्य देहाती से अधिक नहीं था। दक्षिण अफ्रीका में जाकर रहीं इसलिए वह कुछ अंग्रेजी समझ सकती थीं और पचीस-तीस शब्द बोल भी लेती थीं। मिस्टर एंडूज-जैसे कोई विदेशी मेहमान घर आने पर उन शब्दों की पूँजी से वह अपना काम चला लेती और कभी-कभी तो उनके उस सम्भाषण से विनोद भी पैदा हो जाता। कस्तूरबा को गीता के ऊपर असाधारण श्रद्धा थी। पढ़नेवाला कोई मिले तो वह भक्तिपूर्वक गीता पड़ने के लिए बैठ जाती। किन्तु उनकी गाड़ी कभी भी बहुत आगे नहीं जा सकी। फिर भी आगांखाँ महल में कारावास के दरमियान उन्होंने बार-बार गीता के पाठ लेने की कोशिश चालू रखी थीं। प्रस्तुत गद्यांश में विदेशी का क्या नाम था?