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जलियांवाला बाग हत्याकांड कब हुआ था । jal...

जलियांवाला बाग हत्याकांड कब हुआ था । jaliyanwala bag massacre । gk । gs । upsc । #shorts

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गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। प्रत्येक प्रभात सुंदर चीजें लेकर उपस्थित होता है, पर यदि हमने कल तथा परसों के प्रभात की कृपा से लाभ नहीं उठाया तो आज के प्रभात से लाभ उठाने की हमारी शक्ति क्षीण होती जाएगी, और यही गति रही तो फिर हम उस शक्ति को बिल्कुल ही गँवा बैठेंगे। किसी विद्वान् ने ठीक ही कहा है कि खोई हुई सम्पत्ति कमखर्ची और परिश्रम से प्राप्त की जा सकती है, भूला हुआ ज्ञान अध्ययन से प्राप्त हो सकता है, गँवाया हुआ स्वास्थ्य दवा और संयम से लौटाया जा सकता है परन्तु नष्ट किया हुआ समय सदा के लिए चला जाता है। वह बस स्मृति की एक चीज हो जाता है और अतीत की एक छाया मात्र रह जाता है। ग्लेडस्टन सरीखा प्रतिभाशाली व्यक्ति अपनी जेब में एक __ छोटी-सी पुस्तक हमेशा लेकर निकलता था। उन्हें चिन्ता रहती थी किकहीं कोई घड़ी व्यर्थ न चली जाए। तब हम जैसे साधारण मनुष्यों को अपने अमूल्य समय को नष्ट होने से बचाने के लिए क्या नहीं करना चाहिए? प्रतिभावान् पुरुष समय के छोटे-छोटे टुकड़ों को बचाकर महान हो जाते हैं और अपनी असफलता पर आश्चर्य करने वाले उन्हें यों ही उड़ जाने देते हैं। उन्हें जीवन-भर कभी समय का मूल्य मालूम __ ही नहीं हो पाता। समय का लाभ उठाने की शक्ति कब क्षीण हो जाती है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। 'मैं' किसका प्रतीक है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। बिछड़े पत्ते की चाह क्या थी?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। 'हरियल' शब्द का अर्थ है