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GK का dose हर रोज | daily update of GK c...

GK का dose हर रोज | daily update of GK current affairs|

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Daily Current Affairs 11 Feb 2020 | SSC-CGL, RBI, NDA, SBI, IBPS, Railways, UPSC

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 6 हारा हूँ सौ बार गुनाहों से लड़लड़कर लेकिन बारम्बार लड़ा हूँ मैं उठ उठ कर इससे मेरा हर गुनाह भी मुझसे हारा मैंने अपने जीवन को इस तरह उबारा डूबा हूँ हर रोज किनारे तक आ आकर लेकिन में हर रोज उगा हूँ जैसे दिनकर इससे मेरी असफलता भी मुझसे हारी मैंने अपनी सुन्दरता इस तरह सँवारी। कवि ने अपना जीवन कैसे सँवारा?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 6 हारा हूँ सौ बार गुनाहों से लड़लड़कर लेकिन बारम्बार लड़ा हूँ मैं उठ उठ कर इससे मेरा हर गुनाह भी मुझसे हारा मैंने अपने जीवन को इस तरह उबारा डूबा हूँ हर रोज किनारे तक आ आकर लेकिन में हर रोज उगा हूँ जैसे दिनकर इससे मेरी असफलता भी मुझसे हारी मैंने अपनी सुन्दरता इस तरह सँवारी। 'उठ उठ' में अलंकार है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 6 हारा हूँ सौ बार गुनाहों से लड़लड़कर लेकिन बारम्बार लड़ा हूँ मैं उठ उठ कर इससे मेरा हर गुनाह भी मुझसे हारा मैंने अपने जीवन को इस तरह उबारा डूबा हूँ हर रोज किनारे तक आ आकर लेकिन में हर रोज उगा हूँ जैसे दिनकर इससे मेरी असफलता भी मुझसे हारी मैंने अपनी सुन्दरता इस तरह सँवारी। असफलता में प्रयुक्त उपसर्ग है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 6 हारा हूँ सौ बार गुनाहों से लड़लड़कर लेकिन बारम्बार लड़ा हूँ मैं उठ उठ कर इससे मेरा हर गुनाह भी मुझसे हारा मैंने अपने जीवन को इस तरह उबारा डूबा हूँ हर रोज किनारे तक आ आकर लेकिन में हर रोज उगा हूँ जैसे दिनकर इससे मेरी असफलता भी मुझसे हारी मैंने अपनी सुन्दरता इस तरह सँवारी। 'किनारे तक आकर डूबने' का अर्थ है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 6 हारा हूँ सौ बार गुनाहों से लड़लड़कर लेकिन बारम्बार लड़ा हूँ मैं उठ उठ कर इससे मेरा हर गुनाह भी मुझसे हारा मैंने अपने जीवन को इस तरह उबारा डूबा हूँ हर रोज किनारे तक आ आकर लेकिन में हर रोज उगा हूँ जैसे दिनकर इससे मेरी असफलता भी मुझसे हारी मैंने अपनी सुन्दरता इस तरह सँवारी। कवि सूर्य का उदाहरण देकर क्या बताना चाहते हैं?

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