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मेहनत का फल जरूर मिलता है By Sonu sharma...

मेहनत का फल जरूर मिलता है By Sonu sharma Hard Motivation speech @Startupjabalpur @Narmada Tutorial

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निर्देश :निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मैने 'अतिथि' शब्द के समानान्तर एक दूसरा शब्द गढ़ा है 'असमय। अतिथि का अर्थ है जिसकी आने की तिथि न हो अर्थात् आने का दिन निश्चित न हो, मतलब कि जो बिना पूर्व सूचना के अकस्मात् टपक पड़े। ठीक उसी तरह 'असमय' का अर्थ कीजिए कि जिसका समय न हो जब चाहे आ जाए और आने में ही नहीं जाने में भी “असमय' हो। तात्पर्य की कब तक रहेगा, कब जाएगा इसका कोई ठिकना नहीं। मैं 'अतिथियों से नहीं घबराता पर 'असमय' से जरूर काँपता हूँ, कारण है कि मै कामकाजी आदमी हैं।' इस युग में कौन काम-काजी नहीं है। जिसको देखिए वही अस्त-व्यस्तता के मारे परेशान है। आजकल बड़प्पन देखने के कई साधन हैं, उनमें एक यह कहना भी कि 'क्या बताऊँ साहब, खाना खाने तक की फुरसत नहीं मिलती, नींद और चैन हराम है।' बात बहुत गलत हो, ऐसा नहीं। जिसको देखिए, चेहरे पर हवाइयां उड़ रही हैं, नाक की सीध में दौड़ा जा रहा है। जिधर नजर डालिये उधर ही भाग-दौड़। आदमी ने मशीनें इजाद की आराम के लिए मगर मकड़े की तरह वह उन मशीनों में ही उलझकर अपनी आजादी खो बैठा, अपनी आदमियता खो बैठा। बाल-बच्चों के बीच भी दस मिनट इत्मीनान से बैठने का, दिल बहलाने का समय नहीं मिलता। क्या बताऊँ साहब, खाना खाने तक की फुरसत नहीं मिलती, नींद और चैन हराम है" इस वाक्य को लेखक ने माना है

निर्देश :निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मैने 'अतिथि' शब्द के समानान्तर एक दूसरा शब्द गढ़ा है 'असमय। अतिथि का अर्थ है जिसकी आने की तिथि न हो अर्थात् आने का दिन निश्चित न हो, मतलब कि जो बिना पूर्व सूचना के अकस्मात् टपक पड़े। ठीक उसी तरह 'असमय' का अर्थ कीजिए कि जिसका समय न हो जब चाहे आ जाए और आने में ही नहीं जाने में भी “असमय' हो। तात्पर्य की कब तक रहेगा, कब जाएगा इसका कोई ठिकना नहीं। मैं 'अतिथियों से नहीं घबराता पर 'असमय' से जरूर काँपता हूँ, कारण है कि मै कामकाजी आदमी हैं।' इस युग में कौन काम-काजी नहीं है। जिसको देखिए वही अस्त-व्यस्तता के मारे परेशान है। आजकल बड़प्पन देखने के कई साधन हैं, उनमें एक यह कहना भी कि 'क्या बताऊँ साहब, खाना खाने तक की फुरसत नहीं मिलती, नींद और चैन हराम है।' बात बहुत गलत हो, ऐसा नहीं। जिसको देखिए, चेहरे पर हवाइयां उड़ रही हैं, नाक की सीध में दौड़ा जा रहा है। जिधर नजर डालिये उधर ही भाग-दौड़। आदमी ने मशीनें इजाद की आराम के लिए मगर मकड़े की तरह वह उन मशीनों में ही उलझकर अपनी आजादी खो बैठा, अपनी आदमियता खो बैठा। बाल-बच्चों के बीच भी दस मिनट इत्मीनान से बैठने का, दिल बहलाने का समय नहीं मिलता। मशीनों की खोज का कारण था कि

निर्देश :निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मैने 'अतिथि' शब्द के समानान्तर एक दूसरा शब्द गढ़ा है 'असमय। अतिथि का अर्थ है जिसकी आने की तिथि न हो अर्थात् आने का दिन निश्चित न हो, मतलब कि जो बिना पूर्व सूचना के अकस्मात् टपक पड़े। ठीक उसी तरह 'असमय' का अर्थ कीजिए कि जिसका समय न हो जब चाहे आ जाए और आने में ही नहीं जाने में भी “असमय' हो। तात्पर्य की कब तक रहेगा, कब जाएगा इसका कोई ठिकना नहीं। मैं 'अतिथियों से नहीं घबराता पर 'असमय' से जरूर काँपता हूँ, कारण है कि मै कामकाजी आदमी हैं।' इस युग में कौन काम-काजी नहीं है। जिसको देखिए वही अस्त-व्यस्तता के मारे परेशान है। आजकल बड़प्पन देखने के कई साधन हैं, उनमें एक यह कहना भी कि 'क्या बताऊँ साहब, खाना खाने तक की फुरसत नहीं मिलती, नींद और चैन हराम है।' बात बहुत गलत हो, ऐसा नहीं। जिसको देखिए, चेहरे पर हवाइयां उड़ रही हैं, नाक की सीध में दौड़ा जा रहा है। जिधर नजर डालिये उधर ही भाग-दौड़। आदमी ने मशीनें इजाद की आराम के लिए मगर मकड़े की तरह वह उन मशीनों में ही उलझकर अपनी आजादी खो बैठा, अपनी आदमियता खो बैठा। बाल-बच्चों के बीच भी दस मिनट इत्मीनान से बैठने का, दिल बहलाने का समय नहीं मिलता। आज के कामकाजी आदमी की विशेषता है कि

निर्देश :निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मैने 'अतिथि' शब्द के समानान्तर एक दूसरा शब्द गढ़ा है 'असमय। अतिथि का अर्थ है जिसकी आने की तिथि न हो अर्थात् आने का दिन निश्चित न हो, मतलब कि जो बिना पूर्व सूचना के अकस्मात् टपक पड़े। ठीक उसी तरह 'असमय' का अर्थ कीजिए कि जिसका समय न हो जब चाहे आ जाए और आने में ही नहीं जाने में भी “असमय' हो। तात्पर्य की कब तक रहेगा, कब जाएगा इसका कोई ठिकना नहीं। मैं 'अतिथियों से नहीं घबराता पर 'असमय' से जरूर काँपता हूँ, कारण है कि मै कामकाजी आदमी हैं।' इस युग में कौन काम-काजी नहीं है। जिसको देखिए वही अस्त-व्यस्तता के मारे परेशान है। आजकल बड़प्पन देखने के कई साधन हैं, उनमें एक यह कहना भी कि 'क्या बताऊँ साहब, खाना खाने तक की फुरसत नहीं मिलती, नींद और चैन हराम है।' बात बहुत गलत हो, ऐसा नहीं। जिसको देखिए, चेहरे पर हवाइयां उड़ रही हैं, नाक की सीध में दौड़ा जा रहा है। जिधर नजर डालिये उधर ही भाग-दौड़। आदमी ने मशीनें इजाद की आराम के लिए मगर मकड़े की तरह वह उन मशीनों में ही उलझकर अपनी आजादी खो बैठा, अपनी आदमियता खो बैठा। बाल-बच्चों के बीच भी दस मिनट इत्मीनान से बैठने का, दिल बहलाने का समय नहीं मिलता। लेखक घबराता है।

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। लोक कथाएँ आम जीवन में सदियों से रची-बसी हैं। इन में हम भूमिका निभाते हैं। अगर हम अपनी पढ़ी हुई लोक कथाओं को याद करें तो सहजता से हमें इनके कई उदाहरण मिल जाते हैं। जब हम कहानी सुना रहे होते हैं तो बच्चों से हमारी यह अपेक्षा रहती है कि वे पहली घटी घटनाओं को जरूर दोहराएँ। बच्चे भी घटना को याद रखते हुए साथ-साथ मजे से दोहराते हैं। इस तरह कथा सुनाने की इस प्रक्रिया में बच्चे इन घटनाओं को एक क्रम में रख कर देखते हैं। इन क्रमिक घटनाओं में एक तर्क होता है जो बच्चों के मनोभावों से मिलता-जुलता है। 'परिवेश की महक' पद का अर्थ है