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अपठित काव्यांश...

अपठित काव्यांश

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निर्देशः निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: आकाश का साफा बाँधकर सूरज की चिलम खींचता बैठा है पहाड़ घुटनों पर पड़ी है नदी चादर सी पास ही दहक रही है। पलाश के जंगल की अँगीठी अंधकार दूर पूर्व में सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा अचानक बोला मोर जैसे किसी ने आवाज दी - 'अजी सुनते हो।' चिलम औंधी धुआँ उठा सूरज डूबा अँधेरा छा गया। अचानक तुरत-फुरत घटनाएँ होने का कारण है-