Home
Class
DN_SHORTS
मेहनत के आगे ज्ञान कुछ नहीं HarshVardhan...

मेहनत के आगे ज्ञान कुछ नहीं HarshVardhan Jain Best Motivational Video||

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

पढ़ाई में मन नहीं लगता क्या करें ? Best Exam Motivation Video | Exam के लिए Best Preparation Tips

Five boys J, K, L, M and T are standing in a queue one after the other (not necessarily in the same order). There is only one boy between K and J. There is only one boy between K and L. There are four boys behind J. T is three places ahead of L. How many boys are ahead of M? पांच लड़के - J, K, L, M और T एक कतार में एक के बाद एक खड़े हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि इसी क्रम में | K और J के बीच केवल एक लड़का है | K और L के बीच केवल एक लड़का है |J के पीछे चार लड़के हैं | T, L से तीन स्थान आगे है | M से आगे कितने लड़के हैं ?

Statement/ कथन : I.Some Delhites are Singaporeans/ कुछ दिल्लीवासी सिंगापुर के वासी हैं | II.No singaporean is an American./ कोई भी सिंगापुर का वासी अमेरिकी नहीं है। Conclusion/ निष्कर्ष: I.Some Americans are Singaporeans./ कुछ अमेरिकी सिंगापुर के वासी हैं | II. All Singaporeans are Delhiites./ सभी सिंगापुर के वासी दिल्लीवासी हैं |

शिक्षा मनुष्य को मस्तिष्क और शरीर का उचित तालमेल करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्य-पुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिंतन न दे। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सध्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? सहृदय, सच्चा परंतु अनपढ़ मज़दूर उस स्नातक से कहीं अच्छा है जो निर्दय और चरित्रहीन है। संसार के सभी वैभव और सुख-साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो। हमारे कुछ अधिकार और कर्तव्य भी हैं। शिक्षित व्यक्ति को कर्तव्यों का उतना ही ध्यान रखना चाहिए जितना कि अधिकारों का अच्छी शिक्षा की विशेषता नहीं है

शिक्षा मनुष्य को मस्तिष्क और शरीर का उचित तालमेल करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्य-पुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिंतन न दे। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सध्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? सहृदय, सच्चा परंतु अनपढ़ मज़दूर उस स्नातक से कहीं अच्छा है जो निर्दय और चरित्रहीन है। संसार के सभी वैभव और सुख-साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो। हमारे कुछ अधिकार और कर्तव्य भी हैं। शिक्षित व्यक्ति को कर्तव्यों का उतना ही ध्यान रखना चाहिए जितना कि अधिकारों का 'सुख-साधन' का विग्रह और समास है

शिक्षा मनुष्य को मस्तिष्क और शरीर का उचित तालमेल करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्य-पुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिंतन न दे। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सध्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? सहृदय, सच्चा परंतु अनपढ़ मज़दूर उस स्नातक से कहीं अच्छा है जो निर्दय और चरित्रहीन है। संसार के सभी वैभव और सुख-साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो। हमारे कुछ अधिकार और कर्तव्य भी हैं। शिक्षित व्यक्ति को कर्तव्यों का उतना ही ध्यान रखना चाहिए जितना कि अधिकारों का मनुष्य तभी सुखी कहा जाता है जब

शिक्षा मनुष्य को मस्तिष्क और शरीर का उचित तालमेल करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्य-पुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिंतन न दे। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सध्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? सहृदय, सच्चा परंतु अनपढ़ मज़दूर उस स्नातक से कहीं अच्छा है जो निर्दय और चरित्रहीन है। संसार के सभी वैभव और सुख-साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो। हमारे कुछ अधिकार और कर्तव्य भी हैं। शिक्षित व्यक्ति को कर्तव्यों का उतना ही ध्यान रखना चाहिए जितना कि अधिकारों का 'हमारे कुछ अधिकार और कर्तव्य भी हैं। उपर्युक्त वाक्य किस प्रकार का है?

शिक्षा मनुष्य को मस्तिष्क और शरीर का उचित तालमेल करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्य-पुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिंतन न दे। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सध्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? सहृदय, सच्चा परंतु अनपढ़ मज़दूर उस स्नातक से कहीं अच्छा है जो निर्दय और चरित्रहीन है। संसार के सभी वैभव और सुख-साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो। हमारे कुछ अधिकार और कर्तव्य भी हैं। शिक्षित व्यक्ति को कर्तव्यों का उतना ही ध्यान रखना चाहिए जितना कि अधिकारों का कौन-सा शब्द अन् उपसर्ग से नहीं बना है?

शिक्षा मनुष्य को मस्तिष्क और शरीर का उचित तालमेल करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्य-पुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिंतन न दे। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सध्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? सहृदय, सच्चा परंतु अनपढ़ मज़दूर उस स्नातक से कहीं अच्छा है जो निर्दय और चरित्रहीन है। संसार के सभी वैभव और सुख-साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो। हमारे कुछ अधिकार और कर्तव्य भी हैं। शिक्षित व्यक्ति को कर्तव्यों का उतना ही ध्यान रखना चाहिए जितना कि अधिकारों का अधिकारों और कर्तव्यों के विषय में सुशिक्षित व्यक्ति

शिक्षा मनुष्य को मस्तिष्क और शरीर का उचित तालमेल करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्य-पुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिंतन न दे। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सध्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? सहृदय, सच्चा परंतु अनपढ़ मज़दूर उस स्नातक से कहीं अच्छा है जो निर्दय और चरित्रहीन है। संसार के सभी वैभव और सुख-साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो। हमारे कुछ अधिकार और कर्तव्य भी हैं। शिक्षित व्यक्ति को कर्तव्यों का उतना ही ध्यान रखना चाहिए जितना कि अधिकारों का वह अशिक्षित शिक्षित व्यक्ति से अच्छा है जो -