इन 4 लोगों से हमेशा दूर रहना || best motivational video in hindi by mahendra dogney #shorts #ytshort
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There are five classes: class 1, class 2, class 3, class 4 and class 5 in a school. They are one above the other. Class 1 is at the bottom, then class 2 above it and so on. Five videos M1, M2, M3, M4 and M5 are displayed in these given classes. Only one video is displayed in a particular class. Each video is displayed only one time. Video M5 is displayed at a even numbered class. Video M2 is displayed at class 1. Video M1 is displayed at the class just below M5. Video M4 is not displayed at even numbered class. एक स्कूल में पाँच कक्षाएं हैं: कक्षा 1, कक्षा 2, कक्षा 3, कक्षा 4 और कक्षा 5। वे एक के ऊपर एक हैं। कक्षा | सबसे नीचे है, फिर कक्षा 2 इसके ऊपर और इसी तरह ऊपर। इन दिए गए वर्गों में पांच वीडियो M 1, M 2, M 3, M 4 और M 5 प्रदर्शित किए गए हैं। केवल एक वीडियो एक विशेष वर्ग में प्रदर्शित होता है। प्रत्येक वीडियो को केवल एक बार प्रदर्शित किया जाता है। वीडियो M5 को एक सम संख्या वाले वर्ग में प्रदर्शित किया जाता है। वीडियो M2 को कक्षा 1 में प्रदर्शित किया गया है। वीडियो M1 को M5 के ठीक नीचे की कक्षा में प्रदर्शित किया गया है। वीडियो M4 को किसी भी सम संख्या वाले में प्रदर्शित नहीं किया गया है। Which of the following statement is not correct? / निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये बाल्यावस्था में हम शीघ्र ही सबकी बातों पर विश्वास कर लेते हैं और मित्र बना लेते हैं। हमारा मन अनेक कल्पनाओं से भरा रहता है। युवावस्था की मित्रता सहपाठी की मित्रता से अधिक दृढ़ शांत और गंभीर होती है। सच्चा मित्र वही है जो दृढ़-चित्त और सत्य-संकल्प का हो। अपने से अधिक आत्म-बल वाले व्यक्ति से मित्रता करना उचित है। क्योंकि वह महान कार्यों में हमारा मनोबल बढ़ाता है। सम्मानित, शुद्ध ह्दयी, कोमल, मेहनती, शिष्ट और सत्यनिष्ठ व्यक्ति पर हम पूरा विश्वास कर मित्रता कर सकते हैं। उससे धोखे की उम्मीद नहीं रहती। ऐसे जान-पहचान वालों से दूर रहना चाहिए जो न कोई बुद्धिमानी या हँसी-मजाक की बात कर सकते हैं और न दुःख के क्षण में सहानुभूति दिखला सकते हैं। मनुष्य को बुरी संगति करने से बचना चाहिए। नीति और सवृत्ति दोनों का नाश होने में देर नहीं लगती और व्यक्ति दिनोंदिन अवनति के गड्ढे में गिरता जाता है। उसका आध्यात्मिक विकास रूक जाता है। बुरे लोगों की संगति थोड़े समय में अपना प्रभाव डाल देती है और हमारे जीवन की पवित्रता नष्ट कर देती है। अतः अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातें करने वालों से दूर रहना चाहिए। लेखक कहता है कि हमें बुरी संगति से दूर रहना चाहिए। क्योंकि
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये बाल्यावस्था में हम शीघ्र ही सबकी बातों पर विश्वास कर लेते हैं और मित्र बना लेते हैं। हमारा मन अनेक कल्पनाओं से भरा रहता है। युवावस्था की मित्रता सहपाठी की मित्रता से अधिक दृढ़ शांत और गंभीर होती है। सच्चा मित्र वही है जो दृढ़-चित्त और सत्य-संकल्प का हो। अपने से अधिक आत्म-बल वाले व्यक्ति से मित्रता करना उचित है। क्योंकि वह महान कार्यों में हमारा मनोबल बढ़ाता है। सम्मानित, शुद्ध ह्दयी, कोमल, मेहनती, शिष्ट और सत्यनिष्ठ व्यक्ति पर हम पूरा विश्वास कर मित्रता कर सकते हैं। उससे धोखे की उम्मीद नहीं रहती। ऐसे जान-पहचान वालों से दूर रहना चाहिए जो न कोई बुद्धिमानी या हँसी-मजाक की बात कर सकते हैं और न दुःख के क्षण में सहानुभूति दिखला सकते हैं। मनुष्य को बुरी संगति करने से बचना चाहिए। नीति और सवृत्ति दोनों का नाश होने में देर नहीं लगती और व्यक्ति दिनोंदिन अवनति के गड्ढे में गिरता जाता है। उसका आध्यात्मिक विकास रूक जाता है। बुरे लोगों की संगति थोड़े समय में अपना प्रभाव डाल देती है और हमारे जीवन की पवित्रता नष्ट कर देती है। अतः अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातें करने वालों से दूर रहना चाहिए। लेखक इस गद्यांश में सच्ची मित्रता की परिभाषित करता है कि
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये बाल्यावस्था में हम शीघ्र ही सबकी बातों पर विश्वास कर लेते हैं और मित्र बना लेते हैं। हमारा मन अनेक कल्पनाओं से भरा रहता है। युवावस्था की मित्रता सहपाठी की मित्रता से अधिक दृढ़ शांत और गंभीर होती है। सच्चा मित्र वही है जो दृढ़-चित्त और सत्य-संकल्प का हो। अपने से अधिक आत्म-बल वाले व्यक्ति से मित्रता करना उचित है। क्योंकि वह महान कार्यों में हमारा मनोबल बढ़ाता है। सम्मानित, शुद्ध ह्दयी, कोमल, मेहनती, शिष्ट और सत्यनिष्ठ व्यक्ति पर हम पूरा विश्वास कर मित्रता कर सकते हैं। उससे धोखे की उम्मीद नहीं रहती। ऐसे जान-पहचान वालों से दूर रहना चाहिए जो न कोई बुद्धिमानी या हँसी-मजाक की बात कर सकते हैं और न दुःख के क्षण में सहानुभूति दिखला सकते हैं। मनुष्य को बुरी संगति करने से बचना चाहिए। नीति और सवृत्ति दोनों का नाश होने में देर नहीं लगती और व्यक्ति दिनोंदिन अवनति के गड्ढे में गिरता जाता है। उसका आध्यात्मिक विकास रूक जाता है। बुरे लोगों की संगति थोड़े समय में अपना प्रभाव डाल देती है और हमारे जीवन की पवित्रता नष्ट कर देती है। अतः अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातें करने वालों से दूर रहना चाहिए। बाल्यावस्था में बालक का मन
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये बाल्यावस्था में हम शीघ्र ही सबकी बातों पर विश्वास कर लेते हैं और मित्र बना लेते हैं। हमारा मन अनेक कल्पनाओं से भरा रहता है। युवावस्था की मित्रता सहपाठी की मित्रता से अधिक दृढ़ शांत और गंभीर होती है। सच्चा मित्र वही है जो दृढ़-चित्त और सत्य-संकल्प का हो। अपने से अधिक आत्म-बल वाले व्यक्ति से मित्रता करना उचित है। क्योंकि वह महान कार्यों में हमारा मनोबल बढ़ाता है। सम्मानित, शुद्ध ह्दयी, कोमल, मेहनती, शिष्ट और सत्यनिष्ठ व्यक्ति पर हम पूरा विश्वास कर मित्रता कर सकते हैं। उससे धोखे की उम्मीद नहीं रहती। ऐसे जान-पहचान वालों से दूर रहना चाहिए जो न कोई बुद्धिमानी या हँसी-मजाक की बात कर सकते हैं और न दुःख के क्षण में सहानुभूति दिखला सकते हैं। मनुष्य को बुरी संगति करने से बचना चाहिए। नीति और सवृत्ति दोनों का नाश होने में देर नहीं लगती और व्यक्ति दिनोंदिन अवनति के गड्ढे में गिरता जाता है। उसका आध्यात्मिक विकास रूक जाता है। बुरे लोगों की संगति थोड़े समय में अपना प्रभाव डाल देती है और हमारे जीवन की पवित्रता नष्ट कर देती है। अतः अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातें करने वालों से दूर रहना चाहिए। मित्रता अधिक गम्भीर तथा स्थायी होती है।
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये बाल्यावस्था में हम शीघ्र ही सबकी बातों पर विश्वास कर लेते हैं और मित्र बना लेते हैं। हमारा मन अनेक कल्पनाओं से भरा रहता है। युवावस्था की मित्रता सहपाठी की मित्रता से अधिक दृढ़ शांत और गंभीर होती है। सच्चा मित्र वही है जो दृढ़-चित्त और सत्य-संकल्प का हो। अपने से अधिक आत्म-बल वाले व्यक्ति से मित्रता करना उचित है। क्योंकि वह महान कार्यों में हमारा मनोबल बढ़ाता है। सम्मानित, शुद्ध ह्दयी, कोमल, मेहनती, शिष्ट और सत्यनिष्ठ व्यक्ति पर हम पूरा विश्वास कर मित्रता कर सकते हैं। उससे धोखे की उम्मीद नहीं रहती। ऐसे जान-पहचान वालों से दूर रहना चाहिए जो न कोई बुद्धिमानी या हँसी-मजाक की बात कर सकते हैं और न दुःख के क्षण में सहानुभूति दिखला सकते हैं। मनुष्य को बुरी संगति करने से बचना चाहिए। नीति और सवृत्ति दोनों का नाश होने में देर नहीं लगती और व्यक्ति दिनोंदिन अवनति के गड्ढे में गिरता जाता है। उसका आध्यात्मिक विकास रूक जाता है। बुरे लोगों की संगति थोड़े समय में अपना प्रभाव डाल देती है और हमारे जीवन की पवित्रता नष्ट कर देती है। अतः अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातें करने वालों से दूर रहना चाहिए। सच्चा मित्र जीवन में किस प्रकार सहायक है?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये बाल्यावस्था में हम शीघ्र ही सबकी बातों पर विश्वास कर लेते हैं और मित्र बना लेते हैं। हमारा मन अनेक कल्पनाओं से भरा रहता है। युवावस्था की मित्रता सहपाठी की मित्रता से अधिक दृढ़ शांत और गंभीर होती है। सच्चा मित्र वही है जो दृढ़-चित्त और सत्य-संकल्प का हो। अपने से अधिक आत्म-बल वाले व्यक्ति से मित्रता करना उचित है। क्योंकि वह महान कार्यों में हमारा मनोबल बढ़ाता है। सम्मानित, शुद्ध ह्दयी, कोमल, मेहनती, शिष्ट और सत्यनिष्ठ व्यक्ति पर हम पूरा विश्वास कर मित्रता कर सकते हैं। उससे धोखे की उम्मीद नहीं रहती। ऐसे जान-पहचान वालों से दूर रहना चाहिए जो न कोई बुद्धिमानी या हँसी-मजाक की बात कर सकते हैं और न दुःख के क्षण में सहानुभूति दिखला सकते हैं। मनुष्य को बुरी संगति करने से बचना चाहिए। नीति और सवृत्ति दोनों का नाश होने में देर नहीं लगती और व्यक्ति दिनोंदिन अवनति के गड्ढे में गिरता जाता है। उसका आध्यात्मिक विकास रूक जाता है। बुरे लोगों की संगति थोड़े समय में अपना प्रभाव डाल देती है और हमारे जीवन की पवित्रता नष्ट कर देती है। अतः अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातें करने वालों से दूर रहना चाहिए। प्रस्तुत गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक बताइये।
हेवल घाटी के गाँववासियों ने चीड़ के पेड़ों के हो रहे विनाश के विरुद्ध जुलूस निकाले। घास-चारा लेने जा रही महिलाओं ने इन पेड़ों से लीसा टपकाने के लिए लगाए गए लोहे निकाल दिए व उनके स्थान पर मिट्टी की मरहम-पट्टी कर दी। महिलाओं ने पेड़ों का रक्षा-बंधन भी किया। आरंभ से ही लगा कि वृक्ष बचाने में महिलाएं आगे आएँगी। वन कटने का सबसे अधिक कष्ट उन्हीं को उठाना पड़ता है, क्योंकि घास-चारा लाने के लिए उन्हें और दूर जाना पड़ता है। कठिन स्थानों से घास-चारा एकत्र करने में कई बार उन्हें बहुत चोट लग जाती है। वैसे भी पहाड़ी रास्तों पर घास-चारा का बोझ लेकर पाँच-दस किमी या उससे भी ज्यादा चलना बहत कठिनावही जाता है। इस आंदोलन की बात ऊँचे अधिकारियों तक पहुंची तो । उन्हें लीसा प्राप्त करने के तौर-तरीकों की जाँच करवानी पड़ी। जाँच से स्पष्ट हो गया कि बहुत अधिक लीसा निकलने के लालच में चीड़ के पेड़ों को बहुत नुकसान हुआ है। इन अनुचित तरीकों पर रोक लगी। चीड़ के घायल पेड़ों को आराम मिला एक नया जीवन मिला। पर तभी खबर मिली कि इस इलाके के बहुत से पेड़ों को.कटाई के लिए नीलाम किया जा रहा है। लोगों ने पहले तो अधि' व कारियों को ज्ञापन दिया कि जहाँ पहले से ही घास-चारे का संकट है, वहाँ और व्यापारिक कटान न किया जाए। जब अधिकारियों ने दु गाँववासियों की मांग पर ध्यान न देते हुए नरेन्द्रनगर में नीलामी की ग घोषणा कर दी, तो गाँववासी जुलूस बनाकर वहाँ नीलामी का विरोध करते हुए पहुँच गए। वहां एकत्र ठेकेदारों से/ हवेल घाटी की . महिलाओं ने कहा, ''आप इन पेड़ों को काटकर हमारी रोजी-रोटी मत छीनो। पेड़ कटने से यहां बाढ़ व भू-स्खलन का खतरा भी बढ़ जाएगा।" कुछ ठेकेदारों ने तो वास्तव में वह बात मानी पर कुछ अन्य ठेकेदारों ने अद्वानी और सलेत के जंगल. खरीद लिए। महिलाओं ने पेड़ों का रक्षा-बंधन क्यों किया?
निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हेवल घाटी के गाँववासियों ने चीड़ के पेड़ों के हो रहे विनाश के विरुद्ध जुलूस निकाले। घास-चारा लेने जा रही महिलाओं ने इन पेड़ों से लीसा टपकाने के लिए लगाए गए लोहे निकाल दिए व उनके स्थान पर मिट्टी की मरहम-पट्टी कर दी। महिलाओं ने पेड़ों का रक्षा-बंधन भी किया। आरंभ से ही लगा कि वृक्ष बचाने में महिलाएँ आगे आएँगी। वन कटने का सबसे अधिक कष्ट उन्हीं को उठाना पड़ता है, क्योंकि घास-चारा लाने के लिए उन्हें और दूर जाना पड़ता है। कठिन स्थानों से घास-चारा एकत्र करने में कई बार उन्हें बहुत चोट लग जाती है। वैसे भी पहाड़ी रास्तों पर घास-चारा का बोझ लेकर पाँच-दस किमी या उससे भी ज्यादा चलना बहुत कठिन हो जाता है। इस आंदोलन की बात ऊँचे अधिकारियों तक पहुँची तो उन्हें लीसा प्राप्त करने के तौर-तरीकों की जाँच करवानी पड़ी। जाँच से स्पष्ट हो गया कि बहुत अधिक लीसा निकलने के लालच में चीड़ के पेड़ों को बहुत नुकसान हुआ है। इन अनुचित तरीकों पर रोक लगी। चीड़ के घायल पेड़ों को आराम मिला, एक नया जीवन मिला। पर तभी खबर मिली कि इस इलाके के बहुत से पेड़ों को कटाई के लिए नीलाम किया जा रहा है। लोगों ने पहले तो अधि कारियों को ज्ञापन दिया कि जहाँ पहले से ही घास-चारे का संकट है, वहाँ और व्यापारिक कटान न किया जाए। जब अधिकारियों ने गाँववासियों की माँग पर ध्यान न देते हुए नरेन्द्रनगर में नीलामी की घोषणा कर दी, तो गाँववासी जुलूस बनाकर वहाँ नीलामी का विरोध करते हुए पहुंच गए। वहां एकत्र ठेकेदारों से हेवल घाटी की महिलाओं ने कहा, "आप इन पेड़ों को काटकर हमारी रोजी-रोटी मत छीनो। पेड़ कटने से यहां बाढ़ व भू-स्खलन का खतरा भी बढ़ जाएगा।" कुछ ठेकेदारों ने तो वास्तव में वह बात मानी पर कुछ अन्य ठेकेदारों ने अद्वानी और सलेत के जंगल खरीद लिए। हेवल घाटी में किन पेड़ों के होने वाले विनाश के विरुद्ध जुलूस निकाले गए ?
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