ये बातें याद रखना दुनिया आपकी फैन हो जाएगी || best motivational video by Mahendra Dognay #shorts
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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो, उससे कही महत्त्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनों को जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी की कहे को सुनने के लिए उसे महसूस करने के लिए. पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा- 'पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानो के बिलकुल पास खड़े हों, और तब उनका स्पर्श दूसरों को आगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे ...... सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। लेखिका के अनुसार अपनी बात कहने के संदर्भ में सबसे महत्त्वपूर्ण क्या है?
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो, उससे कही महत्त्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनों को जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी की कहे को सुनने के लिए उसे महसूस करने के लिए. पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा- 'पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानो के बिलकुल पास खड़े हों, और तब उनका स्पर्श दूसरों को आगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे ...... सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। 'इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है।' वाक्य में आए 'भी', 'तो' शब्द हैं
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो उससे कहीं महत्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनी ही जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी के कहे को सुनने के लिए, उसे महसूस करने के लिए, पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है। और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा-पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे-छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानों के बिल्कुल पास खड़े होते थे, और तब उनका स्पर्श दूसरों को अगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी। और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे.. सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। 'इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है।' वाक्य में आए 'भी', 'तो' शब्द है
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो उससे कहीं महत्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनी ही जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी के कहे को सुनने के लिए, उसे महसूस करने के लिए, पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है। और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा-पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे-छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानों के बिल्कुल पास खड़े होते थे, और तब उनका स्पर्श दूसरों को अगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी। और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे.. सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। संवाद तभी सार्थक होता है जब
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो उससे कहीं महत्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनी ही जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी के कहे को सुनने के लिए, उसे महसूस करने के लिए, पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है। और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा-पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे-छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानों के बिल्कुल पास खड़े होते थे, और तब उनका स्पर्श दूसरों को अगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी। और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे.. सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। लेखिका के अनुसार अपनी बात कहने के सदंर्भ में सबसे महत्वपूर्ण क्या है?
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो, उससे कही महत्त्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनों को जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी की कहे को सुनने के लिए उसे महसूस करने के लिए. पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा- 'पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानो के बिलकुल पास खड़े हों, और तब उनका स्पर्श दूसरों को आगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे ...... सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। 'महत्त्वपूर्ण' शब्द है
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो, उससे कही महत्त्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनों को जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी की कहे को सुनने के लिए उसे महसूस करने के लिए. पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा- 'पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानो के बिलकुल पास खड़े हों, और तब उनका स्पर्श दूसरों को आगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे ...... सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। लेखिका के अनुसार
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो, उससे कही महत्त्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनों को जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी की कहे को सुनने के लिए उसे महसूस करने के लिए. पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा- 'पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानो के बिलकुल पास खड़े हों, और तब उनका स्पर्श दूसरों को आगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे ...... सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। संवाद तभी सार्थक होता है जब
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो, उससे कही महत्त्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनों को जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी की कहे को सुनने के लिए उसे महसूस करने के लिए. पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा- 'पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानो के बिलकुल पास खड़े हों, और तब उनका स्पर्श दूसरों को आगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे ...... सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। "खामोशी ही बोलने लगती है।' से अभिप्राय है
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो, उससे कही महत्त्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनों को जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी की कहे को सुनने के लिए उसे महसूस करने के लिए. पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा- 'पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानो के बिलकुल पास खड़े हों, और तब उनका स्पर्श दूसरों को आगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे ...... सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द स्त्रीलिंग है?
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