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जीवन में ये 4 चीजें कभी मत करना || best inspirational video in hindi by Mahendra Dogney #shorts

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10th में आ गए हो तो ये गलतीयाँ मत करना

अधिकतर लोगों को यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए. नहीं तो आज वे काफी आगे होते! और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इंतजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इंतज़ार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए, और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायण मूर्ति ने महज दस हज़ार रुपये में अपने छह दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की, और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी है। करौली टैक्स, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाज़ी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलांपिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विंची, रवींद्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिल्ली-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये लोग अगर इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इंतजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते. जहाँ वे मौजूद हैं?. अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुँचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इंतज़ार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इंतज़ार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसीलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इंतजार करेंगे, तो करते रह जाएँगे। 'समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता' - यहाँ एकदम' का अर्थ है

अधिकतर लोगों को यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए. नहीं तो आज वे काफी आगे होते! और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इंतजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इंतज़ार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए, और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायण मूर्ति ने महज दस हज़ार रुपये में अपने छह दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की, और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी है। करौली टैक्स, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाज़ी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलांपिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विंची, रवींद्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिल्ली-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये लोग अगर इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इंतजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते. जहाँ वे मौजूद हैं?. अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुँचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इंतज़ार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इंतज़ार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसीलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इंतजार करेंगे, तो करते रह जाएँगे। 'डिस्लेक्सिया' शब्द है

अधिकतर लोगों को यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए. नहीं तो आज वे काफी आगे होते! और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इंतजार में खुद को रोके हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है- इंतज़ार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता। जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उन्हीं से शुरुआत कीजिए, और आगे सब बेहतर होता जाएगा। जिनके इरादे दृढ़ होते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं। नारायण मूर्ति ने महज दस हज़ार रुपये में अपने छह दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की, और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी है। करौली टैक्स, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाज़ी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया। फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलांपिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लिओनार्दो द विंची, रवींद्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल, वॉल्ट डिल्ली-ये सब अपनी शुरुआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये लोग अगर इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इंतजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते. जहाँ वे मौजूद हैं?. अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुँचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए। किसी इंतज़ार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे में इंतज़ार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसीलिए हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा। इंतजार करेंगे, तो करते रह जाएँगे। ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है'-रेखांकित अंश का संकेत है

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