"शायद आज रोशनी गुल हो जाए और सिनेमा न हो।" वाक्य में अर्थ की दृष्टि से वाक्य भेद होगा-
चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बेचैनी की बाँहों में कल फल खिलेंगे घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी कल चंदा की किरण और चटकीली होगी खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी। काव्यांश में 'चमकीली सुबह का आशय है।