TB MB GB गए सब आ गया अब PB | क्या हैं PB |#ARVINDARORA #SHORTVIDEO
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In the given figure, CD and AB are diametres of circle and AB and CD are perpendicular to each other, LQ and SR are perpendiculars to AB and CD respectivley. Radius of circle is 5 cm, PB: PA=2:3 and CN: ND= 2:3. Whatis the length(in cm) of SM? दी गई आकृति में,CD तथा AB वृत्त के व्यास हैं तथा AB तथा CD एके दूसरे पर लम्ब है। LQ तथा SR क्रमशः AB तथा CD पर लम्ब है। वृत्त की त्रिज्या 5 से.मी. है, PB: PA= 2:39 तथा CN: ND=2:3 है। SM की लम्बाई (से.मी. मे) क्या है?
Two tangents PA and PB are drawn to a circle with centre O from an external point P. If angle OAB= 30^@ , then angle APB is: केंद्र O वाले वृत्त पर एक बाहरी बिंदु P से दो स्पर्श रेखाएँ PA तथा PB खींची जाती हैं | यदि angle OAB= 30^@ है, तो angle APB का मान क्या होगा ?
शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, मृगतृष्णा का है। बाजार की मृगतृष्णा शिक्षार्थी को - लोभ-लालच देकर अपनी तरफ दौड़ाते रहने को विवश करने को उतारू खड़ी है। बाजार के इनललचाने वाले रास्तों पर आकर्षण है, चकाचौंध है और सम्मोहित कर देने वाले सपने हैं। दूसरी तरफ शिक्षा का साधना मार्ग है जो शांति दे सकता है, संतोष दे सकता है और हमारे आत्मतत्त्व को प्रबल करता हुआ विमल विवेक दे सकता है। निश्चित ही वह मार्ग श्रेयस्कर है, मगर अपनी ओर आकर्षित करने वाले बाजार का मार्ग प्रेयस्कर है। इस दोराहे पर खड़ा शिक्षार्थी बाजार को चुन लेता है। लाखों-करोड़ों लोग आज इसी रास्ते के लालच में आ गए हैं और शिक्षा के भंवरजाल में फंस गए हैं। बाजार की खूबी यही है कि वह-फंसने का अहसास किसी को नहीं होने देता और मनुष्य लगातार फंसता चला जाता है। किसी को यह महसूस नहीं होता कि वह दलदल में हैं बल्कि महसूस यह होता है कि बाजार द्वारा दिए गए पैकेज के कारण वह सुखी है। अब यह अलग बात है कि सच्चा सुख क्या है? और सुख का भ्रम क्या है? जरूरत विचार करने की है। सवाल यह है कि बाजार विचार करने का भी अवकाश देता है या कि नहीं। ''दूसरी तरफ शिक्षा का साधना मार्ग है"- तो पहली तरफ क्या है?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, दूसरा मृगतृष्णा का है। बाजार की मृगतृष्णा शिक्षार्थी को लोभ-लालच देकर अपनी तरफ दौड़ाते रहने को विवश करने को उतारू खड़ी है। बाजार के इन ललचाने वाले रास्तों पर आकर्षण है, चकाचौंध है और सम्मोहित कर देने वाले सपने हैं। दूसरी तरफ शिक्षा तो साधना मार्ग है जो शांति दे सकता है, संतोष दे सकता है और हमारे आत्मतत्त्व को प्रबल करता हुआ विमल विवेक दे सकता है। निश्चित ही वह मार्ग श्रेयस्कर है, मगर अपनी ओर आकर्षित करने वाले बाजार का मार्ग प्रेयस्कर है। इस दोराहे पर खड़ा शिक्षार्थी बाजार को चुन लेता है। लाखों-करोड़ों लोग आज इसी रास्ते के लालच में आ गए हैं और शिक्षा के भँवरजाल में फंस गए हैं। बाजार की खूबी यही है कि वह फंसने का अहसास किसी को नहीं होने देता और मनुष्य लगातार फंसता चला जाता है। किसी को यह महसूस नहीं होता कि वह दलदल में हैं बल्कि महसूस यह होता है कि बाजार द्वारा दिए गए पैकेज के कारण वह सुखी है। अब यह अलग बात है कि सच्चा सुख क्या है? और सुख का भ्रम क्या है? जरूरत विचार करने की है। सवाल यह है कि बाजार विचार करने का भी अवकाश देता है या कि नहीं। ''दूसरी तरफ शिक्षा का साधना मार्ग है'' - तो पहली तरफ क्या है?