रामायण की ये बात आप सायद ही जानते होंगे
रामायण की ये बात आप सायद ही जानते होंगे
Similar Questions
Explore conceptually related problems
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब मैं उनसे कहता था- 'साहित्य की हर विधा को हर तरह की लेखनी को मैं बतौर चुनौती स्वीकार करता हूँ। आम आदमी से लेकर खास आदमी तक के हृदय को छूना कोई मामूली बात नहीं होती। यह तो आप भी स्वीकार करेंगे, क्योंकि यह काम सिर्फ रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ ही कर पाते हैं।' मेरी यह दलील रामबाण सिद्ध होती थी, वे सारे मित्र सोच में पड़ जाते थे, क्योंकि वे केवल किसी भी एक वर्ग के लिख पाते थे- 'मास' के लिए 'क्लास' के लिए। उनके दायरे सौमित थे। लेकिन मैं दायरों के बाहर का शख्स हूँ। शायद इसी कारण मैं आपसे खुलकर अंतरंग बातें भी कर सकता हूँ। बात कहानी की रचना-प्रक्रिया से आरंभ की थी। तब मैं 'ओ.हेनरी' की एक कहानी पढ़ता था और भीतर दो नई कहानियों के बीज अपने आप पड़ जाते थे। न कोई मशक्कत, न कोई गहरी सोच। यह प्रोसेस मेरे लिए उतना ही आसान था जितना कि कैरम का खेल। फिर भी ये रचनाएँ कहानी के शिल्प में कहानी विधा के अंतर्गत लिखी गई पुख्ता किस्सागोई हैं। पर यह किस्सागोई जिंदगी से अलग नहीं हो सकती। लेखक के लेखन की क्या खास बात है?
हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब मैं उनसे कहता था-'साहित्य की हर विधा को, हर तरह की लेखनी को मैं बतौर चुनौती स्वीकार करता हूँ। आम आदमी से लेकर खास आदमी तक के हृदय को छूना कोई मामूली बात नहीं होती। यह तो आप भी स्वीकार करेंगे, क्योंकि यह काम सिर्फ रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थ ही कर पाते है। मेरी यह दलील रामबाण सिद्ध होती थी, वे सारे मित्र सोच में पड़ जाते थे, क्योंकि वे केवल किसी भी एक वर्ग के लिए लिख पाते थे- 'मास' के लिए या 'क्लास' के लिए। उनके दायरे सीमित थे लेकिन मैं दायरों के बाहर का शख्स हूँ। शायद इसी कारण मैं आपसे खुलकर अन्तरंग बातें भी कर सकता हूँ। बात कहानी की रचना-प्रक्रिया से आरम्भ की थी। तब मैं 'ओ. हेनरी' की एक कहानी पढ़ता था और भीतर दो नई कहानियों के बीज अपने आप पड़ जाते थे। न कोई मशक्कत, न कोई गहरी सोचा यह प्रोसेस मेरे लिए उतना ही आसान था जितना कि कैरम का खेल। फिर भी ये रचनाएँ कहानी के शिल्प में कहानी विधा के अन्तर्गत लिखी गई पुख्ता किस्सागोई हैं। पर यह किस्सागोई जिन्दगी से अलग नहीं हो सकती। लेखक के लेखन की क्या खास बात है?
दूर्वा - बूढ़ी अम्माँ की बात | कहानी | बूढ़ी अम्माँ की बात भाग -1
दूर्वा - बूढ़ी अम्माँ की बात | कहानी | बूढ़ी अम्माँ की बात भाग -2
मानसी आठवीं कक्षा में हिंदी भाषा पढ़ाती हैं। कविता के भाव के बारे में बातचीत करते समय आप उन्हें किस बात के प्रति सचेत रहने की सलाह देंगे?