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गलती से भी मत सोना, नहीं तो मौत पक्की|Fa...

गलती से भी मत सोना, नहीं तो मौत पक्की|Fact2Fact| #Shorts

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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। लेखक का मानना है कि यह एक गम्भीर गलती है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। उपरोक्त गद्यांश का भावार्थ है कि कुछ साधारण से नियमों का पालन करने से

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य सही है?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। लेखक कहना चाहता है कि

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। उपरोक्त गद्यांश का शीर्षक होगा

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 9 मैं तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो! हैं फूल रोकते, काँटे मुझे चलाते मरुस्थल, पहाड़ चलने की चाह बढ़ाते सच कहता हूँ मुश्किलें न जब होती हैं फूलों से मग आसान नहीं होता है रुकने से पग गतिवान नहीं होता है अवरोध नहीं, तो सम्भव नहीं प्रगति भी मेरे पग तब चलने में भी शरमाते मेरे संग चलने लगें हवाएँ जिससे तुम पथ के कण-कण को तूफान करो। में तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो। है नाश जहाँ निर्माण वहीं होता है। मैं बसा सकूँ नव स्वर्ग धरा पर जिससे तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो। यदि मार्ग में बाधाएँ नहीं आती तो

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 9 मैं तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो! हैं फूल रोकते, काँटे मुझे चलाते मरुस्थल, पहाड़ चलने की चाह बढ़ाते सच कहता हूँ मुश्किलें न जब होती हैं फूलों से मग आसान नहीं होता है रुकने से पग गतिवान नहीं होता है अवरोध नहीं, तो सम्भव नहीं प्रगति भी मेरे पग तब चलने में भी शरमाते मेरे संग चलने लगें हवाएँ जिससे तुम पथ के कण-कण को तूफान करो। में तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो। है नाश जहाँ निर्माण वहीं होता है। मैं बसा सकूँ नव स्वर्ग धरा पर जिससे तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो। कवि दुनिया से क्या प्रार्थना कर रहा है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 9 मैं तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो! हैं फूल रोकते, काँटे मुझे चलाते मरुस्थल, पहाड़ चलने की चाह बढ़ाते सच कहता हूँ मुश्किलें न जब होती हैं फूलों से मग आसान नहीं होता है रुकने से पग गतिवान नहीं होता है अवरोध नहीं, तो सम्भव नहीं प्रगति भी मेरे पग तब चलने में भी शरमाते मेरे संग चलने लगें हवाएँ जिससे तुम पथ के कण-कण को तूफान करो। में तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो। है नाश जहाँ निर्माण वहीं होता है। मैं बसा सकूँ नव स्वर्ग धरा पर जिससे तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो। 'अवरोध' शब्द का समानार्थक है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 9 मैं तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो! हैं फूल रोकते, काँटे मुझे चलाते मरुस्थल, पहाड़ चलने की चाह बढ़ाते सच कहता हूँ मुश्किलें न जब होती हैं फूलों से मग आसान नहीं होता है रुकने से पग गतिवान नहीं होता है अवरोध नहीं, तो सम्भव नहीं प्रगति भी मेरे पग तब चलने में भी शरमाते मेरे संग चलने लगें हवाएँ जिससे तुम पथ के कण-कण को तूफान करो। में तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो। है नाश जहाँ निर्माण वहीं होता है। मैं बसा सकूँ नव स्वर्ग धरा पर जिससे तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो। कवि को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 9 मैं तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो! हैं फूल रोकते, काँटे मुझे चलाते मरुस्थल, पहाड़ चलने की चाह बढ़ाते सच कहता हूँ मुश्किलें न जब होती हैं फूलों से मग आसान नहीं होता है रुकने से पग गतिवान नहीं होता है अवरोध नहीं, तो सम्भव नहीं प्रगति भी मेरे पग तब चलने में भी शरमाते मेरे संग चलने लगें हवाएँ जिससे तुम पथ के कण-कण को तूफान करो। में तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो। है नाश जहाँ निर्माण वहीं होता है। मैं बसा सकूँ नव स्वर्ग धरा पर जिससे तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो। कवि धरती पर क्या बसाना चाहता है?