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Haunted village Kuldhara Story || क्यों अचानक वीरान हो गया ये गाँव || Jano India #shorts

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The pie-chart provided below gives the distribution of land (in a village) under various food crops. Study the pie-chart carefully and answer the questions. नीचे दिए गए वृत्तारेखा में विभिन खाद्य फसलों के ( एक गाँव में ) भूमि का वितरण दिखाया गया हैं। वृत्तारेखा का अध्ययन कीजिए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए। If the production of rice is 5 times that of jowar and the production of jowar is 2 times that of bazra, then the ratio between the yield per acre of rice and bazra is यदि चावल का उत्पादन ज्वार का पांच गुना और ज्वार का उत्पादन बाजरे का दो गुना हो, तब चावल और बाजरे के प्रति एकड़ उत्पादन का अनुपात है-

वर्ष 1914 तक देश का औद्योगिक विकास बेहद धीमा रहा और साम्राज्यवादी शोषण अत्यन्त तीव्र हो गया। गाँवों की अर्थव्यवस्था पंगु हो गई। सबसे अधिक बुरा प्रभाव कारीगरों, हरिजनों और छोटे किसानों पर पड़ा। ग्रामीण जन साम्राज्य और उनके भारतीय एजेण्ट जमींदारों के दोहरे शोषण की चक्की में पिस रहे थे। ब्रिटिश काल में सूदखोर महाजनों का एक ऐसा वर्ग पैदा हुआ, जिनसे एक बार कर्ज लेने पर गाँव के किसान जीवन-भर गुलामी का पट्टा पहनने पर मजबूर हो जाते थे। उनके हिसाब के सूद का भुगतान करने में असमर्थ किसान महाजनों को खेत बेचने पर मजबूर होकर अपनी ज़मीन पर ही मज़दूर होता गया। इस प्रकार देश में एक ओर तो बड़े किसानों की संख्या बढ़ी, दूसरी ओर ज़मीन जोतने वाला किसान भूस्वामित्व के अधिकार से वंचित होकर खेतिहर मज़दूर होने लगा! भुखमरी से बचने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण बड़े पैमाने पर रोजी-रोटी की तलाश में शहरों की ओर भागने लगे, परन्तु इन असहाय लोगों का स्वागत करने के लिए वहाँ भी कठिनाइयाँ और समस्याएँ हो थीं। प्रेमचन्द 'गोदान' में होरी और गोबर के माध्यम से इस ऐतिहासिक प्रक्रिया को विस्तार से हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं। यह अकेले होरी की ट्रेजिडी नहीं है, पूरे छोटे किसानों के साथ साम्राज्यवादी-पूँजीवादी व्यवस्था के शोषण-तन्त्र का क्रूर मजाक है, जो दूसरे ढंग से आज भी जारी है। 20वीं शताब्दी के आरम्भ में ग्रामीण गरीबी का प्रेमचन्द जो यथार्थ चित्रण करते हैं, यह यूरोप में किसी व्यक्ति के लिए अकल्पनीय है-- "टूटे-फूटे झोंपड़े, मिट्टी की दीवारें, घरों के सामने कूड़े-करकट के ढेर, कीचड़ में लिपटी भैंसें, दुर्बल गायें, हड्डी निकले किसान, जवानी में ही जिन पर बुढ़ापा आ गया है।" ग्रामीण लोग शहरों की ओर क्यों पलायन कर रहे थे?

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