Home
Class
DN_SHORTS
'जंगल का शेर' बनो, पिंजरे का नहीं...

'जंगल का शेर' बनो, पिंजरे का नहीं

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

निर्देश: कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। जब नहीं था इंसान धरती पर थे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्हीं सबके बीच उतरा इन्सान और घटने लगे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्सान बढ़ने लगा बेतहाशा अब कहाँ जाते जंगल, जंगली जानवर, परिदे प्रकृति किसी के साथ नहीं करती नाइन्साफी सभी के लिए बनाती है जगह सो अब इन्सनों के भीतर उतरने लगे हैं जंगल, जंगली जानवर और परिंदे- 'जंगल' का पर्यायवाची नहीं है-

निर्देश: कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। जब नहीं था इंसान धरती पर थे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्हीं सबके बीच उतरा इन्सान और घटने लगे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्सान बढ़ने लगा बेतहाशा अब कहाँ जाते जंगल, जंगली जानवर, परिदे प्रकृति किसी के साथ नहीं करती नाइन्साफी सभी के लिए बनाती है जगह सो अब इन्सनों के भीतर उतरने लगे हैं जंगल, जंगली जानवर और परिंदे- 'अब कहाँ जाते जंगल' का भाव है कि-

जब नहीं था इंसान धरती पर थे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्हीं सबके बीच उतरा इन्सान और घटने लगे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्सान बढ़ने लगा बेतहाशा अब कहाँ जाते जंगल, जंगली जानवर, परिंदे प्रकृति किसी के साथ नहीं करती जाइन्साफी सभी के लिए बनाती है जगह सो अब इन्सनों के भीतर उतरने लगे हैं जंगल, जंगली जानवर और परिंदे 'जंगल' का पर्यायवाची नहीं हैं

कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। जब नहीं था इंसान धरती पर थे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्हीं सबके बीच उतरा इन्सान और घटने लगे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्सान बढ़ने लगा बेतहाशा अब कहाँ जाते जंगल, जंगली जानवर, परिंदे प्रकृति किसी के साथ नहीं करती नाइन्साफी सभी के लिए बनाती है जगह सो अब इन्सनों के भीतर उतरने लगे हैं जंगल, जंगली जानवर और परिंदे प्रकृति किसके प्रति नाइंसाफी नहीं करती?

जब नहीं था इंसान धरती पर थे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्हीं सबके बीच उतरा इन्सान और घटने लगे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्सान बढ़ने लगा बेतहाशा अब कहाँ जाते जंगल, जंगली जानवर, परिंदे प्रकृति किसी के साथ नहीं करती जाइन्साफी सभी के लिए बनाती है जगह सो अब इन्सनों के भीतर उतरने लगे हैं जंगल, जंगली जानवर और परिंदे 'अब कहाँ जाते जंगल' का भाव है कि

जब नहीं था इंसान धरती पर थे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्हीं सबके बीच उतरा इन्सान और घटने लगे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्सान बढ़ने लगा बेतहाशा अब कहाँ जाते जंगल, जंगली जानवर, परिंदे प्रकृति किसी के साथ नहीं करती जाइन्साफी सभी के लिए बनाती है जगह सो अब इन्सनों के भीतर उतरने लगे हैं जंगल, जंगली जानवर और परिंदे 'इन्सान बढ़ने लगा बेतहाशा' का भाव है

कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। जब नहीं था इंसान धरती पर थे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्हीं सबके बीच उतरा इन्सान और घटने लगे जंगल जंगली जानवर, परिंदे इन्सान बढ़ने लगा बेतहाशा अब कहाँ जाते जंगल, जंगली जानवर, परिंदे प्रकृति किसी के साथ नहीं करती नाइन्साफी सभी के लिए बनाती है जगह सो अब इन्सनों के भीतर उतरने लगे हैं जंगल, जंगली जानवर और परिंदे कविता के अंत में क्या व्यंग्य किया गया है?

बाल महाभारत कथा - द्वेष करने वाले का जी नहीं भरता | महाभारत कथा | द्वेष करने वाले का जी नहीं भरता भाग -1

बाल महाभारत कथा - द्वेष करने वाले का जी नहीं भरता | महाभारत कथा | द्वेष करने वाले का जी नहीं भरता भाग -2