In an examination, the success to failure ratio was 5:2. Had the number of failures been 14 more, then the success to failure ratio would have been 9:5. The total number of candidates who appeared for the examination was: एक परीक्षा में, सफलता का असफलता से अनुपात 5:2 था| अगर असफलताओं की संख्या 11 अधिक थी, तो सफलता का असफलता से अनुपात 9:5 होता परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों की कुल संख्या थीः
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो, उससे कही महत्त्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनों को जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी की कहे को सुनने के लिए उसे महसूस करने के लिए. पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा- 'पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानो के बिलकुल पास खड़े हों, और तब उनका स्पर्श दूसरों को आगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे ...... सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। "खामोशी ही बोलने लगती है।' से अभिप्राय है