जलियांवाला बाग हत्याकांड की दर्दनाक घटना
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रॉलैट ऐक्ट (1919)|जलियांवाला बाग|खिलाफत आंदोलन|कांग्रेस का प्रारम्भिक रूख|आंदोलन के विस्तार की आवश्यकता|OMR
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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। 'आम की हरियल डाली' किसकी प्रतीक है?
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। बिछड़े पत्ते की चाह क्या थी?
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। 'मैं' किसका प्रतीक है?
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। 'हरियल' शब्द का अर्थ है
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। 'रह गया परिवार पीछे' में परिवार किसे कहा गया है?
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 13 आम की थी डॉल हरियल में मगनमन झूमता था कई पल्लव और भी थे, उन्हें जी भर घूमता था। देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला। हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाया टूटा। जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैने कहा। जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पे झूमूँ पवन की करुणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया। 'यौवन' शब्द का विलोम लिखिए
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