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चंद्रगुप्त विक्रमादित्य की राजधानी उज्जय...

चंद्रगुप्त विक्रमादित्य की राजधानी उज्जयिनी कैसी थी | History Of Ujjain | #Shorts

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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 8 अन्धकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन भरा दूर तक उनमें दारुण दैन्य दुःख का नीरव रोदन। वह स्वाधीन किसान रहा अभिमान भरा आँखों में इस का छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश बह खिसका। लहराते वे खेत दृगों में हुआ बेदखत वह अब जिन से हँसती थी उसके जीवन की हरियाली जिनके तृन-तृन से। आँखों ही में घूमा करता वह उसकी आँखों का तारा कारकुनों की लाठी से जो गया जवानी ही में मारा। बिना दवादर्पन के घरनी स्वरग चली आँखें आती भर देख-रेख के बिना दुधमुँही बिटिया दो दिन बाद गई मर। कवि का मन जिन आँखों से डरता है वे कैसी है?

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