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ईशान किशन ने दोहरा शतक जड़ कर रचा इतिहास...

ईशान किशन ने दोहरा शतक जड़ कर रचा इतिहास #cricket #shorts

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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 12 एक दिन तने ने भी कहा था, जड़? जड़ तो जड़ ही है, जीवन से सदा डरी रही है और यही है उसका सारा इतिहास कि जमीन में मुँह गड़ाए पड़ी रही हैं लेकिन मैं जमीन से ऊपर उठा बाहर निकला, बढ़ा हूँ. मजबूत बना हूँ, इसी से तो तना हूँ एक दिन डालों ने भी कहा था, तना? किस बात पर है तना? जहाँ बिठाल दिया था वहीं पर है बना प्रगतिशील जगती में तिल भर नहीं डोला है खाया है, मोटाया है, सहलाया चोला है लेकिन हम तने से फूटी, दिशा-दिशा में गई ऊपर उठीं, नीचे आई, हर हवा के लिए दोल बनी, लहराईं इसी से तो डाल कहलाई। तने ने जड़ का क्या इतिहास बताया ?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये गद्यांश बाल श्रम ने भारतमाता के दैदीप्यमान मस्तक को मलिनतापूर्ण बना दिया है। उद्योगों और विभिन्न कल-कारखानों में होड़तोड़ परिश्रम करते बच्चों को देख मानवता रो पड़ती है। भट्टियों पर काम करते हुए मालिकों के लिए अपने शरीर का होम करने वाले मासूम आँख, नाक एवं फेफड़ों की गम्भीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इनकी नियति ही ऐसी है कि मनुष्य जीवन के चक्र का अहम भाग जवानी इनके लिए नहीं बना है। ये तो सीधे ही वृद्धावस्था को प्राप्त करते हैं। कथित मालिकों की झिड़कियों और गाहे-बगाहे मार झेलते इन बालक-बालिकाओं का जीवन देखकर प्रतीत होता है कि सृष्टा ने अत्यधिक क्रूरता से इनका भाग्य रचा है। नियोक्ताओं के लिए बाल श्रम का उपयोग निरापद है। इसके माध्यम से वे अनुचित लाभ उठाकर अपना पथ कंटकविहीन कर लेते हैं।बाल श्रम रूपी असुर के बन्धन में जकड़ी बालिकाओं और किशोरियों की स्थिति और भी भयानक है। माता-पिता की दारिद्रय-मुक्ति हेतु भागीरथी प्रयास करती बालिकाएँ स्वयं एक सर्वभोग्या जलधारा के रूप में प्रवाहमान हैं। जिन्हें जब चाहे ठेकेदार और नियोक्ता पी डालते हैं और अभिभावक विवशतावश यूं तक नहीं कर पाते। यौनाचार का जो घिनौना चेहरा आज सम्पूर्ण समाज में दिखाई दे रहा है उसके पीछे बाल श्रम की अभिवृद्धि भी प्रमुख रूप से उत्तरदायी है। सिंगापुर, थाइलैण्ड, मलेशिया, इण्डोनेशिया, नेपाल जैसे देशों में पर्यटन के बहाने मौजमस्ती करने आए लोग दस-बारह वर्ष की वय वाली लड़कियों की माँग करते हैं ताकि वे एड्स से बचे रहें। दलालों के लिए यह सौदा फायदे का होता है। वे बाल श्रम में लगी लड़कियों और उनके मजबूर माता-पिता को अपना शिकार बनाते हैं और देह व्यापार के गहरे गर्त में धकेल देते हैं। "सृष्टा ने अत्याधिक क्रूरता से इनके भाग्य को रचा है" यह कथन इस सन्दर्भ में प्रयुक्त हुआ है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये बाल श्रम ने भारतमाता के दैदीप्यमान मस्तक को मलिनतापूर्ण बना दिया है। उद्योगों और विभिन्न कल-कारखानों में होड़तोड़ परिश्रम करते बच्चों को देख मानवता रो पड़ती है। भट्टियों पर काम करते हुए मालिकों के लिए अपने शरीर का होम करने वाले मासूम आँख, नाक एवं फेफड़ों की गम्भीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इनकी नियति ही ऐसी है कि मनुष्य जीवन के चक्र का अहम् भाग जवानी इसके लिए नहीं बना है। ये तो सीधे ही वृद्धावस्था को प्राप्त करते हैं। कधित मालिकों की शिड़कियाँ और गाहे-बगाहे मार झेलते इन बालक-बालिकाओं का जीवन देखकर प्रतीत होता है कि सृष्टा ने अत्यधिक क्रूरता से इनका भाग्य रचा है। नियोक्ताओं के लिए बाल श्रम का उपयोग निरापद है। इसके माध्यम से वे अनुचित लाभ उठाकर अपना पथ कंटकविहीन कर लेते हैं।बाल श्रम रूपी असुर के बन्धन में जकड़ी बालिकाओं और किशोरियों की स्थिति और भी भयानक है। माता-पिता की दारिद्रय मुक्ति हेतु भागीरथी प्रयास करती बालिकाएँ स्वयं एक सर्वभोग्या जलधारा के रूप में प्रवाहमान हैं। जिन्हें जब चाहे ठेकेदार और नियोक्ता पी डालते हैं और अभिभावक विवशतावश यूँ तक नहीं कर पाते। यौमाचार का जो घिनौना चेहरा आज सम्पूर्ण समाज में दिखाई दे रहा है उसके पीछे बाल श्रम की अभिवृद्धि भी प्रमुख रूप से उत्तरदायी है। सिंगापुर, थाइलैण्ड, मलेशिया, इण्डोनेशिया,नेपाल जैसे देशों में पर्यटन के बहाने मौजमस्ती करने आए लोग दस-बारह - वर्ष की वय वाली लड़कियों की मांग करते हैं ताकि वे एड्स से बचे रह। दलालों के लिए यह सौदा फायदे का होता है। वे बाल श्रम में लगी लड़कियों और उनके मजबूर माता-पिता को अपना शिकार बनाते __ हैं और देह व्यापार के गहरे गर्त में धकेल देते हैं। सृष्टा ने अत्याधिक क्रूरता से इनके भाग्य को रचा है" यह कथन इस सन्दर्भ में प्रयुक्त हुआ है