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PHYSICS
स्थिर विधुत विभव|समविभव पृष्ठ|विधुत क्षे...

स्थिर विधुत विभव|समविभव पृष्ठ|विधुत क्षेत्र और विभवांतर में संबन्ध|विधुत धारिता|संधारित्र|श्रेणी क्रम संयोजन|विद्युत क्षेत्र का ऊर्जा घनत्व|नुकीले भागों की क्रिया

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प्रश्न|समविभव पृष्ठ|विद्युत क्षेत्र एवं विद्युत विभव में सम्बन्ध|प्रश्न|एक समान विद्युत क्षेत्र में किसी द्विध्रुव पर विद्युत बल एवं बलाघूर्ण|विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव को घूमाने में किया कार्य|OMR|Summary

वैद्युत विभव तथा विभान्तर |वैद्युत द्विध्रुव् के कारण विभव |समविभव पृष्ठ |वैद्युत स्थितिज ऊर्जा |संधारित्र |संधारित्रों का संयोजन |वान-डी ग्राफ जनित्र

समविभव पृष्ठ|स्थिरवैदयुत स्थितिज़ ऊर्जा |बाहय क्षेत्र में द्विध्रुव की स्थितिज़ ऊर्जा

एक समान विधुत क्षेत्र में विधुत द्विध्रुव पर बल आघूर्ण|एकसमान विधुत क्षेत्र में विधुत द्विध्रुव को घुमाने में किया गया कार्य|एकसमान विधुत क्षेत्र में विधुत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा|OMR|Summary

एक समान विधुत क्षेत्र में विधुत द्विध्रुव पर बल आघूर्ण|एकसमान विधुत क्षेत्र में विधुत द्विध्रुव को घुमाने में किया गया कार्य|एकसमान विधुत क्षेत्र में विधुत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा|OMR|Summary

एक समान विधुत क्षेत्र में विधुत द्विध्रुव पर बल आघूर्ण|एकसमान विधुत क्षेत्र में विधुत द्विध्रुव को घुमाने में किया गया कार्य|एकसमान विधुत क्षेत्र में विधुत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा|OMR|Summary

Recap|समविभव पृष्ठ |वैद्युत क्षेत्र में अवेशित कण की गति |वैद्युत स्थितिज़ ऊर्जा |OMR|Summary

वैदयुत द्विध्रुव के कारण विद्युत विभव अक्षीय स्थिति में |वैदयुत द्विध्रुव के कारण विद्युत विभव निरक्षीय स्थिति में |विभव प्रवणता तथा विद्युत क्षेत्र की तीव्रता में सम्बंध |समविभव पृष्ठ

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता जनसंख्या वृद्धि रोकना है। इस क्षेत्र में हमारे सभी प्रयत्न निष्फल रहे हैं। ऐसा क्यों है? यह इसलिए भी हो सकता है कि समस्या को देखने का हर एक का एक अलग नजरिया है। जनसंख्याशास्त्रियों के लिए यह आंकड़ों का अम्बार है। अफसरशाही के लिए यह टार्गेट तय करने की कवायद है। राजनीतिज्ञ इस वोट बैंक की दृष्टि से देखता है। ये सबस अपने-अपने ढंग से समस्या को सुलझाने में लगे हैं। अतः अलग-अलग किसी के हाथ सफलता नहीं लगी। पर यह स्पष्ट है कि परिवार के आकार पर आर्थिक विकास और शिक्षा का बहुत प्रभाव पड़ता है। यहाँ आर्थिक विकास का मतलब पाश्चात्य मतानुसार भौतिकवाद नहीं जहाँ बच्चों को बोझ माना जाता है। हमारे लिए तो यह सम्मानपूर्वक जीने के स्तर से सम्बन्धित है। यह मौजूदा सम्पति के समतामलक विवरण पर ही निर्भर नहीं है वरन् ऐसी शैली अपनाने से सम्बन्धित है जिसमें अस्सी करोड़ लोगों की ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल हो सके। इसी प्रकार स्त्री शिक्षा भी है। यह समाज में एक नए प्रकार का चिन्तन पैदा करेगी जिससे सामाजिक और आर्थिक विकास के नए आयाम खुलेंगे और साथ ही बच्चों के विकास का नया रास्ता भी खुलेगा। अतः जनसंख्या की समस्या सामाजिक है। यह अकेले सरकार नहीं सुलझा सकती। केन्द्रीयकरण से हटकर इसे ग्राम-ग्राम, व्यक्ति-व्यक्ति तक पहुँचना होगा। जब तक यह जन आन्दोलन नहीं बन जाता तब तक सफलता मिलना संदिग्ध है। जनसंख्या समस्या के प्रति हमारे दृष्टिकोण में जिस परिवर्तन की आवश्यकता है वह है