इस Dead Sea में होगी मौत ,जहाँ कोई डूबता नही हैं ? #Deadsea #Shorts
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चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। चीटियों के स्वभाव में नहीं है ।
चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। काव्यांश में 'मगर' का अर्थ है
चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। बिखरी हुई चीटियाँ फिर से एकजुट कैसे होती हैं?
चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। मित्र और शत्रु के चेहरों को चीटियाँ
चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। 'ईर्ष्यालु' किसे कहा जाता है?
कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। न अवरोध कोई, न बाधा कहीं है न संदेह कोई, न व्यवधान कोई बहुत दूर से हैं दिशाएँ बुलाती नहीं पथ-डगर आज अनजान कोई दिशाएँ निमंत्रण मुझे दे रही हैं, दिगंतर खुला सिर्फ मेरे लिए है। नहीं कुछ यहां राह जो रोक पाए न कोई यहाँ जो मुझे टोक पाए अजानी हवा में उड़ा जा रहा हूँ विजय गीत मेरा गगन मस्त गाए हृदय में कहीं कह रहा बात कोई, धरा और गगन सिर्फ तेरे लिए है। कविता में दो समानार्थी शब्द एक ही वाक्य में आए हैं। वह वाक्य कौन-सा है?
निर्देश: कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। न अवरोध कोई, न बाधा कहीं है न संदेह कोई, न व्यवधान को बहुत दूर से हैं दिशाएँ बुलातीं नहीं पथ-डगर आज अनजान कोई दिशाएँ निमंत्रण मुझे दे रही हैं, दिगंतर खुला सिर्फ मेरे लिए है। नहीं कुछ यहां राह जो रोक पाए न कोई यहाँ जो मुझे टोक पाए अजानी हवा में उड़ा जा रहा हूँ विजय गीत मेरा गगन मस्त गाए हृदय में कहीं कह रहा बात कोई, धरा और गगन सिर्फ तेरे लिए है। कविता में दो समानार्थी शब्द एक ही वाक्य में आए हैं। वह वाक्य कौन-सा है ?
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