आखिरी वार |अब हर बच्चा बनेगा TOPPER
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गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। सोनजुही में आज एक पीली कली निकली है। उसे देखकर अनायास ही उस छोटे जीव का स्मरण हो आया, जो इस लता की सधन हरीतिमा में छिपकर बैठता था और फिर मेरे निकट पहुँचते ही कन्धे पर कूदकर मुझे चौका देता था। तब मुझे कली की खोज रहती थी, पर आज उस लघुप्राणी की खोज है। परंतु वह तो अब तक इस सोमजुही की जड़ में मिट्टी होकर मिल गया होगा कौन जाने स्वर्णिम कली के बहाने वही मुझे चौंकाने ऊपर आ गया हो। अचानक एक दिन सबेरे कमरे से बरामदे में आकर मैंने देखा, दो कौए एक गमले के चारों ओर चोंचों से छुवा-छुवौवलजैसा खेल खेल रहे हैं। यह काकभुशुडि भी विचित्र पक्षी है, एक साथ समादरित, अनादरित, अति सम्मानित, अति अवमानित। हमारे बेचारे पुरखे न गरुड़ के रूप में आ सकते हैं, न मयूर के, न हंस के उन्हें पितरपक्ष में हमसे कुछ पाने के लिए काक बनकर ही अवतीर्ण होना पड़ता है। इतना ही नहीं, हमारे दूरस्थ प्रियजनों को भी अपने आने का मधु सन्देश इनके कर्कश स्वर ही में दे देना पड़ता है। दूसरी ओर हम कौआ और कांव-काव करने को अवमानना के अर्थ में ही प्रयुक्त करते हैं। मेरे काकपुराण के विवेचन में अचानक बाधा आ पड़ी क्योंकि गमले और दीवार की सन्धि में छिपे एक छोटे से जीव पर मेरी दृष्टि रुक गयी। निकट जाकर देखा, गिलहरी का छोटा-सा बच्चा है, जो सम्भवतः घोंसले से गिर पड़ा है और अब कौए जिसमें सुलभ आहार खोज रहे हैं गमले और दीवार के बीच में किसका बच्चा छिपा था?
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो, उससे कही महत्त्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनों को जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी की कहे को सुनने के लिए उसे महसूस करने के लिए. पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा- 'पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानो के बिलकुल पास खड़े हों, और तब उनका स्पर्श दूसरों को आगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे ...... सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। 'महत्त्वपूर्ण' शब्द है
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। कुछ कहा जा रहा हो, उससे कही महत्त्वपूर्ण होता है अपनी बात कहने का तरीका। आप कितनों को जरूरी बात क्यों न कहें, अगर आपकी बात कोई सुने नहीं, महसूस ही न करे, तो उसे कहने का फायदा ही क्या? किसी की कहे को सुनने के लिए उसे महसूस करने के लिए. पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है और वही मिलता था मुझे उस महान संगीतज्ञ बीथोवन के स्वरों द्वारा- 'पूरा ध्यान। आप पूछ सकते हैं कि "आवाजाही और बातचीत के शोर से भरे किसी कमरे के दूसरे छोर पर बैठा कोई बच्चा उन आठ कोमल स्वरों को भला कैसे सुनता होगा?" इस सवाल का जवाब तो कोई भी शिक्षक दे सकता है। ये स्वर सुन तो वे बच्चे ही पाते थे जो पियानो के बिलकुल पास खड़े हों, और तब उनका स्पर्श दूसरों को आगाह करता था। पर कुछ ही क्षणों में तेजी से फैलती वह ख़ामोशी ही बोलने लगती थी और जब तक आखिरी स्वर की गूंज खत्म होती, सभी बच्चे शांत हो चुके होते थे। वे खामोशियाँ, वे सन्नाटे याद रहेंगे मुझे ...... सात क्या उसके भी कई-कई सालों बाद भी। लेखिका के अनुसार
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। देखिए, यह सिर्फ सिद्धांत की बात नहीं है, यह तो हमारे अनुभवों और व्यवहार से भी दिखाई दे रही है। आज क्या स्थिति है? शिक्षा में हमने बहुत प्रगति की है। पहले बहुत कम स्कूल थे, अब हर गाँव में और हर मोहल्ले में स्कूल है। बहुत दूरस्थ इलाके में भी स्कूल खुल चुके हैं लेकिन उन स्कूलों में जो शिक्षा मिल रही है वह नाममात्र की शिक्षा मिल रही है। पाँचवी पास हो जाएंगे, छठी, आठवीं में बच्चा पहुँच जाएगा लेकिन उनकी लिखने, पढ़ने और हिसाब करने की योग्यता बहुत कमजोर है। यह क्यों हो रहा है? इसलिए हो रहा है कि इस देश में जितने पैसे वाले लोग हैं उन्होंने अपनी व्यवस्था अलग बना ली है और उनको अब इस बात की परवाह नहीं है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई हो रही है या नहीं। कितने शिक्षक हैं, क्या व्यवस्था है, शिक्षक आता है या नहीं, ये सारी चीजे हैं जिनसे उनको कोई मतलब नहीं है। . 'शिक्षा' में 'इक' प्रत्यय लगने पर शब्द बनेगा