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Revision|कार्बन चक्र |ग्रीन हाउस प्रभाव ...

Revision|कार्बन चक्र |ग्रीन हाउस प्रभाव एवं वैश्विक ऊष्मीकरण |कार्बन डाइऑक्साइड का प्रतिशत बढ़ने के कारण दुष्प्रभाव |ऑक्सीजन चक्र |ओजोन परत एवं उसका क्षय |OMR

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Recap|कार्बन प्रतिरोध एवं कार्बन प्रतिरोधों के लिए वर्णकोण |प्रतिरोध एवं प्रतिरोधकता पर ताप का प्रभाव |OMR|Summary

कार्बन में शृंखलन|कार्बन में अपररूप|कार्बन के रासायनिक गुण|कार्बन के ऑक्साइड|कार्बन मोनोऑक्साइड|कार्बन मोनोऑक्साइड के भौतिक तथा रासायनिक गुण|कार्बन सब ऑक्साइड|सिलिका या सिलिकन डाइऑक्साइड|सिलिका के गुण एवं उपयोग|सिलिकॉन्स|सिलिकेट्स|चतुष्फलीय सिलिकेट की चतुष्कलकीय संरचना|सिलिकेटों के उपयोग|जियोलाइट|OMR

अभ्यास प्रश्न|डिग्री के आधार पर कार्बन एवं हाइड्रोजन परमाणुओं का वर्गीकरण|सजातीय श्रेणी|एल्किल, एल्कीनील एवं एल्काइनिल समूह|OMR|Summary

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये वायु प्रदूषण आज की प्रमुख समस्या है। जंगलों के कटने तथा खनिज ईंधन के जलने से वायु में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा दिनों बढ़ रही है। विश्व पर्यावरण विकास आयोग' के अनुसार औद्योगीकरण के पूर्व वायु के प्रति 10 लाख में 280 कार्बन डाई-ऑक्साइड' थी। यह घनत्व अस्सी के दशक में 340 पहुंच गया तथा इक्कीसवीं शताब्दी के मध्य से अन्त तक यह 560 तक पहुंच जाएगा। वातावरण में छोड़ा जाने वाला धुआं अब सामान्य लकड़ी का धुआं न होकर अब उसमें कार्बन-ऑक्साइड के साथ-ही-साथ नाइट्रसऑक्साइड, धूल जैसे पदार्थों का आधिक्य भी हो रहा है। धातु कणों में सीसा, पारा, निकल, क्रोमियम, तांबा, आदि होते हैं। सीसे के जहर से मानव मस्तिष्क के तन्तु नष्ट हो जाते हैं। निकल, क्रोमियम से श्वास लेने में कष्ट होता है। फोम, रबर, रेफ्रिजरेशन, एयरोसोल कारखानों से वातावरण में घुलती गैस से प्राणवायु के स्रोत 'ओजन परत' के टूटने का खतरा 1986 में विदित हुआ है। अन्तरिक्ष में विभिन्न उपग्रहों को स्थापित करते समय वायुमण्डल की ओजोन प्रभावित होती है। विषभरी गैसें भवनों को भी प्रभावित करती हैं। वृक्ष वातावरण को शुद्ध करते हैं। एक औसत श्रेणी का वृक्ष 50 वर्षों में 50 हजार किलोग्राम ऑक्सीजन देता है। इन्हें काटकर मनुष्य वातावरण के सन्तुलन को बिगाड़ रहे हैं और वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। जंगलों के कटने से क्या हो रहा है।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये वायु प्रदूषण आज की प्रमुख समस्या है। जंगलों के कटने तथा खनिज ईंधन के जलने से वायु में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा दिनों बढ़ रही है। विश्व पर्यावरण विकास आयोग' के अनुसार औद्योगीकरण के पूर्व वायु के प्रति 10 लाख में 280 कार्बन डाई-ऑक्साइड' थी। यह घनत्व अस्सी के दशक में 340 पहुंच गया तथा इक्कीसवीं शताब्दी के मध्य से अन्त तक यह 560 तक पहुंच जाएगा। फोम, रबर, रेफ्रिजरेशन, एयरोसोल कारखानों से वातावरण में घुलती गैस से प्राणवायु के स्रोत 'ओजन परत' के टूटने का खतरा 1986 में विदित हुआ है। अन्तरिक्ष में विभिन्न उपग्रहों को स्थापित करते समय वायुमण्डल की ओजोन प्रभावित होती है। विषभरी गैसें भवनों को भी प्रभावित करती हैं। वृक्ष वातावरण को शुद्ध करते हैं। एक औसत श्रेणी का वृक्ष 50 वर्षों में 50 हजार किलोग्राम ऑक्सीजन देता है। इन्हें काटकर मनुष्य वातावरण के सन्तुलन को बिगाड़ रहे हैं और वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। ओजोन परत टूटने का खतरा कब विदित हुआ