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PHYSICS
ताबड़ तोड़ MOTIVATION थके हारे और निराश वि...

ताबड़ तोड़ MOTIVATION थके हारे और निराश विद्यार्थी जरूर देखें

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बारिश के लिहाज़ से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में जैसे-तैसे धान रोप दिया गया था लेकिन तेज धूप ने उसे झुलसा डाला था। सावन सिर पर था और बादल लापता कि तभी एक उमसती हुई रात में बिजली कड़कने से नींद खुली। थोड़ी देर में झीसियाँ पड़ने लगीं। चारपाइयाँ आँगन से उठाकर भीतर कर ली गई। लेकिन हवा गुम थी और गर्मी ज्यों-की-त्यों लिहाजा वह रात रतजगे में ही गई सुबह हुई तो लोग धान बच जाने को लेकर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते दिखे। बरसात रात वाली रफ्तार से ही जारी थी। न उससे धीमी, न तेज। आसमान समतल और तकरीबन सफेद था। बादल बीच-बीच में ज़रा सा गुर्राकर खामोश हो जा रहे थे। स्कूल का टाइम हुआ तो हम जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मनाने का फैसला किया, जबकि पढ़ाकुओं ने बस्ता लादा और सुपरिचित रास्ते पर बढ़ चले। थके-हारे पढ़वैये शाम को लौटे तो उनकी हालत कटे खेत में पानी भरने पर भागे चूहों जैसी थी। बारिश से बुरी तरह ऊबकर हम सोए. इस उम्मीद । में कि कल नीला आकाश देखने को मिलेगा। "बारिश के लिहाज़ से वह साल ठन-ठन गोपाल था।" वाक्य का भाव है:

बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में न जैसे-जैसे धान रोप दिया गया था लेकिन तेज धूप ने उसे झुलसा ।। डाला था। सावन सिर पर था और बादल लापता कि तभी, एक नि उमसती हुई रात में बिजली कड़कने से नींद खुली। थोड़ी देर में वि झींसियाँ पड़ने लगी। चारपाइयाँ आंगन से उठाकर भीतर कर ली गईं। लेकिन हवा गुम थी और गर्मी ज्यों-की-त्यो लिहाजा वह रातः स्तजगे में ही गई। सुबह हुई तो लोग धान बच-जाने को लेकर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते दिखे। बरसात रात वाली रफ्तार से ही ... उर जारी थी। न उससे धीमी, न तेजा आसमान समतल और तकरीबना र सफेद था। बादल बीच-बीच में जरा-सा गुर्राकर खिामोश हो जा रहे। थे। स्कूल का टाइम' हुआ तो हमे जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मानाने का फैसला किया, जबकि पढ़ाकुओं ने बस्ता लादा और सुपरिचित रास्ते पर बढ़ चले। थके-हारे पढवैये शाम को लौटे तो उनकी हालत कटे खेत में पानी भरने पर भागे चूहों जैसी थी। बा बारिश से बुरी तरह ऊबकर हम सोए, इस उम्मीद में कि कल नीला आकाश देखने को मिलेगा! ''सावन सिर पर था और बादल लापता।" वाक्य है:

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में जैसे-जैसे धान रोप दिया गया था लेकिन तेज धूप ने उसे झुलस डाला था। सावन सिर पर था और बादल लापता। कि तभी एक उमसती हुई रात में बिजली कड़कने से नींद खुली। थोड़ी देर में झींसियाँ पड़ने लगी। चारपाइयाँ आंगन से उठाकर भीतर कर ली गईं। लेकिन हवा गुम थी और गर्मी ज्यों-की-त्यों, लिहाजा वह रात रतजगे में ही गई। सुबह हुई तो लोग जान बच जाने को लेकर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते दिखे। बरसात रात से ही जारी थी, न उससे धीमी, न तेज। आसमान समतल और तकरीबन सफेद था। बादल बीच-बीच में जरा-सा गुर्राकर खामोश हो जा रहे थे। स्कूल का टाइम हुआ तो हम जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मनाने का फैसला किया, जबकि पढ़ाकुओं ने बस्ता लादा और सुपरिचित रास्ते पर बढ़ चले। थके-हारे पढ़वैये शाम को लौटे तो उनकी हालत कटे खेत में पानी भरने पर भागे चूहों जैसी थी। बारिश से बुरी तरह ऊबकर हम सोए, इस उम्मीद में कि कल नीला आकश देखने को मिलेगा। ''सावन सिर पर था और बादल लापता।'' वाक्य है।

बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में न जैसे-जैसे धान रोप दिया गया था लेकिन तेज धूप ने उसे झुलसा ।। डाला था। सावन सिर पर था और बादल लापता कि तभी, एक नि उमसती हुई रात में बिजली कड़कने से नींद खुली। थोड़ी देर में वि झींसियाँ पड़ने लगी। चारपाइयाँ आंगन से उठाकर भीतर कर ली गईं। लेकिन हवा गुम थी और गर्मी ज्यों-की-त्यो लिहाजा वह रातः स्तजगे में ही गई। सुबह हुई तो लोग धान बच-जाने को लेकर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते दिखे। बरसात रात वाली रफ्तार से ही ... उर जारी थी। न उससे धीमी, न तेजा आसमान समतल और तकरीबना र सफेद था। बादल बीच-बीच में जरा-सा गुर्राकर खिामोश हो जा रहे। थे। स्कूल का टाइम' हुआ तो हमे जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मानाने का फैसला किया, जबकि पढ़ाकुओं ने बस्ता लादा और सुपरिचित रास्ते पर बढ़ चले। थके-हारे पढवैये शाम को लौटे तो उनकी हालत कटे खेत में पानी भरने पर भागे चूहों जैसी थी। बा बारिश से बुरी तरह ऊबकर हम सोए, इस उम्मीद में कि कल नीला आकाश देखने को मिलेगा! 'झींसियाँ' शब्द का भाव है: