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घनत्व क्या होता है |ठोस, द्रव तथा गैस के...

घनत्व क्या होता है |ठोस, द्रव तथा गैस के घनत्व की तुलना |अवस्था परिवर्तन से संबंधित कुछ परिभाषाए |अवस्था परिवर्तन |Revision|निष्कर्ष |प्रश्न |सारांश

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Revision|घनत्व क्या होता है |ठोस, द्रव तथा गैस के घनत्व की तुलना |निष्कर्ष |प्रश्न |अवस्था परिवर्तन |अवस्था परिवर्तन से संबंधित कुछ परिभाषाए |सारांश

दोहरान |घनत्व क्या होता है?|ठोस, द्रव तथा गैस के घनत्व की तुलना |निष्कर्ष |वस्तु पानी पर कब तैरती है ?|बर्फ पानी पर क्यों तैरती है?|क्या पदार्थ अपनी अवस्था को बलत सकता है |अवस्था परिवर्तन |अवस्था परिवर्तन से संबंधित कुछ परिभाषाएं |सारांश

दोहरान |घनत्व क्या होता है?|ठोस, द्रव तथा गैस के घनत्व की तुलना |निष्कर्ष |वस्तु पानी पर कब तैरती है ?|बर्फ पानी पर क्यों तैरती है?|क्या पदार्थ अपनी अवस्था को बलत सकता है |अवस्था परिवर्तन |अवस्था परिवर्तन से संबंधित कुछ परिभाषाएं |सारांश

घनत्व क्या होता है?|ठोस, द्रव तथा गैस के घनत्व की तुलना |दोहरान |वस्तु पानी पर कब तैरती है ?|निष्कर्ष |बर्फ पानी पर क्यों तैरती है?|क्या पदार्थ अपनी अवस्था को बलत सकता है |अवस्था परिवर्तन |अवस्था परिवर्तन से संबंधित कुछ परिभाषाएं |सारांश

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पदार्थ|पदार्थ के गुण|पदार्थ की अवस्था|पदार्थ की अवस्था परिवर्तन|वाष्पीकरण तथा वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले कारक

Revision|अवस्था मे परिवर्तन |तापमान परिवर्तन का प्रभाव |निष्कर्ष |गलनांक |संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा |तापमान परिवर्तन का प्रभाव |क्वथनांक |वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा |सारांश

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मानव जीवन में आत्मसम्मान का अत्यधिक महत्व है। आत्मसम्मान में अपने व्यक्तित्व को अधिकाधिक सशक्त एवं प्रतिष्ठित बनाने की भावना निहित होती है। इससे शक्ति, साहस, उत्साह आदि गुणों का जन्म होता है जो जीवन की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। आत्मसमान की भावना से पूर्ण व्यक्ति संघर्षों की परवाह नहीं करता है और हर विषम परिस्थिति से टक्कर लेता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में पराजय का मुंह नहीं देखते तथा निरन्तर यश की प्राप्ति करते हैं। आत्मसम्मानी व्यक्ति धर्म, सत्य, न्याय और नीति के पथ का अनुगमन करता है उसके जीवन में ही सच्चे सुख और शांति का निवास होता है। परोपकार, जनसेवा जैसे कार्यों में उसकी रूचि होती है। लोकप्रियता और सामाजिक प्रतिष्ठा उसे सहज ही प्राप्त होती है। ऐसे व्यक्ति में अपने राष्ट्र के प्रति सच्ची निष्ठा होती है तथा मातृभूमि की उन्नति के लिए वह अपने प्राणों को उत्सर्ग करने में सुख की अनुभूति करता है। चूंकि आत्मसम्मानी व्यक्ति अपने अथवा दूसरों की आत्मा का हनन नहीं करता है, इसीलिए वह ईर्ष्या-द्वेष जैसी भावनाओं से मुक्त होकर मानव मात्र को अपने परिवार का अंग मानता है। उसके हृदय में स्वार्थ, लोभ और अहंकार का भाव नहीं होता। निश्छल हृदय होने के कारण वह आसुरी प्रवृत्तियों से सर्वथा मुक्त होता है। निश्छल ह्दय होने से स्वाभिमानी व्यक्ति को क्या लाभ होता है