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1 नहीं 500 बार सोचोगे इन खतरनाक Bridges ...

1 नहीं 500 बार सोचोगे इन खतरनाक Bridges पर जाने से पहले | The Trending Facts| #Shorts

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गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। समूची स्वार्थी व अहं-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में ऊँचे उद्देश्य नहीं होते, उनमे लोक-संग्रह नहीं होता, भव्य आदर्श नहीं होते। दूसरे, भले ही आप अपने सामने एक ऊँचा आदर्श रखें, तो भी आपके कर्म यदि आपके मन के चाहे या अनचाहे से प्रेरित हैं तो वे ह्रासमान ही होंगे, क्योंकि पसंद-नापसंद से किए जाते कार्य वासनाओं को बढ़ाए बिना नहीं रहते। कोई काम आपको महज इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि वह आपको पसंद है। उसी तरह कोई काम करने से आपको महज इस आधार पर नहीं कतराना चाहिए कि वह काम आपका मनचाहा नहीं है। कार्य का निर्णय बुद्धि-विवेक के आधार पर होना चाहिए, मनचली भावनाओं, तुनकमिजाजी के आधार पर कतई नहीं। इस एक बात को हमेशा याद रखिए कि पसंद और नापसंद आपके सबसे बड़े शत्रु हैं। आप इन्हें पहचानते तक नहीं। उल्टे आप इन्हें पाल-पोसकर दुलारते हैं। वे तो हर क्षण आपकी हानि व ह्रास करने पर ही तुले हैं। इनसे निबटने का व्यावहारिक मार्ग यह है कि अपनी रुचि और अरुचि का विश्लेषण करें। लेखक ने इन शत्रुओं से निबटने का कौन-सा मार्ग सुझाया है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 14 साक्षी है इतिहास हमी पहले जागे है जाग्रत सब हो रहे हमारे ही आगे हैं। शत्रु हमारे कहाँ नहीं भय से भागे हैं? कायरता से कहाँ प्राण हमने त्यागे हैं। हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का भी हृदया फिर एक बार हे विश्व तुम, गाओ भारत की विजय ।। कहाँ प्रकाशित नहीं रहा है तेज हमारा दलित कर चुके शत्रु सदा हम पैरों द्वारा। बताओ तुम कौन नहीं जो हमसे हारा पर शरणागत हुआ कहाँ, कब हमें न प्यारा बस युद्ध मात्र को छोड़कर, कहाँ नहीं हैं हम सदय फिर एक बार हे विश्व! तुम गाओ भारत की विजय 'पहले जागे हैं' का भाव है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 14 साक्षी है इतिहास हमी पहले जागे है जाग्रत सब हो रहे हमारे ही आगे हैं। शत्रु हमारे कहाँ नहीं भय से भागे हैं? कायरता से कहाँ प्राण हमने त्यागे हैं। हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का भी हृदया फिर एक बार हे विश्व तुम, गाओ भारत की विजय ।। कहाँ प्रकाशित नहीं रहा है तेज हमारा दलित कर चुके शत्रु सदा हम पैरों द्वारा। बताओ तुम कौन नहीं जो हमसे हारा पर शरणागत हुआ कहाँ, कब हमें न प्यारा बस युद्ध मात्र को छोड़कर, कहाँ नहीं हैं हम सदय फिर एक बार हे विश्व! तुम गाओ भारत की विजय 'हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का हृदय' से हमारी किस विशेषता का बोध होता है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 14 साक्षी है इतिहास हमी पहले जागे है जाग्रत सब हो रहे हमारे ही आगे हैं। शत्रु हमारे कहाँ नहीं भय से भागे हैं? कायरता से कहाँ प्राण हमने त्यागे हैं। हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का भी हृदया फिर एक बार हे विश्व तुम, गाओ भारत की विजय ।। कहाँ प्रकाशित नहीं रहा है तेज हमारा दलित कर चुके शत्रु सदा हम पैरों द्वारा। बताओ तुम कौन नहीं जो हमसे हारा पर शरणागत हुआ कहाँ, कब हमें न प्यारा बस युद्ध मात्र को छोड़कर, कहाँ नहीं हैं हम सदय फिर एक बार हे विश्व! तुम गाओ भारत की विजय हमारी दयालुता प्रकट होती है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 14 साक्षी है इतिहास हमी पहले जागे है जाग्रत सब हो रहे हमारे ही आगे हैं। शत्रु हमारे कहाँ नहीं भय से भागे हैं? कायरता से कहाँ प्राण हमने त्यागे हैं। हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का भी हृदया फिर एक बार हे विश्व तुम, गाओ भारत की विजय ।। कहाँ प्रकाशित नहीं रहा है तेज हमारा दलित कर चुके शत्रु सदा हम पैरों द्वारा। बताओ तुम कौन नहीं जो हमसे हारा पर शरणागत हुआ कहाँ, कब हमें न प्यारा बस युद्ध मात्र को छोड़कर, कहाँ नहीं हैं हम सदय फिर एक बार हे विश्व! तुम गाओ भारत की विजय 'हमारे आगे सबका जाग्रत होना' का भाव है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 14 साक्षी है इतिहास हमी पहले जागे है जाग्रत सब हो रहे हमारे ही आगे हैं। शत्रु हमारे कहाँ नहीं भय से भागे हैं? कायरता से कहाँ प्राण हमने त्यागे हैं। हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का भी हृदया फिर एक बार हे विश्व तुम, गाओ भारत की विजय ।। कहाँ प्रकाशित नहीं रहा है तेज हमारा दलित कर चुके शत्रु सदा हम पैरों द्वारा। बताओ तुम कौन नहीं जो हमसे हारा पर शरणागत हुआ कहाँ, कब हमें न प्यारा बस युद्ध मात्र को छोड़कर, कहाँ नहीं हैं हम सदय फिर एक बार हे विश्व! तुम गाओ भारत की विजय कवि किसे भारत की जय-जयकार करने को कह रहा है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 14 साक्षी है इतिहास हमी पहले जागे है जाग्रत सब हो रहे हमारे ही आगे हैं। शत्रु हमारे कहाँ नहीं भय से भागे हैं? कायरता से कहाँ प्राण हमने त्यागे हैं। हैं हमीं प्रकम्पित कर चुके, सुरपति तक का भी हृदया फिर एक बार हे विश्व तुम, गाओ भारत की विजय ।। कहाँ प्रकाशित नहीं रहा है तेज हमारा दलित कर चुके शत्रु सदा हम पैरों द्वारा। बताओ तुम कौन नहीं जो हमसे हारा पर शरणागत हुआ कहाँ, कब हमें न प्यारा बस युद्ध मात्र को छोड़कर, कहाँ नहीं हैं हम सदय फिर एक बार हे विश्व! तुम गाओ भारत की विजय 'शत्रु' शब्द का विपरीतार्थक है

बच्चों की दुनिया में कोई लड़ाई नहीं होती। उनके लिए दुनिया है और वे इस दुनिया में आना चाहते हैं। बच्चों को यह सुनना अच्छा नहीं लगता कि यह दुनिया इतनी बेकार है, यहाँ करने के काबिल कुछ भी नहीं है और इससे बचकर कितना दूर भागा जा सकता है। संभवतः सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि न्यू लिटिल स्कूल के शिक्षक खुले और सच्चे हैं अर्थात, ये लोग उन सभी विषयों पर बात करने के लिए तत्पर रहते हैं जिन पर बच्चे बात करना चाहते हैं। वे अपने सच्चे विचार प्रकट करते हैं और कोई बात अगर वे नहीं जानते तो स्वीकार कर लेते हैं। ज्यादातर शिक्षकों के साथ ऐसा नहीं है। सर्वेक्षण से यह स्पष्ट होता है कि 90 प्रतिशत अमेरिकी शिक्षक विवादास्पद विषयों के बारे में स्कूल में बात करने में विश्वास नहीं करते तथा बच्चों को भी इन विषयों के बारे में बात नहीं करने देते। हालाँकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि बच्चों की इन विषयों में सबसे अधिक रुचि होती है। इसलिए पारंपरिक स्कूलों में बच्चे ज्यादा बात नहीं कर सकते और ईमानदारी से नहीं कर सकते। इसके अलावा शिक्षकों को प्रशिक्षण में बार-बार सिखाया जाता है कि अपनी अज्ञानता, अनिश्चय और उलझन को कभी स्वीकार नहीं करें। सबसे अहम बात यह है कि उनमें कूट-कूट कर यह भरा जाता है कि छात्रों से एक पेशेवर दूरी रखें और अपनी व्यक्तिगत जिंदगी और भावनाओं के बारे में कभी खुलकर बात नहीं करें। लेकिन यही वे बातें हैं जिनमें बच्चों की सबसे ज्यादा जिज्ञासा होती है, क्योंकि इसी से ये महसूस कर सकते हैं कि बड़ा होना क्या होता है। ''बच्चों की दुनिया में कोई लड़ाई नहीं होती''- वाक्य से. तात्पर्य है--

बच्चों की दुनिया में कोई लड़ाई नहीं होती। उनके लिए दुनिया है और वे इस दुनिया में आना चाहते हैं। बच्चों को यह सुनना अच्छा नहीं लगता कि यह दुनिया इतनी बेकार है, यहाँ करने के काबिल कुछ भी नहीं है और इससे बचकर कितना दूर भागा जा सकता है। संभवतः सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि न्यू लिटिल स्कूल के शिक्षक खुले और सच्चे हैं अर्थात, ये लोग उन सभी विषयों पर बात करने के लिए तत्पर रहते हैं जिन पर बच्चे बात करना चाहते हैं। वे अपने सच्चे विचार प्रकट करते हैं और कोई बात अगर वे नहीं जानते तो स्वीकार कर लेते हैं। ज्यादातर शिक्षकों के साथ ऐसा नहीं है। सर्वेक्षण से यह स्पष्ट होता है कि 90 प्रतिशत अमेरिकी शिक्षक विवादास्पद विषयों के बारे में स्कूल में बात करने में विश्वास नहीं करते तथा बच्चों को भी इन विषयों के बारे में बात नहीं करने देते। हालाँकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि बच्चों की इन विषयों में सबसे अधिक रुचि होती है। इसलिए पारंपरिक स्कूलों में बच्चे ज्यादा बात नहीं कर सकते और ईमानदारी से नहीं कर सकते। इसके अलावा शिक्षकों को प्रशिक्षण में बार-बार सिखाया जाता है कि अपनी अज्ञानता, अनिश्चय और उलझन को कभी स्वीकार नहीं करें। सबसे अहम बात यह है कि उनमें कूट-कूट कर यह भरा जाता है कि छात्रों से एक पेशेवर दूरी रखें और अपनी व्यक्तिगत जिंदगी और भावनाओं के बारे में कभी खुलकर बात नहीं करें। लेकिन यही वे बातें हैं जिनमें बच्चों की सबसे ज्यादा जिज्ञासा होती है, क्योंकि इसी से ये महसूस कर सकते हैं कि बड़ा होना क्या होता है। 'विचार' शब्द में 'इक' प्रत्यय लगने से ____________ शब्द बनेगा।