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वर्तनी-परिभाषा|शुद्ध वर्तनी लिखने के प्र...

वर्तनी-परिभाषा|शुद्ध वर्तनी लिखने के प्रमुख नियम|वर्तनी संबंधी अशुद्धियाँ एवं उनमें सुधार|अक्षर रचना की जानकारी का अभाव|भाषा संबंधी अशुद्धियाँ|OMR

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कक्षा में कुछ बच्चे लिखते समय वर्तनी संबंधी त्रुटियाँ, करते हैं। एक भाषा-शिक्षक के रूप में आप क्या करेंगे?

कक्षा आठ में पढ़ने वाली नंदिनी लिखते समय वर्तनी की अशुद्धियाँ करती है। भाषा-शिक्षक के रूप में आप अपनी क्या जिम्मेदारी मानते हैं?

कारक प्रकरण की दृष्टि से संज्ञा की परिभाषा |अनुवाद की दृष्टि से संज्ञाश्रित नियम |सर्वनाम संज्ञा एवं सर्वनाम का भावार्थ |सर्वनामाश्रित प्रमुख नियम |OMR|संस्कृतानुवाद की दृष्टि से प्रमुख सर्वनाम शब्द |सारांश

सभ्यता के पुराने दस्तावेज के रूप में खण्डहरों व भूमिगत सामग्रियों को देखा जाता है। जब व्यक्ति अपने आपको सामाजिक जीवन में ढालने लगा, तब से वह समय एकता में प्रदर्शित होता है। इस प्रदर्शन की सीमा को हड़प्पा व मोहनजोदडो से प्राप्त वस्तुओं से जान सकते हैं उनकी अभिव्यक्ति रहन-सहन, मोहरों, सिक्कों एवं बने-बनाए पक्के व अधपके खिलौनों से जान सकते हैं। उनकी धार्मिक भावना के रूप में कुण्ड की प्राप्ति हुई है, जिससे उनकी धार्मिक संवेदनाओं को जान सकते हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं में ढहती सभ्यताओं की कहानी, जमीन में धंसे समय के काल को खोद कर देख सकते हैं। इससे इतिहास की टूटी कड़ियों का पता चलता है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे नगरीय सभ्यता के स्थान पर ग्रामीण सभ्यता का विकास होता है। यह वैदिक युग में हुआ और इसी सभ्यता में भाषा की उपलब्धि हासिल हुई, जिसको संस्कृत के रूप में जाना जाता है। वैदिक युग में मानव ने जंगल से निकल ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया तथा समाज ने प्राकृतिक रूपों को ही अपने इष्ट के रूप में स्वीकारा, जिसकी अभिव्यक्ति ऋग्वेद के रूप में मिलती है। भाषा की यह वृत्ति केवल भारतभूमि पर ही सम्भव नहीं हुई, बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। संस्कृत भाषा की प्राथमिक जीवित रचना के रूप में ऋग्वेद का शास्त्रीय संस्कृत भाषा का सम्बन्ध है। संस्कृत भाषा अपनी समस्त स्थितियों में प्रयुक्त बहुल भाषा है, परन्तु वेदों में जो रूप प्रयुक्त हुए हैं, उनमें बाद के दिनों से अन्तर है। यही कारण है कि वैदिक भाषा का प्रभाव बाद के दिनों में अन्य भाषाओं में देखने को मिलता है, क्योंकि संस्कृत ही इन भाषाओं की जननी है। वर्तमान में भारतीय संविधान में संगृहीत सभी भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है। किस युग में मानव ने ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया?

सभ्यता के पुराने दस्तावेज के रूप में खण्डहरों व भूमिगत सामग्रियों को देखा जाता है। जब व्यक्ति अपने आपको सामाजिक जीवन में ढालने लगा, तब से वह समय एकता में प्रदर्शित होता है। इस प्रदर्शन की सीमा को हड़प्पा व मोहनजोदडो से प्राप्त वस्तुओं से जान सकते हैं उनकी अभिव्यक्ति रहन-सहन, मोहरों, सिक्कों एवं बने-बनाए पक्के व अधपके खिलौनों से जान सकते हैं। उनकी धार्मिक भावना के रूप में कुण्ड की प्राप्ति हुई है, जिससे उनकी धार्मिक संवेदनाओं को जान सकते हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं में ढहती सभ्यताओं की कहानी, जमीन में धंसे समय के काल को खोद कर देख सकते हैं। इससे इतिहास की टूटी कड़ियों का पता चलता है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे नगरीय सभ्यता के स्थान पर ग्रामीण सभ्यता का विकास होता है। यह वैदिक युग में हुआ और इसी सभ्यता में भाषा की उपलब्धि हासिल हुई, जिसको संस्कृत के रूप में जाना जाता है। वैदिक युग में मानव ने जंगल से निकल ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया तथा समाज ने प्राकृतिक रूपों को ही अपने इष्ट के रूप में स्वीकारा, जिसकी अभिव्यक्ति ऋग्वेद के रूप में मिलती है। भाषा की यह वृत्ति केवल भारतभूमि पर ही सम्भव नहीं हुई, बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। संस्कृत भाषा की प्राथमिक जीवित रचना के रूप में ऋग्वेद का शास्त्रीय संस्कृत भाषा का सम्बन्ध है। संस्कृत भाषा अपनी समस्त स्थितियों में प्रयुक्त बहुल भाषा है, परन्तु वेदों में जो रूप प्रयुक्त हुए हैं, उनमें बाद के दिनों से अन्तर है। यही कारण है कि वैदिक भाषा का प्रभाव बाद के दिनों में अन्य भाषाओं में देखने को मिलता है, क्योंकि संस्कृत ही इन भाषाओं की जननी है। वर्तमान में भारतीय संविधान में संगृहीत सभी भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है। निम्नलिखित में से कौन-सी विश्व की पहली साहित्यिक रचमा मानी जाती है

सभ्यता के पुराने दस्तावेज के रूप में खण्डहरों व भूमिगत सामग्रियों को देखा जाता है। जब व्यक्ति अपने आपको सामाजिक जीवन में ढालने लगा, तब से वह समय एकता में प्रदर्शित होता है। इस प्रदर्शन की सीमा को हड़प्पा व मोहनजोदडो से प्राप्त वस्तुओं से जान सकते हैं उनकी अभिव्यक्ति रहन-सहन, मोहरों, सिक्कों एवं बने-बनाए पक्के व अधपके खिलौनों से जान सकते हैं। उनकी धार्मिक भावना के रूप में कुण्ड की प्राप्ति हुई है, जिससे उनकी धार्मिक संवेदनाओं को जान सकते हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं में ढहती सभ्यताओं की कहानी, जमीन में धंसे समय के काल को खोद कर देख सकते हैं। इससे इतिहास की टूटी कड़ियों का पता चलता है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे नगरीय सभ्यता के स्थान पर ग्रामीण सभ्यता का विकास होता है। यह वैदिक युग में हुआ और इसी सभ्यता में भाषा की उपलब्धि हासिल हुई, जिसको संस्कृत के रूप में जाना जाता है। वैदिक युग में मानव ने जंगल से निकल ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया तथा समाज ने प्राकृतिक रूपों को ही अपने इष्ट के रूप में स्वीकारा, जिसकी अभिव्यक्ति ऋग्वेद के रूप में मिलती है। भाषा की यह वृत्ति केवल भारतभूमि पर ही सम्भव नहीं हुई, बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। संस्कृत भाषा की प्राथमिक जीवित रचना के रूप में ऋग्वेद का शास्त्रीय संस्कृत भाषा का सम्बन्ध है। संस्कृत भाषा अपनी समस्त स्थितियों में प्रयुक्त बहुल भाषा है, परन्तु वेदों में जो रूप प्रयुक्त हुए हैं, उनमें बाद के दिनों से अन्तर है। यही कारण है कि वैदिक भाषा का प्रभाव बाद के दिनों में अन्य भाषाओं में देखने को मिलता है, क्योंकि संस्कृत ही इन भाषाओं की जननी है। वर्तमान में भारतीय संविधान में संगृहीत सभी भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है। संस्कृत को किन भाषाओं की जननी बताया गया है?

सभ्यता के पुराने दस्तावेज के रूप में खण्डहरों व भूमिगत सामग्रियों को देखा जाता है। जब व्यक्ति अपने आपको सामाजिक जीवन में ढालने लगा, तब से वह समय एकता में प्रदर्शित होता है। इस प्रदर्शन की सीमा को हड़प्पा व मोहनजोदडो से प्राप्त वस्तुओं से जान सकते हैं उनकी अभिव्यक्ति रहन-सहन, मोहरों, सिक्कों एवं बने-बनाए पक्के व अधपके खिलौनों से जान सकते हैं। उनकी धार्मिक भावना के रूप में कुण्ड की प्राप्ति हुई है, जिससे उनकी धार्मिक संवेदनाओं को जान सकते हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं में ढहती सभ्यताओं की कहानी, जमीन में धंसे समय के काल को खोद कर देख सकते हैं। इससे इतिहास की टूटी कड़ियों का पता चलता है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे नगरीय सभ्यता के स्थान पर ग्रामीण सभ्यता का विकास होता है। यह वैदिक युग में हुआ और इसी सभ्यता में भाषा की उपलब्धि हासिल हुई, जिसको संस्कृत के रूप में जाना जाता है। वैदिक युग में मानव ने जंगल से निकल ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया तथा समाज ने प्राकृतिक रूपों को ही अपने इष्ट के रूप में स्वीकारा, जिसकी अभिव्यक्ति ऋग्वेद के रूप में मिलती है। भाषा की यह वृत्ति केवल भारतभूमि पर ही सम्भव नहीं हुई, बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। संस्कृत भाषा की प्राथमिक जीवित रचना के रूप में ऋग्वेद का शास्त्रीय संस्कृत भाषा का सम्बन्ध है। संस्कृत भाषा अपनी समस्त स्थितियों में प्रयुक्त बहुल भाषा है, परन्तु वेदों में जो रूप प्रयुक्त हुए हैं, उनमें बाद के दिनों से अन्तर है। यही कारण है कि वैदिक भाषा का प्रभाव बाद के दिनों में अन्य भाषाओं में देखने को मिलता है, क्योंकि संस्कृत ही इन भाषाओं की जननी है। वर्तमान में भारतीय संविधान में संगृहीत सभी भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है। कौन-सी सभ्यता पहले विद्यमान थी?