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प्रश्नों का चक्रव्यूह |क्या कर पाओगे पार...

प्रश्नों का चक्रव्यूह |क्या कर पाओगे पार

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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 24 नन्हीं-सी नदी हमारी टेढ़ी-मेढ़ी धार, गर्मियों में घुटने भर भिगो कर जाते पार पार जाते ढोर-डेंगर बैलगाड़ी चालू, ऊँचे हैं किनारे इसके पाट इसका ढालू। पेटे में झकाझक बालू कीचड़ का न नाम, काँस फूले एक पार उजले जैसे घाम। दिन भर किचपिच-किचपिच करती मैना डार-डार, रातों को हुआँ हुआँ कर उठते सियार। " " रवीन्द्रनाथ ठाकुर 'घाम' शब्द का अर्थ क्या होगा?