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अर्थव्यवस्था के अन्य वर्गीकरण|संगठित सेक...

अर्थव्यवस्था के अन्य वर्गीकरण|संगठित सेक्टर|असंगठित सेक्टर|सार्वजनिक सेक्टर|प्राइवेट सेक्टर|बेरोजगारी उन्मूलन के लिए भारत सरकार की योजनाएँ|OMR

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सार्वजनिक क्षेत्र|निजी क्षेत्र|बेरोजगारी उन्मूलन के लिए भारत सरकार की योजनाएं|OMR

अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्रक|प्राइमरी सेक्टर|सेकंडरी सेक्टर|तृतीयक सेक्टर|प्राइमरी सेक्टर से टरशियरी सेक्टर की तरफ|विभिन्न सेक्टर की पारस्परिक निर्भरता|भारतीय अर्थव्यवस्था में अलग अलग सेक्टर का वैल्यू|भारत के जीडीपी में अलग अलग सेक्टर का शेअर|OMR

अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्रक|प्राइमरी सेक्टर|सेकंडरी सेक्टर|तृतीयक सेक्टर|प्राइमरी सेक्टर से टरशियरी सेक्टर की तरफ|विभिन्न सेक्टर की पारस्परिक निर्भरता|भारतीय अर्थव्यवस्था में अलग अलग सेक्टर का वैल्यू|भारत के जीडीपी में अलग अलग सेक्टर का शेअर|OMR

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विभिन्न सेक्टर की पारस्परिक निर्भरता|भारतीय अर्थव्यवस्था में अलग अलग सेक्टर का वैल्यू|OMR

केंद्र शासित प्रदेश|भारत में संघीय व्यवस्था की सफलता के कारण|भाषायी राज्य|भाषा नीति|केंद्र और राज्य के रिश्ते|कांग्रेस की मोनोपॉली के समय|गठबंधन सरकार के दौर की स्थिति|भारत में भाषायी विविधता|OMR

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Statement/ कथन : The Prime Minister has made clear that his government will make concerted effort for the upliftment of poor farmers and announced an annual pension for them . प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार गरीब किसानों के उत्थान के लिए ठोस प्रयास करेगी और उनके लिए वार्षिक पेंशन की घोषणा की | Conclusion/ निष्कर्ष: I. Government understands that the condition of poor farmers needs immediate attention./ सरकार समझती है कि गरीब किसानों की स्थिति पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है | II. No benefits are announced for the other sections of society./ समाज के अन्य वर्गों के लिए किसी भी लाभ की घोषणा नहीं की जाती है

आज शिक्षा के क्षेत्र में भी बाजारीकरण हो जाने के कारण शिक्षा महँगी और गरीबों की पहुँच से बाहर हो चुकी है। एक ओर जा रूचि और उपयोगिता के अनुसार उपयुक्त शिक्षा पाने के लिए गरीबों के पास धन उपलब्ध नहीं है, तो वहीं जो संपन्न हैं उनके पास समय का अभाव है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था एक बेहतर विकल्प के तौर पर उभरी है। पिछले वर्ष देश के गरीब और स्कूल ना जा सकने वाले बच्चों के लिए सरकार की ओर से प्रभावी कदम उठाते हुए ई-शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत करते हुए 'स्वयं डॉट जीओवी डॉट इन वेब पोर्टल की शुरूआत की गई है। इससे बच्चे ऑनलाइन शिक्षा पा सकेंगे और उन्हें किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना होगा। इस पोर्टल की विशेषता यह है कि इससे छात्र मैनेजमेंट. इन्जीनियरिंग सहित तमाम पाठ्यक्रमों की पढ़ाई घर बैठे कर सकेंगे। इससे छात्रों को घर बैठे ही सर्टिफिकेट और डिग्री भी हासिल होंगे, जो किसी भी विश्वविद्यालय में मान्य होंगे। ऑनलाइन एजुकेशन के प्रति लोगों का बढ़ता उत्साह देखकर कहा जा सकता है कि भारत में इसका भविष्य उज्ज्वल है। यही कारण है कि अब अधिकतर शिक्षण संस्थान इस व्यवस्था को अपना रहे हैं। पढ़ाई का बढ़ता खर्च और किसी भी प्रोफेशनल कोर्स की डिग्री प्राप्त करने के लिए कॉलेजों का चुनाव, प्रवेश परीक्षा और फिर एक साथ मोटी फीस चुकाना युवाओं की बढ़ती संख्या के लिए काफी मुश्किल साबित हो रहा है। भारत में केवल बारह प्रतिशत छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलता है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा देने वाली कंपनियों के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार बन गया है। आज एक-दूसरे का समझने-जानने की जिज्ञासा भी लोगों में बढ़ी हुई देखी जाती है। ऐसे में किसी देश की भाषा सीखना आवश्यक हो जाता है क्योंकि भाषा सीखने से उस देश की संस्कृति तथा अन्य बातें समझी जा सकती हैं। इसीलिए भारत के प्रति भी रुचि बढ़ी है और हिंदी सीखने-सिखाने की माँग भी बढ़ी है। यह भारत के लिए, विशेषकर हिंदी भाषा के लिए शुभ संकेत है। भारत में ऑनलाइन शिक्षा में निरंतर रुचि बढ़ने का उपयुक्त कारण नहीं है