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अपवाह|भारत में अपवाह तंत्र|हिमालय की नदि...

अपवाह|भारत में अपवाह तंत्र|हिमालय की नदियाँ|प्रायद्वीपीय नदियाँ|सिंधु नदी तंत्र|OMR

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अपवाह|हिमालय की नदियाँ|सिंधु नदी तंत्र|OMR

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नियंत्रण एवं समन्वय |जन्तु तंत्रिका तंत्र |तंत्रिका तंत्र|तंत्रिका |तंत्रिका की संरचना |प्रतिवर्ती क्रिया |OMR

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गंगा नदी|यमुना|घाघरा गंडक तथा कोसी|चम्बल,केन ,सिंध ,बेतवा|गंगा का प्रवाह|ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र|OMR

मानव परिसंचरण तंत्र |हृदय की संरचना तथा कार्यविधि |हृदय स्पंदन |महत्वपूर्ण प्रश्न |OMR

हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदियों को जन्म दिया है, उनमें गंगा और यमुना नाम की नदियाँ हमारे जीवन की धमनियों की तरह रही हैं। उनकी गोद में हमारे पूर्वजों ने सभ्यता के प्रांगण में अनेक नए खेल खेले। उनके तटों पर जीवन का जो प्रवाह प्रचलित हुआ, वह आज तक हमारे भूत और भावी जीवन को सींच रहा है। भारत हमारा देश है और हम उसके नागरिक हैं यह एक सच्चाई हमारे रोम-रोम में बिंधी हुई है। नदियों की अन्तर्वेदी में पनपने वाले आदि युग के जीवन पर हम अब जितना अधिक विचार करते हैं हमको अपने विकास और वृद्धि की सनातन जड़ों का पृथ्वी के साथ सम्बन्ध उतना ही अधिक घनिष्ठ जान पड़ता है। हमारे धार्मिक पर्वो पर लाखों लोग नदी और जलाशयों के तटों पर एकत्र होते हैं। पृथ्वी के एक-एक जलाशय और सरोवर को भारतीय भावना ने ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न किया, उनके साथ सौहार्द का भाव उत्पन्न किया जो हर एक पीढ़ी के साथ नए रूप में बंधा रहा किन्तु आज स्थिति बड़ी विचित्र और एक सीमा तक चिन्ताजनक हो गई है। हमारी औद्योगिक क्रान्ति ने इन्हें प्रदूषित कर विषैला बना दिया है। जीवनदायिनी नदियाँ आज प्राणघातिनी होती जा रही हैं। मिल-बैठकर सोचने की आवश्यकता है कि क्या करें कि ये पुनः जीवनदायिनी हों और उन सोची हुई योजनाओं को अमल में । लाने की भी आवश्यकता है। स्थिति चिन्ताजनक क्यों हो गई है?