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ऐसे Tips जो Class 9 की पढ़ाई आसान कर देगा...

ऐसे Tips जो Class 9 की पढ़ाई आसान कर देगा

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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये-- यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित थी। वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ घी और सामग्री की आहुतियाँ उसमें पड़ रही थी। सारे वातावरण में सुधि व्याप्त थी और वाजश्रव के चेहरे पर विशेष प्रसन्नता झलक रही थी। उसके द्वारा आयोजित यज्ञ की आज पुर्णाहुति जो थी। देश भर में बड़े-बड़े विद्वान और ऋषि मुनि पधारे थे। यज्ञ के उपरांत वाजश्रवा ब्राह्मणों को प्रभूत दक्षिणा देगा, ऐसा सभी सोच रहे थे। यज्ञ समाप्त हुआ। ब्राह्मणों ने बाजश्रवा को आशीर्वाद दिया और वाजश्रवा ने उन्हें दक्षिणा देना प्रारंभ किया। किंतु यह क्या। यज्ञ की इस अंतिम घड़ी में वाजश्रवा को किस मोह ने घेर लिया? कहाँ तो उसने निश्चय किया था कि यज्ञ की समाप्ति पर वह अपनी सारी संपति दान कर देगा और कहाँ दक्षिणा में दान देने लगा ऐसा निर्बल और बूढ़ी गाएँ जिन्होंने दूध देना ही बंद कर दियाथा। यह बात 'नचिकेता' को अच्छी नहीं लगी। वाजश्रवा क्यों प्रसन्न था?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये-- यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित थी। वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ घी और सामग्री की आहुतियाँ उसमें पड़ रही थी। सारे वातावरण में सुधि व्याप्त थी और वाजश्रव के चेहरे पर विशेष प्रसन्नता झलक रही थी। उसके द्वारा आयोजित यज्ञ की आज पुर्णाहुति जो थी। देश भर में बड़े-बड़े विद्वान और ऋषि मुनि पधारे थे। यज्ञ के उपरांत वाजश्रवा ब्राह्मणों को प्रभूत दक्षिणा देगा, ऐसा सभी सोच रहे थे। यज्ञ समाप्त हुआ। ब्राह्मणों ने बाजश्रवा को आशीर्वाद दिया और वाजश्रवा ने उन्हें दक्षिणा देना प्रारंभ किया। किंतु यह क्या। यज्ञ की इस अंतिम घड़ी में वाजश्रवा को किस मोह ने घेर लिया? कहाँ तो उसने निश्चय किया था कि यज्ञ की समाप्ति पर वह अपनी सारी संपति दान कर देगा और कहाँ दक्षिणा में दान देने लगा ऐसा निर्बल और बूढ़ी गाएँ जिन्होंने दूध देना ही बंद कर दियाथा। यह बात 'नचिकेता' को अच्छी नहीं लगी। उच्चारण' में कौनसा समास है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये-- यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित थी। वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ घी और सामग्री की आहुतियाँ उसमें पड़ रही थी। सारे वातावरण में सुधि व्याप्त थी और वाजश्रव के चेहरे पर विशेष प्रसन्नता झलक रही थी। उसके द्वारा आयोजित यज्ञ की आज पुर्णाहुति जो थी। देश भर में बड़े-बड़े विद्वान और ऋषि मुनि पधारे थे। यज्ञ के उपरांत वाजश्रवा ब्राह्मणों को प्रभूत दक्षिणा देगा, ऐसा सभी सोच रहे थे। यज्ञ समाप्त हुआ। ब्राह्मणों ने बाजश्रवा को आशीर्वाद दिया और वाजश्रवा ने उन्हें दक्षिणा देना प्रारंभ किया। किंतु यह क्या। यज्ञ की इस अंतिम घड़ी में वाजश्रवा को किस मोह ने घेर लिया? कहाँ तो उसने निश्चय किया था कि यज्ञ की समाप्ति पर वह अपनी सारी संपति दान कर देगा और कहाँ दक्षिणा में दान देने लगा ऐसा निर्बल और बूढ़ी गाएँ जिन्होंने दूध देना ही बंद कर दियाथा। यह बात 'नचिकेता' को अच्छी नहीं लगी। "प्रभूत" का अर्थ है?

Alok starts walking from P with speed of 6 km/h towards Q. Raman starts at same time from P towards Q with speed of 9 km/h. Raman reaches Q, turns back and starts walking towards P. He meets Alok at R. If PQ is 15 km, then what is PR? आलोक P बिंदु से Q की ओर 6 km/h की गति से चलना शुरू करता है। रमन 9 km/h की गति के साथ P से की Q की ओर चलना आरम्भ करता है। रमन Q पर पहुँचता है, वापस मुड़ता है और P की ओर चलना शुरू कर देता है। वह आलोक से R पर मिलता है। यदि PQ 15 km है, तो PR कितना है?

Some persons can do a piece of work in 84 days. Two times the number of such persons will do half of the same work in how many days? कुछ व्यक्ति 84 दिनों में एक काम को पूरा कर सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों की दुगनी संख्या कितने दिनों में आधा काम पूरा कर देगी ?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये बाल्यावस्था में हम शीघ्र ही सबकी बातों पर विश्वास कर लेते हैं और मित्र बना लेते हैं। हमारा मन अनेक कल्पनाओं से भरा रहता है। युवावस्था की मित्रता सहपाठी की मित्रता से अधिक दृढ़ शांत और गंभीर होती है। सच्चा मित्र वही है जो दृढ़-चित्त और सत्य-संकल्प का हो। अपने से अधिक आत्म-बल वाले व्यक्ति से मित्रता करना उचित है। क्योंकि वह महान कार्यों में हमारा मनोबल बढ़ाता है। सम्मानित, शुद्ध ह्दयी, कोमल, मेहनती, शिष्ट और सत्यनिष्ठ व्यक्ति पर हम पूरा विश्वास कर मित्रता कर सकते हैं। उससे धोखे की उम्मीद नहीं रहती। ऐसे जान-पहचान वालों से दूर रहना चाहिए जो न कोई बुद्धिमानी या हँसी-मजाक की बात कर सकते हैं और न दुःख के क्षण में सहानुभूति दिखला सकते हैं। मनुष्य को बुरी संगति करने से बचना चाहिए। नीति और सवृत्ति दोनों का नाश होने में देर नहीं लगती और व्यक्ति दिनोंदिन अवनति के गड्ढे में गिरता जाता है। उसका आध्यात्मिक विकास रूक जाता है। बुरे लोगों की संगति थोड़े समय में अपना प्रभाव डाल देती है और हमारे जीवन की पवित्रता नष्ट कर देती है। अतः अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातें करने वालों से दूर रहना चाहिए। लेखक इस गद्यांश में सच्ची मित्रता की परिभाषित करता है कि