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द्रव्य के गुणधर्म और मापन | मात्रको की अ...

द्रव्य के गुणधर्म और मापन | मात्रको की अंतरराष्ट्रीय पद्धति | द्रव्यमान और भार | आयतन, घनत्व ,ताप | मापन मे अनिश्चितता | वैज्ञानिक संकेतन | सार्थक अंक

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Revision|द्रव्य के गुणधर्म|भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्मों का मापन|मात्रकों की अंतर्राष्ट्रीय पद्धति|महत्वपूर्ण शब्दावली|द्रव्यमान तथा भार|नोट

द्रव्य का वर्गीकरण|द्रव्य के गुणधर्म और उनका मापन

सार्थक अंक |सार्थक अंकों की संख्या दर्शाने के लिए नियम |वैज्ञानिक अंकन पद्धति |प्रश्न |OMR

सार्थक अंक |सार्थक अंकों की संख्या दर्शाने के लिए नियम |वैज्ञानिक अंकन पद्धति |प्रश्न |OMR

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए काव्य कला के बारे में अपने वाल्मीकि की कथा सुनी है क्रोंच वध से फूटे हुए कविता के अजस्त्र निर्झर की बात आप अवश्य जानते है। वह कहानी सुन्दर है और उसके द्वारा कविता के स्वभाव की और जो संकेत होता है। की कविता मानव की आत्मा के आर्त्त -चीत्कार का सार्थक रूप है उसकी कई व्याख्याएँ की जा सकती है और की गयी है लेकिन हम इसे एक सुन्दर कल्पना से अधिक कुछ नहीं मानते। बल्कि हम कहेंगे की हम इससे अधिक कुछ मानना चाहते ही नहीं। क्योंकि हम यह नहीं मानना चाहते की कविता ने प्रकट होने के लिए इतनी देर तक प्रतीक्षा की। वाल्मीकि और रामचंद्र का काल और अयोध्या जैसी नगरी का काल , भारतीय सस्कृति की चरमोत्कर्ष का काल चाहे न भी रहा हो , यह स्पष्ट है की यह संस्कृति की एक पर्याप्त विकसित अवस्था का काल था , और हम यह नहीं मान सकते , नहीं मानना चाहते है की मौलिक ललित कलाओ में से कोई एक भी ऐसी थी जो इतने समय तक प्रकट हुए बिना ही रह गयी थी। अतएव हम जिस अवस्था की कल्पना करना चाहते है वह वाल्मीकि से बहुत पहले की अवस्था है। वैज्ञानिक मुहावरे की शरण लेकर कहे की वह नागरिक सभ्यता से पहले की अवस्था होनी चाहिए , वह खेतिहर सभ्यता से और चरवाहा से भी पहले की अवस्था होनी चाहिए। वह अवस्था जब मानव करारो में कंदराएँ खोदकर रहता था , और घास -पात या कभी पत्थर या ताम्बे के फरसों से आखेट करके मांस खाता था। क्रोंच -वध द्वारा किसके स्वभाव की और संचित किया जाता है ?