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01 यहां से Start करो बहुत आसान हो जायेग...

01 यहां से Start करो बहुत आसान हो जायेगा | Zero level Basic Chemistry

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The ratio between the present ages of a mother and her son is 4 : 1. 14 years from now, their ages will be in the ratio of 2 : 1. What is the present age ( in years ) of the mother ? किसी माता और उसके पुत्र की वर्तमान आयु का जनुपात 4:1 है | आज से 14 वर्षो के बाद उनकी आयु का अनुपात 2:1 हो जायेगा | माता की वर्तमान आयु (वर्षो में ) है

In how many years will a money become triple of itself at the rate of 10% per annum simple interest? 10% प्रति वर्ष साधारण ब्याज की दर से कोई धन कितने वर्षो में स्वयं का तीन गुना हो जायेगा ?

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हेवल घाटी के गाँववासियों ने चीड़ के पेड़ों के हो रहे विनाश के विरुद्ध जुलूस निकाले। घास-चारा लेने जा रही महिलाओं ने इन पेड़ों से लीसा टपकाने के लिए लगाए गए लोहे निकाल दिए व उनके स्थान पर मिट्टी की मरहम-पट्टी कर दी। महिलाओं ने पेड़ों का रक्षा-बंधन भी किया। आरंभ से ही लगा कि वृक्ष बचाने में महिलाएँ आगे आएँगी। वन कटने का सबसे अधिक कष्ट उन्हीं को उठाना पड़ता है, क्योंकि घास-चारा लाने के लिए उन्हें और दूर जाना पड़ता है। कठिन स्थानों से घास-चारा एकत्र करने में कई बार उन्हें बहुत चोट लग जाती है। वैसे भी पहाड़ी रास्तों पर घास-चारा का बोझ लेकर पाँच-दस किमी या उससे भी ज्यादा चलना बहुत कठिन हो जाता है। इस आंदोलन की बात ऊँचे अधिकारियों तक पहुँची तो उन्हें लीसा प्राप्त करने के तौर-तरीकों की जाँच करवानी पड़ी। जाँच से स्पष्ट हो गया कि बहुत अधिक लीसा निकलने के लालच में चीड़ के पेड़ों को बहुत नुकसान हुआ है। इन अनुचित तरीकों पर रोक लगी। चीड़ के घायल पेड़ों को आराम मिला, एक नया जीवन मिला। पर तभी खबर मिली कि इस इलाके के बहुत से पेड़ों को कटाई के लिए नीलाम किया जा रहा है। लोगों ने पहले तो अधि कारियों को ज्ञापन दिया कि जहाँ पहले से ही घास-चारे का संकट है, वहाँ और व्यापारिक कटान न किया जाए। जब अधिकारियों ने गाँववासियों की माँग पर ध्यान न देते हुए नरेन्द्रनगर में नीलामी की घोषणा कर दी, तो गाँववासी जुलूस बनाकर वहाँ नीलामी का विरोध करते हुए पहुंच गए। वहां एकत्र ठेकेदारों से हेवल घाटी की महिलाओं ने कहा, "आप इन पेड़ों को काटकर हमारी रोजी-रोटी मत छीनो। पेड़ कटने से यहां बाढ़ व भू-स्खलन का खतरा भी बढ़ जाएगा।" कुछ ठेकेदारों ने तो वास्तव में वह बात मानी पर कुछ अन्य ठेकेदारों ने अद्वानी और सलेत के जंगल खरीद लिए। चीड़ के पेड़ों को किससे बहुत नुकसान हो रहा था ?