Class 10 Science?पिछले 8 वर्षों मे सबसे ज्यादा पूछे गए प्रश्न एक ही कक्षा मे✅ UP Board 2023 Exam
Class 10 Science?पिछले 8 वर्षों मे सबसे ज्यादा पूछे गए प्रश्न एक ही कक्षा मे✅ UP Board 2023 Exam
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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 10 कहते आते थे यही सभी नरदेही 'माता न कुमाता, पुत्र कुपुत्र भले ही।' अब कहें सभी यह हाय विरुद्ध विधाता 'है पुत्र-पुत्र ही रहे कुमाता माता।' बस मैंने इसका बाह्य मात्र ही देखा दृढ़ हृदय न देखा, मृदुल गात्र ही देखा। परमार्थ न देखा पूर्ण स्वार्थ ही साधा इस कारण ही तो हाय आज यह बाधा। युग-युग तक चलती रहे कठोर कहानी 'रघुकुल में भी थी एक अभागिन रानी।' निज जन्म-जन्म में सुने जीव यह मेरा 'धिक्कार! उसे था महा स्वार्थ ने घेरा।' "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई जिस जननी ने है जना भरत-सा भाई।" पागल-सी प्रभु के साथ सभा चिल्लाई "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई।" 'सौ बार धन्य वह एक लाल की माई' किसने कहा?
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 10 कहते आते थे यही सभी नरदेही 'माता न कुमाता, पुत्र कुपुत्र भले ही।' अब कहें सभी यह हाय विरुद्ध विधाता 'है पुत्र-पुत्र ही रहे कुमाता माता।' बस मैंने इसका बाह्य मात्र ही देखा दृढ़ हृदय न देखा, मृदुल गात्र ही देखा। परमार्थ न देखा पूर्ण स्वार्थ ही साधा इस कारण ही तो हाय आज यह बाधा। युग-युग तक चलती रहे कठोर कहानी 'रघुकुल में भी थी एक अभागिन रानी।' निज जन्म-जन्म में सुने जीव यह मेरा 'धिक्कार! उसे था महा स्वार्थ ने घेरा।' "सी बार धन्य वह एक लाल की माई जिस जननी ने है जना भरत-सा भाई।" पागल-सी प्रभु के साथ सभा चिल्लाई "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई।" अभागिन किसे कहा गया है?
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 10 कहते आते थे यही सभी नरदेही 'माता न कुमाता, पुत्र कुपुत्र भले ही।' अब कहें सभी यह हाय विरुद्ध विधाता 'है पुत्र-पुत्र ही रहे कुमाता माता।' बस मैंने इसका बाह्य मात्र ही देखा दृढ़ हृदय न देखा, मृदुल गात्र ही देखा। परमार्थ न देखा पूर्ण स्वार्थ ही साधा इस कारण ही तो हाय आज यह बाधा। युग-युग तक चलती रहे कठोर कहानी 'रघुकुल में भी थी एक अभागिन रानी।' निज जन्म-जन्म में सुने जीव यह मेरा 'धिक्कार! उसे था महा स्वार्थ ने घेरा।' "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई जिस जननी ने है जना भरत-सा भाई।" पागल-सी प्रभु के साथ सभा चिल्लाई "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई।" रानी का कौन-सा भाव प्रकट हो रहा है?
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 10 कहते आते थे यही सभी नरदेही 'माता न कुमाता, पुत्र कुपुत्र भले ही।' अब कहें सभी यह हाय विरुद्ध विधाता 'है पुत्र-पुत्र ही रहे कुमाता माता।' बस मैंने इसका बाह्य मात्र ही देखा दृढ़ हृदय न देखा, मृदुल गात्र ही देखा। परमार्थ न देखा पूर्ण स्वार्थ ही साधा इस कारण ही तो हाय आज यह बाधा। युग-युग तक चलती रहे कठोर कहानी 'रघुकुल में भी थी एक अभागिन रानी।' निज जन्म-जन्म में सुने जीव यह मेरा 'धिक्कार! उसे था महा स्वार्थ ने घेरा।' "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई जिस जननी ने है जना भरत-सा भाई।" पागल-सी प्रभु के साथ सभा चिल्लाई "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई।" प्रभु के साथ चिल्लाए
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 10 कहते आते थे यही सभी नरदेही 'माता न कुमाता, पुत्र कुपुत्र भले ही।' अब कहें सभी यह हाय विरुद्ध विधाता 'है पुत्र-पुत्र ही रहे कुमाता माता।' बस मैंने इसका बाह्य मात्र ही देखा दृढ़ हृदय न देखा, मृदुल गात्र ही देखा। परमार्थ न देखा पूर्ण स्वार्थ ही साधा इस कारण ही तो हाय आज यह बाधा। युग-युग तक चलती रहे कठोर कहानी 'रघुकुल में भी थी एक अभागिन रानी।' निज जन्म-जन्म में सुने जीव यह मेरा 'धिक्कार! उसे था महा स्वार्थ ने घेरा।' "सी बार धन्य वह एक लाल की माई जिस जननी ने है जना भरत-सा भाई।" पागल-सी प्रभु के साथ सभा चिल्लाई "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई।" 'स्वार्थ' से बनने वाला विशेषण है
9 years ago, the average age of a family of five members was 33 years. Now, three new members join whose ages are in ascending order with consecutive gaps of 8 years. If the present average age of the family is the same as it was 9 years ago, what is the age (in years) of the eldest new member? 9 वर्ष पहले, पांच सदस्यों के एक परिवार की औसत उम्र 33 वर्ष थी | अब, तीन नए सदस्य शामिल हो गए हैं जिनकी उम्र आरोही क्रम में है तथा उम्रों के बीच 8 वर्षों का अनुगामी अंतराल है | यदि परिवार की वर्तमान औसत आयु उतनी ही है जितनी यह 9 वर्ष पहले थी, तो सबसे बड़े नए सदस्य की उम्र ( वर्ष में ) ज्ञात करें |
Raj Shekhar - 88.8% - UP Board Class 10 - 2023
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। क्या आपने कभी महसूस किया है कि किसी सवाल का सही उत्तर मिल जाने के बाद सिर्फ उकताहट के सिवा कुछ बाकी नहीं बचता। इसके बाद सारे रास्ते बंद से लगने लगते हैं। दूसरी ओर एक गलत जवाब उतना ही रोचक होता है जितना कोई रहस्यमय कत्ला मुझे इस बात पर आश्चर्य होता है कि अपने अट्ठाईस वर्षों के अध्यापन के अनुभव से मैंने गलत उत्तरों से कितना कुछ सीखा है। अपनी खुद की और अपने विद्यार्थी के किसी प्रश्न का गलत उत्तर देने पर, मैं उससे सबसे पहले यह पूछता हूँ कि उसने ऐसा उत्तर क्या सोचकर दिया? कला-संकाय के छात्र अक्सर यह शिकायत करते हैं कि विज्ञान-संबंधी परीक्षाएँ उतनी रोमांचक नहीं होती क्योंकि उनके प्रश्नों और उत्तरों का सही-सही अनुमान लगाया जा सकता है। यदि व्यक्ति को किसी प्रश्न को हल करने का तरीका पहले से ही मालूम है तो उसके लिए कोई चुनौती नहीं बचती। यह सही है, भौतिक विज्ञान के शिक्षक बहुत कड़ी मेहनत करते हैं और सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके विद्यार्थी सही उत्तर तक पहुँच पाएँ। हालाँकि यह भी अपनी जगह सच है कि भौतिक विज्ञान के शिक्षक के लिए सबसे मजेदार स्थिति तब पैदा होती है जब विद्यार्थी एक ऐसा गलत जवाब दे जिसमें गलती होते हुए भी कुछ सोचने के लिए मजबूर कर देने की क्षमता हो। यही वह स्थिति होती है जब भौतिकी के किसी पहलू पर पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे विद्यार्थी के दिमाग की कशमकश को समझा जा सकता है। बहुत-से गलत जवाबों की तह में कुछ सही तथ्य और सोचने की शक्ति छुपी होती है। हो सकता है कि उत्तर देने वाला अपना तर्क सही न दे पाया हो, या शिक्षक द्वारा दी गई व्याख्या को सही प्रकार से न समझा गया हो, या फिर ऐसा भी हो सकता है कि जिस रूप में उसके समक्ष तथ्य प्रस्तुत किये गए उन्हीं में कोई कमी रह गई हो। हो सकता है कि भौतिक विज्ञान के सहज नियमों को समझने में ही कोई भूल हुई हो। अपनी खुद की और अपने विद्यार्थियों .......... वाक्य में रेखांकित सर्वनाम है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। क्या आपने कभी महसूस किया है कि किसी सवाल का सही उत्तर मिल जाने के बाद सिर्फ उकताहट के सिवा कुछ बाकी नहीं बचता। इसके बाद सारे रास्ते बंद से लगने लगते हैं। दूसरी ओर एक गलत जवाब उतना ही रोचक होता है जितना कोई रहस्यमय कत्ला मुझे इस बात पर आश्चर्य होता है कि अपने अट्ठाईस वर्षों के अध्यापन के अनुभव से मैंने गलत उत्तरों से कितना कुछ सीखा है। अपनी खुद की और अपने विद्यार्थी के किसी प्रश्न का गलत उत्तर देने पर, मैं उससे सबसे पहले यह पूछता हूँ कि उसने ऐसा उत्तर क्या सोचकर दिया? कला-संकाय के छात्र अक्सर यह शिकायत करते हैं कि विज्ञान-संबंधी परीक्षाएँ उतनी रोमांचक नहीं होती क्योंकि उनके प्रश्नों और उत्तरों का सही-सही अनुमान लगाया जा सकता है। यदि व्यक्ति को किसी प्रश्न को हल करने का तरीका पहले से ही मालूम है तो उसके लिए कोई चुनौती नहीं बचती। यह सही है, भौतिक विज्ञान के शिक्षक बहुत कड़ी मेहनत करते हैं और सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके विद्यार्थी सही उत्तर तक पहुँच पाएँ। हालाँकि यह भी अपनी जगह सच है कि भौतिक विज्ञान के शिक्षक के लिए सबसे मजेदार स्थिति तब पैदा होती है जब विद्यार्थी एक ऐसा गलत जवाब दे जिसमें गलती होते हुए भी कुछ सोचने के लिए मजबूर कर देने की क्षमता हो। यही वह स्थिति होती है जब भौतिकी के किसी पहलू पर पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे विद्यार्थी के दिमाग की कशमकश को समझा जा सकता है। बहुत-से गलत जवाबों की तह में कुछ सही तथ्य और सोचने की शक्ति छुपी होती है। हो सकता है कि उत्तर देने वाला अपना तर्क सही न दे पाया हो, या शिक्षक द्वारा दी गई व्याख्या को सही प्रकार से न समझा गया हो, या फिर ऐसा भी हो सकता है कि जिस रूप में उसके समक्ष तथ्य प्रस्तुत किये गए उन्हीं में कोई कमी रह गई हो। हो सकता है कि भौतिक विज्ञान के सहज नियमों को समझने में ही कोई भूल हुई हो। परीक्षा, प्रश्न, गलती शब्द के बहुवचन रूप हैं
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। क्या आपने कभी महसूस किया है कि किसी सवाल का सही उत्तर मिल जाने के बाद सिर्फ उकताहट के सिवा कुछ बाकी नहीं बचता। इसके बाद सारे रास्ते बंद से लगने लगते हैं। दूसरी ओर एक गलत जवाब उतना ही रोचक होता है जितना कोई रहस्यमय कत्ला मुझे इस बात पर आश्चर्य होता है कि अपने अट्ठाईस वर्षों के अध्यापन के अनुभव से मैंने गलत उत्तरों से कितना कुछ सीखा है। अपनी खुद की और अपने विद्यार्थी के किसी प्रश्न का गलत उत्तर देने पर, मैं उससे सबसे पहले यह पूछता हूँ कि उसने ऐसा उत्तर क्या सोचकर दिया? कला-संकाय के छात्र अक्सर यह शिकायत करते हैं कि विज्ञान-संबंधी परीक्षाएँ उतनी रोमांचक नहीं होती क्योंकि उनके प्रश्नों और उत्तरों का सही-सही अनुमान लगाया जा सकता है। यदि व्यक्ति को किसी प्रश्न को हल करने का तरीका पहले से ही मालूम है तो उसके लिए कोई चुनौती नहीं बचती। यह सही है, भौतिक विज्ञान के शिक्षक बहुत कड़ी मेहनत करते हैं और सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके विद्यार्थी सही उत्तर तक पहुँच पाएँ। हालाँकि यह भी अपनी जगह सच है कि भौतिक विज्ञान के शिक्षक के लिए सबसे मजेदार स्थिति तब पैदा होती है जब विद्यार्थी एक ऐसा गलत जवाब दे जिसमें गलती होते हुए भी कुछ सोचने के लिए मजबूर कर देने की क्षमता हो। यही वह स्थिति होती है जब भौतिकी के किसी पहलू पर पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे विद्यार्थी के दिमाग की कशमकश को समझा जा सकता है। बहुत-से गलत जवाबों की तह में कुछ सही तथ्य और सोचने की शक्ति छुपी होती है। हो सकता है कि उत्तर देने वाला अपना तर्क सही न दे पाया हो, या शिक्षक द्वारा दी गई व्याख्या को सही प्रकार से न समझा गया हो, या फिर ऐसा भी हो सकता है कि जिस रूप में उसके समक्ष तथ्य प्रस्तुत किये गए उन्हीं में कोई कमी रह गई हो। हो सकता है कि भौतिक विज्ञान के सहज नियमों को समझने में ही कोई भूल हुई हो। 'विज्ञान' में 'इक' प्रत्यय लगाने से शब्द बनेगा
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