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क्या हमारे आसपास के पदार्थ शुद्ध हैं - L...

क्या हमारे आसपास के पदार्थ शुद्ध हैं - L8 | पृथक्करण की अन्य विधियां |Class 9 विज्ञान | 7 PM | Nish

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दोहरान |क्या हमारे आस पास के पदार्थ शुद्ध है ?|शुद्ध पदार्थ |मिश्रण के प्रकार |विषमांगी मिश्रण |समांगी मिश्रण |मिश्रण |विलयन क्या है ?|सारांश |विलेय एवं विलायक

दोहरान |क्या हमारे आस पास के पदार्थ शुद्ध है ?|शुद्ध पदार्थ |मिश्रण के प्रकार |विषमांगी मिश्रण |समांगी मिश्रण |मिश्रण |विलयन क्या है ?|सारांश |विलेय एवं विलायक

दोहरान |क्या हमारे आस पास के पदार्थ शुद्ध है ?|शुद्ध पदार्थ |मिश्रण |मिश्रण के प्रकार |समांगी मिश्रण |विषमांगी मिश्रण |विलयन क्या है ?|विलेय एवं विलायक |सारांश

The table given below presents the number of books on different subjects kept on separate shelves. Subjects with odd and even numbers are of Arts and Science respectively. नीचे दी गयी तालिका अलग-अलग विषयों की पुस्तकों की संख्या को दर्शाता है जिन्हें अलग-अलग खानों में रखा गया है | विषम तथा सम संख्या के विषय क्रमशः कला एवं विज्ञान हैं | What is the ratio of the total number of books on Arts to that of Science? कला और विज्ञान की कुल पुस्तकों की संख्या में क्या अनुपात है ?

The table given below presents the number of books on different subjects kept on separate shelves. Subjects with odd and even numbers are of Arts and Science respectively. नीचे दी गयी तालिका अलग-अलग विषयों की पुस्तकों की संख्या को दर्शाता है जिन्हें अलग-अलग खानों में रखा गया है | विषम तथा सम संख्या के विषय क्रमशः कला एवं विज्ञान हैं | What is the ratio of the number of books of S1 and the average number of books per subject? S1 के पुस्तकों की संख्या तथा प्रति विषय पुस्तकों की औसत संख्या में क्या अनुपात है ?

इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान नवीन तथ्यों के साथ किसका सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता?

विज्ञान क्या हैं?|पदार्थ (द्रव्य)|भौतिकी क्या हैं?|भौतिक विज्ञान के पिता|भौतिकी का कार्यक्षेत्र एवं विस्तार|चिरसम्मत भौतिकी|क्वांटम भौतिकी|प्रकाशिकी|प्रश्न