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UP BOARD Model Paper 2021 - 2022 Out ? | क्या-क्या बदलाव हुए है ? | Latest News |Kamal Sir|Doubtnut

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This table shows the percentage of students passing out of five different colleges over three years. It is given that from each college, 200 students appeared every year. यह तालिका तीन वर्षों में पांच अलग-अलग कॉलेजों से पास करने वाले छात्रों का प्रतिशत दर्शाती है | यह दिया गया है कि प्रत्येक कॉलेज से हर वर्ष 200 छात्र शामिल हुए | If the number of passed out students of all five colleges is represented by a pie chart, what is the central angle (to nearest whole number) of the sector representing the passed out students of college C? यदि सभी पांच कॉलेजों से पास करने वाले छात्रों की संख्या को एक पाई-चार्ट में प्रस्तुत किया जाए , तो कॉलेज C से पास कर चुके छात्रों को दर्शाने वाले त्रिज्यखंड का केंद्रीय कोण ( निकटतम पूर्ण संख्या में ) क्या होगा ?

The ratio of boys and girls in a college was 4 : 5. New students got admitted and the number of boys went up by 50% and the number of girls went up by 60%. What is the new ratio of boys and girls in the college? एक कॉलेज में लड़कों तथा लड़कियों की संख्या में 4 : 5 का अनुपात है | नए छात्रों का नामांकन हुआ और लड़कों की संख्या 50% तथा लड़कियों की संख्या 60% बढ़ गयी | इस कॉलेज में लड़कों और लड़कियों का नया अनुपात क्या है ?

A square piece of cardboard with side 12 cm has a small square of 2 cm cut out from each of the corners. The resulting flaps are turned up to make a box 2 cm deep. The volume of the box is: 12 cm सतह वाले एक वर्गाकार गत्ते के टुकड़े के प्रत्येक कोने से 2 cm छोटे वर्ग काटे जाते है | 2 cm गहरा डिब्बा तैयार करने के लिए परिणामों पट्टियां (resulting flaps) को मोड़ा जाता है| डिब्बे के घनफल का मान क्या है?

A hemispherical dome is open from its base and is made up of iron. Thickness of dome is 3.5 meter. Total cost of painting dome's outer curved surface is Rs 2464. If the rate of painting is Rs 8 per meter^2 , then what is the volume (in meter^3 ) of iron used in making the dome ? एक अर्धगोलाकार गुम्बद अपने आधार से खुला है तथा लोहे से बना है। गुम्बद को मोटाई 3.5 मीटर है। गुम्बद के बाहर की वक्रीय सतह को पेंट करने में कुल 2464 रूपये का खर्चा होता है। यदि पेंटिंग की दर 8 रूपये प्रति मीटर^2 है, तो गुम्बद को बनाने में प्रयोग हुए लोहे का आयतन ( मीटर^3 में) क्या होगा?

खबर के बिकने की खबर पुरानी होकर भी पुरानी नहीं हुई। यह पूछने के बावजूद कि जब मीडिया मण्डी में है और मण्डी में धर्म, ईमान, पाखण्ड, ईश्वर सत्य, कला सभी कुछ बिक रहा है, तो खबर बिकने पर चौंकना, परेशान होना अथवा दुखी होना क्यों? परेशान होना जरूरी है। मीडिया का भ्रष्टाचार लोकतन्त्र को भारी नुकसान पहुँचाने वाला है। पैसे लेकर समाचार छापने की खबर ने । हड़कम्प मचा दिया। धन का लोभ क्या-क्या नहीं करवाता? बताया गया कि मुनाफाखोरी के दबाव में कुछ मीडिया संगठनों ने पत्रकारिता के ऊँचे आदर्शों का । हत्या कर दी। कुछ समय पहले तक रिपोर्टरों अथवा संवाददाताओं को नकद या अन्य छोटे-छोटे उपहार दिए जाते थे, देश-विदेश में किसी कम्पनी या किसी शख्स के बारे में अनुकूल खबर छापने पर अच्छे होटलों में लंच-डिनर के साथ नकद भुगतान का लिफाफा दिया जाता था। ऐसी खबर हर सूरत में वस्तुनिष्ठ होते हुए व्यक्ति, पद था संस्था की प्रशंसा कर रही होती थी, परन्तु फिर बड़ा बदलाव आया। कामकाज की शैली और नियम बदल गए। मूल्यों को निश्चित करने की गलाकाट प्रतियोगिता के अतिरिक्त बड़ा मुनाफा पाने के लिए एक नई टर्म मार्केटिंग का सहारा लिया आने लगा। उसूलों के उल्लंघन के जवाब तलाश कर लिए गए। कहा गया कि एजेसियों जैसे बिचौलियों को खत्म करने में कुछ भी बुरा नहीं। प्रेस-परिषद् ने कुछ दायित्व समझते हुए पैसे के बदले समाचार' पर एक कमेटी का गठन किया, जिससे चुनाव के दौरान नेताओं अथवा राजनीतिक दलों से पैसा लेकर समाचार प्रकाशित करने वाले जिम्मेदार कारकों को कठघरे में खड़ा किया जा सके, परन्तु कॉरिट मीडिया की दृश्य-अदृश्य शक्ति के सामने ऐसा हो न सका। सुप्रसिद्ध पत्रकार प्रभाष जोशी ने भी इस अनर्थ को रोकने की कोशिश को , परन्तु मीडिया-समूह और राजनीति के कार्यकर्ताओं के बीच दलाली पैकेज में सभी कुछ चल रहा है। किस मण्डी में धर्म और ईश्वर बिक रहा है?

खबर के बिकने की खबर पुरानी होकर भी पुरानी नहीं हुई। यह पूछने के बावजूद कि जब मीडिया मण्डी में है और मण्डी में धर्म, ईमान, पाखण्ड, ईश्वर सत्य, कला सभी कुछ बिक रहा है, तो खबर बिकने पर चौंकना, परेशान होना अथवा दुखी होना क्यों? परेशान होना जरूरी है। मीडिया का भ्रष्टाचार लोकतन्त्र को भारी नुकसान पहुँचाने वाला है। पैसे लेकर समाचार छापने की खबर ने । हड़कम्प मचा दिया। धन का लोभ क्या-क्या नहीं करवाता? बताया गया कि मुनाफाखोरी के दबाव में कुछ मीडिया संगठनों ने पत्रकारिता के ऊँचे आदर्शों का । हत्या कर दी। कुछ समय पहले तक रिपोर्टरों अथवा संवाददाताओं को नकद या अन्य छोटे-छोटे उपहार दिए जाते थे, देश-विदेश में किसी कम्पनी या किसी शख्स के बारे में अनुकूल खबर छापने पर अच्छे होटलों में लंच-डिनर के साथ नकद भुगतान का लिफाफा दिया जाता था। ऐसी खबर हर सूरत में वस्तुनिष्ठ होते हुए व्यक्ति, पद था संस्था की प्रशंसा कर रही होती थी, परन्तु फिर बड़ा बदलाव आया। कामकाज की शैली और नियम बदल गए। मूल्यों को निश्चित करने की गलाकाट प्रतियोगिता के अतिरिक्त बड़ा मुनाफा पाने के लिए एक नई टर्म मार्केटिंग का सहारा लिया आने लगा। उसूलों के उल्लंघन के जवाब तलाश कर लिए गए। कहा गया कि एजेसियों जैसे बिचौलियों को खत्म करने में कुछ भी बुरा नहीं। प्रेस-परिषद् ने कुछ दायित्व समझते हुए पैसे के बदले समाचार' पर एक कमेटी का गठन किया, जिससे चुनाव के दौरान नेताओं अथवा राजनीतिक दलों से पैसा लेकर समाचार प्रकाशित करने वाले जिम्मेदार कारकों को कठघरे में खड़ा किया जा सके, परन्तु कॉरिट मीडिया की दृश्य-अदृश्य शक्ति के सामने ऐसा हो न सका। सुप्रसिद्ध पत्रकार प्रभाष जोशी ने भी इस अनर्थ को रोकने की कोशिश को , परन्तु मीडिया-समूह और राजनीति के कार्यकर्ताओं के बीच दलाली पैकेज में सभी कुछ चल रहा है। लोकतन्त्र को किससे नुकसान हो रहा है?

खबर के बिकने की खबर पुरानी होकर भी पुरानी नहीं हुई। यह पूछने के बावजूद कि जब मीडिया मण्डी में है और मण्डी में धर्म, ईमान, पाखण्ड, ईश्वर सत्य, कला सभी कुछ बिक रहा है, तो खबर बिकने पर चौंकना, परेशान होना अथवा दुखी होना क्यों? परेशान होना जरूरी है। मीडिया का भ्रष्टाचार लोकतन्त्र को भारी नुकसान पहुँचाने वाला है। पैसे लेकर समाचार छापने की खबर ने । हड़कम्प मचा दिया। धन का लोभ क्या-क्या नहीं करवाता? बताया गया कि मुनाफाखोरी के दबाव में कुछ मीडिया संगठनों ने पत्रकारिता के ऊँचे आदर्शों का । हत्या कर दी। कुछ समय पहले तक रिपोर्टरों अथवा संवाददाताओं को नकद या अन्य छोटे-छोटे उपहार दिए जाते थे, देश-विदेश में किसी कम्पनी या किसी शख्स के बारे में अनुकूल खबर छापने पर अच्छे होटलों में लंच-डिनर के साथ नकद भुगतान का लिफाफा दिया जाता था। ऐसी खबर हर सूरत में वस्तुनिष्ठ होते हुए व्यक्ति, पद था संस्था की प्रशंसा कर रही होती थी, परन्तु फिर बड़ा बदलाव आया। कामकाज की शैली और नियम बदल गए। मूल्यों को निश्चित करने की गलाकाट प्रतियोगिता के अतिरिक्त बड़ा मुनाफा पाने के लिए एक नई टर्म मार्केटिंग का सहारा लिया आने लगा। उसूलों के उल्लंघन के जवाब तलाश कर लिए गए। कहा गया कि एजेसियों जैसे बिचौलियों को खत्म करने में कुछ भी बुरा नहीं। प्रेस-परिषद् ने कुछ दायित्व समझते हुए पैसे के बदले समाचार' पर एक कमेटी का गठन किया, जिससे चुनाव के दौरान नेताओं अथवा राजनीतिक दलों से पैसा लेकर समाचार प्रकाशित करने वाले जिम्मेदार कारकों को कठघरे में खड़ा किया जा सके, परन्तु कॉरिट मीडिया की दृश्य-अदृश्य शक्ति के सामने ऐसा हो न सका। सुप्रसिद्ध पत्रकार प्रभाष जोशी ने भी इस अनर्थ को रोकने की कोशिश को , परन्तु मीडिया-समूह और राजनीति के कार्यकर्ताओं के बीच दलाली पैकेज में सभी कुछ चल रहा है। पैसे के बदले समाचार पर कमेटी का गठन किसके द्वारा किया गया?