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क्या हमारे आसपास के पदार्थ शुद्ध हैं -L6...

क्या हमारे आसपास के पदार्थ शुद्ध हैं -L6| मिश्रण के पृथक्करण |CLASS 9 विज्ञान | 7PM | Nishtha Mam

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दोहरान |क्या हमारे आस पास के पदार्थ शुद्ध है ?|शुद्ध पदार्थ |मिश्रण के प्रकार |विषमांगी मिश्रण |समांगी मिश्रण |मिश्रण |विलयन क्या है ?|सारांश |विलेय एवं विलायक

दोहरान |क्या हमारे आस पास के पदार्थ शुद्ध है ?|शुद्ध पदार्थ |मिश्रण के प्रकार |विषमांगी मिश्रण |समांगी मिश्रण |मिश्रण |विलयन क्या है ?|सारांश |विलेय एवं विलायक

दोहरान |क्या हमारे आस पास के पदार्थ शुद्ध है ?|शुद्ध पदार्थ |मिश्रण |मिश्रण के प्रकार |समांगी मिश्रण |विषमांगी मिश्रण |विलयन क्या है ?|विलेय एवं विलायक |सारांश

मिश्रण के घटकों का पृथक्करण |दूध से क्रीम को कैसे पृथक कर सकते हैं?|दो अघुलनशील द्रवों के मिश्रण का पृथक|नमक तथा कपूर के मिश्रण को कैसे पृथक करें ?|प्रश्न

A mixture contains milk and water in the ratio (by volume) 5:3 and another mixture, of the same volume as that of the former, contains water and milk in the ratio (by volume) 1:3. In what ratio, two mixture be mixed in order to obtain a new mixture consisting of milk and water in the ratio (by volume) 7:3 ? किसी मिश्रण में दूध एवं पानी, आयतन के दृष्टिकोण से, 5 : 3 के अनुपात में हैं तथा एक अन्य मिश्रण में, जिसका आयतन पहले मिश्रण के जितना ही है, उसमें पानी और दूध 1 : 3 के अनुपात में हैं | इन मिश्रणों को किस अनुपात में मिलाना चाहिए ताकि प्राप्त होने वाले नए मिश्रण में दूध और पानी ( आयतन के अनुसार ) 7: 3 के अनुपात में हो ?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये वायु प्रदूषण आज की प्रमुख समस्या है। जंगलों के कटने तथा खनिज ईंधन के जलने से वायु में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा दिनों बढ़ रही है। विश्व पर्यावरण विकास आयोग' के अनुसार औद्योगीकरण के पूर्व वायु के प्रति 10 लाख में 280 कार्बन डाई-ऑक्साइड' थी। यह घनत्व अस्सी के दशक में 340 पहुंच गया तथा इक्कीसवीं शताब्दी के मध्य से अन्त तक यह 560 तक पहुंच जाएगा। वातावरण में छोड़ा जाने वाला धुआं अब सामान्य लकड़ी का धुआं न होकर अब उसमें कार्बन-ऑक्साइड के साथ-ही-साथ नाइट्रसऑक्साइड, धूल जैसे पदार्थों का आधिक्य भी हो रहा है। धातु कणों में सीसा, पारा, निकल, क्रोमियम, तांबा, आदि होते हैं। सीसे के जहर से मानव मस्तिष्क के तन्तु नष्ट हो जाते हैं। निकल, क्रोमियम से श्वास लेने में कष्ट होता है। फोम, रबर, रेफ्रिजरेशन, एयरोसोल कारखानों से वातावरण में घुलती गैस से प्राणवायु के स्रोत 'ओजन परत' के टूटने का खतरा 1986 में विदित हुआ है। अन्तरिक्ष में विभिन्न उपग्रहों को स्थापित करते समय वायुमण्डल की ओजोन प्रभावित होती है। विषभरी गैसें भवनों को भी प्रभावित करती हैं। वृक्ष वातावरण को शुद्ध करते हैं। एक औसत श्रेणी का वृक्ष 50 वर्षों में 50 हजार किलोग्राम ऑक्सीजन देता है। इन्हें काटकर मनुष्य वातावरण के सन्तुलन को बिगाड़ रहे हैं और वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। जंगलों के कटने से क्या हो रहा है।

निर्देश :निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये गद्यांश वायु प्रदूषण आज की प्रमुख समस्या है। जंगलों के कटने तथा खनिज ईंधन के जलने से वायु में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा दिनों-दिन बढ़ रही है। 'विश्व पर्यावरण विकास आयोग' के अनुसारऔद्योगीकरण के पूर्व वायु के प्रति 10 लाख में 280 कार्बन डाई-ऑक्साइड' थी। यह घनत्व अस्सी केदशक में 340 पहुंच गया तथा इक्कीसवीं शताब्दी के मध्य से अन्त तक यह 560 तक पहुंच जाएगा।वातावरण में छोड़ा जाने वाला धुआं अब सामान्य लकड़ी का धुआं न होकर अब उसमें कार्बन-ऑक्साइड के साथ-ही-साथ नाइट्रसऑक्साइड, धूल जैसे पदार्थों का आधिक्य भी हो रहा है। धातु कणों में सीसा, पारा, निकल, क्रोमियम, तांबा, आदिहोते हैं। सीसे के जहर से मानव मस्तिष्क के तन्तु नष्ट हो जाते हैं। निकल, क्रोमियम से श्वास लेने में कष्ट होता है।फोम, रबर, रेफ्रिजरेशन, एयरोसोल कारखानों से वातावरण में घुलती गैस से प्राणवायु के स्रोत 'ओजन परत' के टूटने का खतरा 1986 में विदित हुआ है। अन्तरिक्ष में विभिन्न उपग्रहों को स्थापित करते समय वायुमण्डल की ओजोनप्रभावित होती है। विषभरी गैसें भवनों को भी प्रभावित करती हैं। वृक्ष वातावरण को शुद्ध करते हैं। एक औसत श्रेणी का वृक्ष 50 वर्षों में 50 हजार किलोग्राम ऑक्सीजन देता है। इन्हें काटकर मनुष्य वातावरण के सन्तुलन को बिगाड़ रहे हैं और वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। जंगलों के कटने से क्या हो रहा है?

निर्देश :निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये गद्यांश वायु प्रदूषण आज की प्रमुख समस्या है। जंगलों के कटने तथा खनिज ईंधन के जलने से वायु में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा दिनों-दिन बढ़ रही है। 'विश्व पर्यावरण विकास आयोग' के अनुसारऔद्योगीकरण के पूर्व वायु के प्रति 10 लाख में 280 कार्बन डाई-ऑक्साइड' थी। यह घनत्व अस्सी केदशक में 340 पहुंच गया तथा इक्कीसवीं शताब्दी के मध्य से अन्त तक यह 560 तक पहुंच जाएगा।वातावरण में छोड़ा जाने वाला धुआं अब सामान्य लकड़ी का धुआं न होकर अब उसमें कार्बन-ऑक्साइड के साथ-ही-साथ नाइट्रसऑक्साइड, धूल जैसे पदार्थों का आधिक्य भी हो रहा है। धातु कणों में सीसा, पारा, निकल, क्रोमियम, तांबा, आदिहोते हैं। सीसे के जहर से मानव मस्तिष्क के तन्तु नष्ट हो जाते हैं। निकल, क्रोमियम से श्वास लेने में कष्ट होता है।फोम, रबर, रेफ्रिजरेशन, एयरोसोल कारखानों से वातावरण में घुलती गैस से प्राणवायु के स्रोत 'ओजन परत' के टूटने का खतरा 1986 में विदित हुआ है। अन्तरिक्ष में विभिन्न उपग्रहों को स्थापित करते समय वायुमण्डल की ओजोनप्रभावित होती है। विषभरी गैसें भवनों को भी प्रभावित करती हैं। वृक्ष वातावरण को शुद्ध करते हैं। एक औसत श्रेणी का वृक्ष 50 वर्षों में 50 हजार किलोग्राम ऑक्सीजन देता है। इन्हें काटकर मनुष्य वातावरण के सन्तुलन को बिगाड़ रहे हैं और वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। आज की प्रमुख समस्या क्या है?