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बल तथा दाब - L2 | बल तथा गति की अवस्था |...

बल तथा दाब - L2 | बल तथा गति की अवस्था | Chapter 11 | कक्षा 8 NCERT विज्ञान | Akash Sir | 7 PM

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विज्ञान क्या है?|विज्ञान के मुख्य भाग |भौतिक विज्ञान क्या है |भौतिक विज्ञान से संबंधित संकल्पनाएं |भौतिक का प्रयोजन तथा उत्तेजना |कक्षा 11वी भौतिकी का पाठ्यक्रम |भौतिक विज्ञान की उत्तेजना |प्रकृति के मूल बल |Summary

The ratio of the number of boys in sections A and B of a class is 2 : 3 and the ratio between the total number of boys and girls in sections A and B is 3 : 4. If the number of girls in B is 50% of the number of boys in B, then what will be the ratio between the number of girls in A and B ? एक कक्षा के अनुभाग A और B में लड़कों की संख्या का अनुपात 2:3 है तथा अनुभाग A और B में लड़कों और लड़कियों की कुल संख्या का अनुपात 3:4 है | यदि 8 में लड़कियों की संख्या, B में लड़कों की संख्या की 50% है, तो A और B में लड़कियों की संख्या का अनुपात कितना होगा ?

The ratio of curved surface area and volume of a cylinder is 1: 7. The ratio of total surface area and volume is 187 : 770. What is the respective ratio of its base radius and height? एक बेलन के वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल तथा आयतन का अनुपात 1 : 7 है। कूल पृष्ठोय क्षेत्रफल तथा आयतन का अनुपात 187 : 770 है। इसके आधार की त्रिज्या तथा ऊँचाई क्रमशः अनुपात क्या है? Option 1- 5 : 8 Option 2- 4 : 9 Option 3- 3 : 7 Option 4- 7 : 10

To do a certain work, the ratio of efficiency of A to that of B is 3:7.Working together, they can complete the work in 10 1/2 days. They work together for 8 days. 60% of the remaining work will be completed by A alone in : किसी कार्य को करने में, A की कार्य क्षमता तथा 8 की कार्य क्षमता का अनुपात 3: 7 है | एक साथ कार्य करते हुए, वे इस कार्य को 10 1/2 दिनों में कर सकते हैं | वे 8 दिनों तक साथ कार्य करते हैं | शेष कार्य का 60% हिस्सा A अकेले कितने दिनों में पूरा करेगा ?

In triangle ABC ,D is a point on BC such that AD is the bisector of angle A , AB = 11.7 cm, AC = 7.8 cm and BC = 13 cm. What is the length (in cm) of DC? त्रिभुज ABC में, D, BC पर स्थित एक ऐसा बिंदु है कि AD, angle A का समद्विभाजक है |AB =11.7 सेमी, AC = 7.8 सेमी तथा BC =13 सेमी है | DC की लंबाई ( सेमी में ) कितनी है?

The average weight of a certain number of students in a class is 68.5 kg. If 4 new students having weights 72.2 kg, 70.8kg, 70.3kg and 66.7 kg join the class, then the average weight of all the students increases by 300 g. The number of students in the class, initially is: किसी कक्षा में छात्रों की एक निश्चित संख्या का औसत वज़न 68.5 किलो ग्राम है | यदि 4 नए छात्र कक्षा में आ जाते हैं, जिनका वज़न क्रमशः 72.2 किलो ग्राम, 70.8 किलो ग्राम, 70.3 किलो ग्राम तथा 66.7 किलो ग्राम है, तो सभी छात्रों का औसत वज़न 300 ग्राम से बढ़ जाता है | आरंभ में कक्षामें छात्रों की संख्या कितनी थी ?

In triangle ABC ,AC= 8.4 cm, BC= 14 cm. P is a point on AB such that CP = 11.2 cm and angle ACP= angle B . What is the length (in cm) of BP? triangle ABC में AC = 8.4 सेमी, BC = 14 सेमी है | P, AB पर स्थित एक ऐसा बिंदु है कि CP = 11.2 सेमी तथा angle ACP= angle B है | BP की लंबाई (सेमी में ) कितनी है ?

A certain sum is lent at 4% p.a for 3 years 8% p.a for next 4 years and 12 % p.a beyond 7 years. If for a period of 11 years the simple interest obtained is ₹ 27,600, then the sum is (in ₹ ): एक निश्चित राशि 3 वर्षों के लिए 4% प्रति वर्ष, अगले 4 वर्षों के लिए 8% प्रति वर्ष तथा 7 वर्षों के बाद 12% प्रति वर्ष की दर से उधार दी जाती है। यदि 11 वर्षों की अवधि के लिए साधारण ब्याज 27,600 रुपये प्राप्त होता है, तो यह राशि (रुपये में) कितनी है?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम विज्ञान युग में जी रहे हैं। हमसे ये आशा नहीं की जाती कि हम अविश्वसनीय मतों अथवा एकांतिक दैवी-संदेशों को सोचे समझे बगैर आसानी से स्वीकार कर लेंगे। आज के युग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नित-नूतन आविष्कार हो रहे हैं। प्रकृति के रहस्यों पर से आवरण क्रमशः हटता जा रहा है। यह युग मानववाद का भी है, जिसमें वे धर्म जो मानवीय बुराइयों तथा सामाजिक अपराधों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं, आधुनिक व्यक्ति के गले नहीं उतरते। वे धर्म जो विभेद, वैमनस्य और अनैतिकता को बढ़ावा देते हैं तथा एकता, सद्भावना और सामंजस्य को प्रोत्साहित नहीं करते, वे मनुष्य को मनुष्य से लड़ाकार धर्मद्रोहियों के हाथ में अस्त्र बन जाते हैं। विज्ञान की प्रकृति कभी धर्म-विरोधी नहीं रही है। धार्मिक मतों के पक्ष में मुख्य तर्क प्रायः ब्रह्मांड संबंधी वस्तुपरक विचारों पर आधरित होते हैं। प्राकृतिक धर्म कभी भी किन्हीं आप्त स्रोतों, इल्हामों या परंपराओं पर निर्भर नहीं करता, वह तो अनुभूत अनुभव सिद्ध प्रत्यक्ष तथ्यों के अध्ययन और व्यावहारिकता पर अवलंबित होता है। वैज्ञानिक विधि का अनुसरण करते हुए, प्राकृतिक तथ्यों का सर्वेक्षण करके, युक्तियुक्त तर्क देकर परमसत्ता-विषयक सिद्धान्त का प्रतिपादन किया जाता है। वैज्ञानिक धर्म में ब्रह्मांड को समझने की जिज्ञासा पर बल दिया जाता है। प्राकृतिक ऊर्जा व पदार्थों के जन्म तथा विनाश को समझ सकने की इच्छा होती है। विकास का क्रम ऊर्ध्वमुखी रहा है: यह अप्राण से सप्राण तक, सप्राण से संवेदनशील तक, संवेदनशील से सज्ञान जीवन तक विकसित होता है। सज्ञान प्राणी को आध्यात्मिक प्राणी के रूप में आत्मविकास करना पड़ता है। आध्यात्मिक प्राणी- विशुद्ध ज्ञानी या विचारवान् प्राणी से उतना ऊँचा होता है जितना ज्ञानवान प्राणी संवेदनशील प्राणी से उन्नत होता है। विज्ञान की चेतना में कहीं यह संकेत नहीं मिलता कि पदार्थ से ही सृष्टि का आरंभ हुआ था। परमाणु को विखंडित करने वाले मनुष्य का मन निश्चय ही परमाणु से कहीं अधिक श्रेष्ठ है। प्रकृति की व्यवस्था और प्रगति के अवलोकन से स्पष्ट हो जाता है कि अगणित क्रमबद्ध प्रणालियों का संचालन, किसी सर्वद्रष्टा परम-आत्मा द्वारा किया जा रहा है। आधुनिक मनुष्य किस प्रकार के धर्म को स्वीकार नहीं करता।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम विज्ञान युग में जी रहे हैं। हमसे ये आशा नहीं की जाती कि हम अविश्वसनीय मतों अथवा एकांतिक दैवी-संदेशों को सोचे समझे बगैर आसानी से स्वीकार कर लेंगे। आज के युग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नित-नूतन आविष्कार हो रहे हैं। प्रकृति के रहस्यों पर से आवरण क्रमशः हटता जा रहा है। यह युग मानववाद का भी है, जिसमें वे धर्म जो मानवीय बुराइयों तथा सामाजिक अपराधों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं, आधुनिक व्यक्ति के गले नहीं उतरते। वे धर्म जो विभेद, वैमनस्य और अनैतिकता को बढ़ावा देते हैं तथा एकता, सद्भावना और सामंजस्य को प्रोत्साहित नहीं करते, वे मनुष्य को मनुष्य से लड़ाकार धर्मद्रोहियों के हाथ में अस्त्र बन जाते हैं। विज्ञान की प्रकृति कभी धर्म-विरोधी नहीं रही है। धार्मिक मतों के पक्ष में मुख्य तर्क प्रायः ब्रह्मांड संबंधी वस्तुपरक विचारों पर आधरित होते हैं। प्राकृतिक धर्म कभी भी किन्हीं आप्त स्रोतों, इल्हामों या परंपराओं पर निर्भर नहीं करता, वह तो अनुभूत अनुभव सिद्ध प्रत्यक्ष तथ्यों के अध्ययन और व्यावहारिकता पर अवलंबित होता है। वैज्ञानिक विधि का अनुसरण करते हुए, प्राकृतिक तथ्यों का सर्वेक्षण करके, युक्तियुक्त तर्क देकर परमसत्ता-विषयक सिद्धान्त का प्रतिपादन किया जाता है। वैज्ञानिक धर्म में ब्रह्मांड को समझने की जिज्ञासा पर बल दिया जाता है। प्राकृतिक ऊर्जा व पदार्थों के जन्म तथा विनाश को समझ सकने की इच्छा होती है। विकास का क्रम ऊर्ध्वमुखी रहा है: यह अप्राण से सप्राण तक, सप्राण से संवेदनशील तक, संवेदनशील से सज्ञान जीवन तक विकसित होता है। सज्ञान प्राणी को आध्यात्मिक प्राणी के रूप में आत्मविकास करना पड़ता है। आध्यात्मिक प्राणी- विशुद्ध ज्ञानी या विचारवान् प्राणी से उतना ऊँचा होता है जितना ज्ञानवान प्राणी संवेदनशील प्राणी से उन्नत होता है। विज्ञान की चेतना में कहीं यह संकेत नहीं मिलता कि पदार्थ से ही सृष्टि का आरंभ हुआ था। परमाणु को विखंडित करने वाले मनुष्य का मन निश्चय ही परमाणु से कहीं अधिक श्रेष्ठ है। प्रकृति की व्यवस्था और प्रगति के अवलोकन से स्पष्ट हो जाता है कि अगणित क्रमबद्ध प्रणालियों का संचालन, किसी सर्वद्रष्टा परम-आत्मा द्वारा किया जा रहा है। प्रकृति के रहस्यों पर से आवरण हटाने में कौनसा कारक प्रमुख है?