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UPSC क्या है ? | तैयारी कैसे करे हिंदी मध्यम | Hindi Medium Class 11 | How to Crack

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Class 11 के बाद क्या ? Class 12 Hindi Medium की पढ़ाई साल के शुरू से कैसे करें ?

What Is Computer(कंप्यूटर क्या है)|How Does Computer Work(कंप्यूटर कैसे काम करता है)|Input Device(इनपुट डिवाइस)|Output Device(आउटपुट डिवाइस)|Central Processing Unit(सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट)|OMR|Summary

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The following chart shows the marks (in degrees) scored by a student in different subjects -- English, Hindi, History, Economics and Political Science -- in an examination. Total marks obtained in the examination are 600. Observe the chart and answer the questions. निम्नलिखित चार्ट एक परीक्षा में विभिन्न विषयों -अंग्रेजी, हिंदी, इतिहास, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान- में एक छात्र द्वारा प्राप्त अंकों (डिग्री में) को दर्शाता है। परीक्षा में प्राप्त कुल अंक 600 हैं। आरेख का अवलोकन कीजिए तथा प्रश्नों के उत्तर दीजिए। What is the difference between marks scored in History and marks scored in Hindi? इतिहास में प्राप्त अंकों और हिंदी में प्राप्त अंकों के बीच अंतर क्या है?

The following chart shows the marks (in degrees) scored by a student in different subjects -- English, Hindi, History, Economics and Political Science -- in an examination. Total marks obtained in the examination are 600. Observe the chart and answer the questions. निम्नलिखित चार्ट एक परीक्षा में विभिन्न विषयों -अंग्रेजी, हिंदी, इतिहास, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान- में एक छात्र द्वारा प्राप्त अंकों (डिग्री में) को दर्शाता है। परीक्षा में प्राप्त कुल अंक 600 हैं। आरेख का अवलोकन कीजिए तथा प्रश्नों के उत्तर दीजिए। What is the difference between marks scored in History and marks scored in Hindi? इतिहास में प्राप्त अंकों और हिंदी में प्राप्त अंकों के बीच अंतर क्या है?

आपको किसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में क्या कठिनाई हो रही है? क्या ऐसा करने में समय की कमी महसूस हो रही है? अगर आपका जवाब 'हाँ' है, तो आपको समय प्रबंधन सोखने की जरूरत है। समय प्रबंधन किसी भी परीक्षा की तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। बहुत से परीक्षार्थी ऐसे है, जो परीक्षाओं की तैयारी देर से और बेतरतीब ढंग से शुरू करते हैं, जिससे उन्हें समयाभाव सबसे बड़ा शत्रु की तरह दिखने लगता है। बिना समय प्रबंधन के उस अनुपात में फायदा नहीं हो पाता, जिस अनुपात में आप मेहनत करते हैं। वास्तव में समय की गति को या उसके स्वभाव को मैनेज नहीं किया जा सकता, क्योंकि न तो इसे धीमा किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। आप स्वयं को मैनेज करते हुए सिर्फ इसका सही उपयोग कर सकते है। वास्तविकता यही है। सबसे पहले आप यह निर्धारित करें कि आपका वर्तमान समय कैसे व्यतीत हो रहा है। आप पिछले एक सप्ताह के अपने कार्यकलाप को एक पेपर पर लिखकर देखिए कि आपने टाइमटेबल का कितना और कैसा अनुसरण किया है। पूरे सप्ताह में कितने घंटे सेल्फ-स्टडी की है और आपका निर्धारित सिलेबस का कितना हिस्सा नहीं हो पाया है। एक बार पूरा विश्लेषण करने के बाद आप स्वयं को समय के हिसाब से बदलना शुरू कर सकते हैं। समय बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ की टिप्स काम आ सकती है परंतु सबसे अधिक प्रभाव आपके निश्चय, समर्पण और समय नियोजन का रहेगा। समय प्रबंधन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और यह सफलता की दिशा में निर्णायक होगा। समय प्रबंधन सीखने की जरूरत कब है?

आपको किसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में क्या कठिनाई हो रही है? क्या ऐसा करने में समय की कमी महसूस हो रही है? अगर आपका जवाब 'हाँ' है, तो आपको समय प्रबंधन सोखने की जरूरत है। समय प्रबंधन किसी भी परीक्षा की तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। बहुत से परीक्षार्थी ऐसे है, जो परीक्षाओं की तैयारी देर से और बेतरतीब ढंग से शुरू करते हैं, जिससे उन्हें समयाभाव सबसे बड़ा शत्रु की तरह दिखने लगता है। बिना समय प्रबंधन के उस अनुपात में फायदा नहीं हो पाता, जिस अनुपात में आप मेहनत करते हैं। वास्तव में समय की गति को या उसके स्वभाव को मैनेज नहीं किया जा सकता, क्योंकि न तो इसे धीमा किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। आप स्वयं को मैनेज करते हुए सिर्फ इसका सही उपयोग कर सकते है। वास्तविकता यही है। सबसे पहले आप यह निर्धारित करें कि आपका वर्तमान समय कैसे व्यतीत हो रहा है। आप पिछले एक सप्ताह के अपने कार्यकलाप को एक पेपर पर लिखकर देखिए कि आपने टाइमटेबल का कितना और कैसा अनुसरण किया है। पूरे सप्ताह में कितने घंटे सेल्फ-स्टडी की है और आपका निर्धारित सिलेबस का कितना हिस्सा नहीं हो पाया है। एक बार पूरा विश्लेषण करने के बाद आप स्वयं को समय के हिसाब से बदलना शुरू कर सकते हैं। समय बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ की टिप्स काम आ सकती है परंतु सबसे अधिक प्रभाव आपके निश्चय, समर्पण और समय नियोजन का रहेगा। समय प्रबंधन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और यह सफलता की दिशा में निर्णायक होगा। समय के बारे में सच है ?

आपको किसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में क्या कठिनाई हो रही है? क्या ऐसा करने में समय की कमी महसूस हो रही है? अगर आपका जवाब 'हाँ' है, तो आपको समय प्रबंधन सोखने की जरूरत है। समय प्रबंधन किसी भी परीक्षा की तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। बहुत से परीक्षार्थी ऐसे है, जो परीक्षाओं की तैयारी देर से और बेतरतीब ढंग से शुरू करते हैं, जिससे उन्हें समयाभाव सबसे बड़ा शत्रु की तरह दिखने लगता है। बिना समय प्रबंधन के उस अनुपात में फायदा नहीं हो पाता, जिस अनुपात में आप मेहनत करते हैं। वास्तव में समय की गति को या उसके स्वभाव को मैनेज नहीं किया जा सकता, क्योंकि न तो इसे धीमा किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। आप स्वयं को मैनेज करते हुए सिर्फ इसका सही उपयोग कर सकते है। वास्तविकता यही है। सबसे पहले आप यह निर्धारित करें कि आपका वर्तमान समय कैसे व्यतीत हो रहा है। आप पिछले एक सप्ताह के अपने कार्यकलाप को एक पेपर पर लिखकर देखिए कि आपने टाइमटेबल का कितना और कैसा अनुसरण किया है। पूरे सप्ताह में कितने घंटे सेल्फ-स्टडी की है और आपका निर्धारित सिलेबस का कितना हिस्सा नहीं हो पाया है। एक बार पूरा विश्लेषण करने के बाद आप स्वयं को समय के हिसाब से बदलना शुरू कर सकते हैं। समय बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ की टिप्स काम आ सकती है परंतु सबसे अधिक प्रभाव आपके निश्चय, समर्पण और समय नियोजन का रहेगा। समय प्रबंधन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और यह सफलता की दिशा में निर्णायक होगा। समय का अभाव उन्हें शत्रु जैसा लगता है. जो

आपको किसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में क्या कठिनाई हो रही है? क्या ऐसा करने में समय की कमी महसूस हो रही है? अगर आपका जवाब 'हाँ' है, तो आपको समय प्रबंधन सोखने की जरूरत है। समय प्रबंधन किसी भी परीक्षा की तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। बहुत से परीक्षार्थी ऐसे है, जो परीक्षाओं की तैयारी देर से और बेतरतीब ढंग से शुरू करते हैं, जिससे उन्हें समयाभाव सबसे बड़ा शत्रु की तरह दिखने लगता है। बिना समय प्रबंधन के उस अनुपात में फायदा नहीं हो पाता, जिस अनुपात में आप मेहनत करते हैं। वास्तव में समय की गति को या उसके स्वभाव को मैनेज नहीं किया जा सकता, क्योंकि न तो इसे धीमा किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। आप स्वयं को मैनेज करते हुए सिर्फ इसका सही उपयोग कर सकते है। वास्तविकता यही है। सबसे पहले आप यह निर्धारित करें कि आपका वर्तमान समय कैसे व्यतीत हो रहा है। आप पिछले एक सप्ताह के अपने कार्यकलाप को एक पेपर पर लिखकर देखिए कि आपने टाइमटेबल का कितना और कैसा अनुसरण किया है। पूरे सप्ताह में कितने घंटे सेल्फ-स्टडी की है और आपका निर्धारित सिलेबस का कितना हिस्सा नहीं हो पाया है। एक बार पूरा विश्लेषण करने के बाद आप स्वयं को समय के हिसाब से बदलना शुरू कर सकते हैं। समय बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ की टिप्स काम आ सकती है परंतु सबसे अधिक प्रभाव आपके निश्चय, समर्पण और समय नियोजन का रहेगा। समय प्रबंधन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और यह सफलता की दिशा में निर्णायक होगा। 'सेल्फ-स्टडी' शब्द है