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सारे रासायनिक सूत्र एक ही क्लॉस में | अब...

सारे रासायनिक सूत्र एक ही क्लॉस में | अब होगी CHEMISTRY आसान | Rasayanik Sutra Kaise Banaen

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Two cars start from the same place at the same time at right angles to each other. Their speeds are 54 km/h and 72 km/h, respectively. After 20 seconds, the distance between them will be: दो कारें एक ही स्थान से एक ही समय में एक दूसरे से समकोण पर चलना शुरू करती हैं। उनकी चाल क्रमशः 54 किमी/घंटा और 72 किमी/घंटा है। 20 सेकंड के बाद, उनके बीच की दूरी होगी:

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 10 कहते आते थे यही सभी नरदेही 'माता न कुमाता, पुत्र कुपुत्र भले ही।' अब कहें सभी यह हाय विरुद्ध विधाता 'है पुत्र-पुत्र ही रहे कुमाता माता।' बस मैंने इसका बाह्य मात्र ही देखा दृढ़ हृदय न देखा, मृदुल गात्र ही देखा। परमार्थ न देखा पूर्ण स्वार्थ ही साधा इस कारण ही तो हाय आज यह बाधा। युग-युग तक चलती रहे कठोर कहानी 'रघुकुल में भी थी एक अभागिन रानी।' निज जन्म-जन्म में सुने जीव यह मेरा 'धिक्कार! उसे था महा स्वार्थ ने घेरा।' "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई जिस जननी ने है जना भरत-सा भाई।" पागल-सी प्रभु के साथ सभा चिल्लाई "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई।" 'सौ बार धन्य वह एक लाल की माई' किसने कहा?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 10 कहते आते थे यही सभी नरदेही 'माता न कुमाता, पुत्र कुपुत्र भले ही।' अब कहें सभी यह हाय विरुद्ध विधाता 'है पुत्र-पुत्र ही रहे कुमाता माता।' बस मैंने इसका बाह्य मात्र ही देखा दृढ़ हृदय न देखा, मृदुल गात्र ही देखा। परमार्थ न देखा पूर्ण स्वार्थ ही साधा इस कारण ही तो हाय आज यह बाधा। युग-युग तक चलती रहे कठोर कहानी 'रघुकुल में भी थी एक अभागिन रानी।' निज जन्म-जन्म में सुने जीव यह मेरा 'धिक्कार! उसे था महा स्वार्थ ने घेरा।' "सी बार धन्य वह एक लाल की माई जिस जननी ने है जना भरत-सा भाई।" पागल-सी प्रभु के साथ सभा चिल्लाई "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई।" अभागिन किसे कहा गया है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 10 कहते आते थे यही सभी नरदेही 'माता न कुमाता, पुत्र कुपुत्र भले ही।' अब कहें सभी यह हाय विरुद्ध विधाता 'है पुत्र-पुत्र ही रहे कुमाता माता।' बस मैंने इसका बाह्य मात्र ही देखा दृढ़ हृदय न देखा, मृदुल गात्र ही देखा। परमार्थ न देखा पूर्ण स्वार्थ ही साधा इस कारण ही तो हाय आज यह बाधा। युग-युग तक चलती रहे कठोर कहानी 'रघुकुल में भी थी एक अभागिन रानी।' निज जन्म-जन्म में सुने जीव यह मेरा 'धिक्कार! उसे था महा स्वार्थ ने घेरा।' "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई जिस जननी ने है जना भरत-सा भाई।" पागल-सी प्रभु के साथ सभा चिल्लाई "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई।" रानी का कौन-सा भाव प्रकट हो रहा है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 10 कहते आते थे यही सभी नरदेही 'माता न कुमाता, पुत्र कुपुत्र भले ही।' अब कहें सभी यह हाय विरुद्ध विधाता 'है पुत्र-पुत्र ही रहे कुमाता माता।' बस मैंने इसका बाह्य मात्र ही देखा दृढ़ हृदय न देखा, मृदुल गात्र ही देखा। परमार्थ न देखा पूर्ण स्वार्थ ही साधा इस कारण ही तो हाय आज यह बाधा। युग-युग तक चलती रहे कठोर कहानी 'रघुकुल में भी थी एक अभागिन रानी।' निज जन्म-जन्म में सुने जीव यह मेरा 'धिक्कार! उसे था महा स्वार्थ ने घेरा।' "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई जिस जननी ने है जना भरत-सा भाई।" पागल-सी प्रभु के साथ सभा चिल्लाई "सौ बार धन्य वह एक लाल की माई।" प्रभु के साथ चिल्लाए