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जून से पढ़कर बोर्ड 2024 में 90% कैसे लाय...

जून से पढ़कर बोर्ड 2024 में 90% कैसे लाये | Maths में 90+ Marks लाना अब होगा आसान | बनो Maths Topper

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गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। सोनजुही में आज एक पीली कली निकली है। उसे देखकर अनायास ही उस छोटे जीव का स्मरण हो आया, जो इस लता की सधन हरीतिमा में छिपकर बैठता था और फिर मेरे निकट पहुँचते ही कन्धे पर कूदकर मुझे चौका देता था। तब मुझे कली की खोज रहती थी, पर आज उस लघुप्राणी की खोज है। परंतु वह तो अब तक इस सोमजुही की जड़ में मिट्टी होकर मिल गया होगा कौन जाने स्वर्णिम कली के बहाने वही मुझे चौंकाने ऊपर आ गया हो। अचानक एक दिन सबेरे कमरे से बरामदे में आकर मैंने देखा, दो कौए एक गमले के चारों ओर चोंचों से छुवा-छुवौवलजैसा खेल खेल रहे हैं। यह काकभुशुडि भी विचित्र पक्षी है, एक साथ समादरित, अनादरित, अति सम्मानित, अति अवमानित। हमारे बेचारे पुरखे न गरुड़ के रूप में आ सकते हैं, न मयूर के, न हंस के उन्हें पितरपक्ष में हमसे कुछ पाने के लिए काक बनकर ही अवतीर्ण होना पड़ता है। इतना ही नहीं, हमारे दूरस्थ प्रियजनों को भी अपने आने का मधु सन्देश इनके कर्कश स्वर ही में दे देना पड़ता है। दूसरी ओर हम कौआ और कांव-काव करने को अवमानना के अर्थ में ही प्रयुक्त करते हैं। मेरे काकपुराण के विवेचन में अचानक बाधा आ पड़ी क्योंकि गमले और दीवार की सन्धि में छिपे एक छोटे से जीव पर मेरी दृष्टि रुक गयी। छुवा-छुवौवल जैसा खेल कौन खेल रहा था?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। सोनजुही में आज एक पीली कली निकली है। उसे देखकर अनायास ही उस छोटे जीव का स्मरण हो आया, जो इस लता की सधन हरीतिमा में छिपकर बैठता था और फिर मेरे निकट पहुँचते ही कन्धे पर कूदकर मुझे चौका देता था। तब मुझे कली की खोज रहती थी, पर आज उस लघुप्राणी की खोज है। परंतु वह तो अब तक इस सोमजुही की जड़ में मिट्टी होकर मिल गया होगा कौन जाने स्वर्णिम कली के बहाने वही मुझे चौंकाने ऊपर आ गया हो। अचानक एक दिन सबेरे कमरे से बरामदे में आकर मैंने देखा, दो कौए एक गमले के चारों ओर चोंचों से छुवा-छुवौवलजैसा खेल खेल रहे हैं। यह काकभुशुडि भी विचित्र पक्षी है, एक साथ समादरित, अनादरित, अति सम्मानित, अति अवमानित। हमारे बेचारे पुरखे न गरुड़ के रूप में आ सकते हैं, न मयूर के, न हंस के उन्हें पितरपक्ष में हमसे कुछ पाने के लिए काक बनकर ही अवतीर्ण होना पड़ता है। इतना ही नहीं, हमारे दूरस्थ प्रियजनों को भी अपने आने का मधु सन्देश इनके कर्कश स्वर ही में दे देना पड़ता है। दूसरी ओर हम कौआ और कांव-काव करने को अवमानना के अर्थ में ही प्रयुक्त करते हैं। मेरे काकपुराण के विवेचन में अचानक बाधा आ पड़ी क्योंकि गमले और दीवार की सन्धि में छिपे एक छोटे से जीव पर मेरी दृष्टि रुक गयी। निकट जाकर देखा, गिलहरी का छोटा-सा बच्चा है, जो सम्भवतः घोंसले से गिर पड़ा है और अब कौए जिसमें सुलभ आहार खोज रहे हैं गमले और दीवार के बीच में किसका बच्चा छिपा था?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। सोनजुही में आज एक पीली कली निकली है। उसे देखकर अनायास ही उस छोटे जीव का स्मरण हो आया, जो इस लता की सधन हरीतिमा में छिपकर बैठता था और फिर मेरे निकट पहुँचते ही कन्धे पर कूदकर मुझे चौका देता था। तब मुझे कली की खोज रहती थी, पर आज उस लघुप्राणी की खोज है। परंतु वह तो अब तक इस सोमजुही की जड़ में मिट्टी होकर मिल गया होगा कौन जाने स्वर्णिम कली के बहाने वही मुझे चौंकाने ऊपर आ गया हो। अचानक एक दिन सबेरे कमरे से बरामदे में आकर मैंने देखा, दो कौए एक गमले के चारों ओर चोंचों से छुवा-छुवौवलजैसा खेल खेल रहे हैं। यह काकभुशुडि भी विचित्र पक्षी है, एक साथ समादरित, अनादरित, अति सम्मानित, अति अवमानित। हमारे बेचारे पुरखे न गरुड़ के रूप में आ सकते हैं, न मयूर के, न हंस के उन्हें पितरपक्ष में हमसे कुछ पाने के लिए काक बनकर ही अवतीर्ण होना पड़ता है। इतना ही नहीं, हमारे दूरस्थ प्रियजनों को भी अपने आने का मधु सन्देश इनके कर्कश स्वर ही में दे देना पड़ता है। दूसरी ओर हम कौआ और कांव-काव करने को अवमानना के अर्थ में ही प्रयुक्त करते हैं। मेरे काकपुराण के विवेचन में अचानक बाधा आ पड़ी क्योंकि गमले और दीवार की सन्धि में छिपे एक छोटे से जीव पर मेरी दृष्टि रुक गयी। निकट जाकर देखा, गिलहरी का छोटा-सा बच्चा है, जो सम्भवतः घोंसले से गिर पड़ा है और अब कौए जिसमें सुलभ आहार खोज रहे हैं हमारे पितर कुछ प्राप्त करने के लिए किस रूप में आते है।

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। सोनजुही में आज एक पीली कली निकली है। उसे देखकर अनायास ही उस छोटे जीव का स्मरण हो आया, जो इस लता की सधन हरीतिमा में छिपकर बैठता था और फिर मेरे निकट पहुँचते ही कन्धे पर कूदकर मुझे चौका देता था। तब मुझे कली की खोज रहती थी, पर आज उस लघुप्राणी की खोज है। परंतु वह तो अब तक इस सोमजुही की जड़ में मिट्टी होकर मिल गया होगा कौन जाने स्वर्णिम कली के बहाने वही मुझे चौंकाने ऊपर आ गया हो। अचानक एक दिन सबेरे कमरे से बरामदे में आकर मैंने देखा, दो कौए एक गमले के चारों ओर चोंचों से छुवा-छुवौवलजैसा खेल खेल रहे हैं। यह काकभुशुडि भी विचित्र पक्षी है, एक साथ समादरित, अनादरित, अति सम्मानित, अति अवमानित। हमारे बेचारे पुरखे न गरुड़ के रूप में आ सकते हैं, न मयूर के, न हंस के उन्हें पितरपक्ष में हमसे कुछ पाने के लिए काक बनकर ही अवतीर्ण होना पड़ता है। इतना ही नहीं, हमारे दूरस्थ प्रियजनों को भी अपने आने का मधु सन्देश इनके कर्कश स्वर ही में दे देना पड़ता है। दूसरी ओर हम कौआ और कांव-काव करने को अवमानना के अर्थ में ही प्रयुक्त करते हैं। मेरे काकपुराण के विवेचन में अचानक बाधा आ पड़ी क्योंकि गमले और दीवार की सन्धि में छिपे एक छोटे से जीव पर मेरी दृष्टि रुक गयी। निकट जाकर देखा, गिलहरी का छोटा-सा बच्चा है, जो सम्भवतः घोंसले से गिर पड़ा है और अब कौए जिसमें सुलभ आहार खोज रहे हैं काकभुशुडि कौन थे?