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02 Alcohol बनाने की विधि हिन्दी में || C...

02 Alcohol बनाने की विधि हिन्दी में || Chap 11 | 12th , IIT JEE, NEET

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Which two signs should be interchanged in the following equation to make it correct? निम्नलिखित समीकरण को सही बनाने के लिए कौन से दो चिन्हों को आपस में बदलना होगा ? 132 xx 11 + 8 - 3 div 12 = -16

Which two signs should be interchanged to make the given equation correct? दिए गए समीकरण को सही बनाने के लिए किन दो शब्दों को आपस में बदलने की आवश्यकता है ? 121 + 11 - 42 xx 6 div 7 = 83

Which two signs should be interchanged in the following equation to make it correct? निम्नलिखित समीकरण को सही बनाने के लिए कौन से दो चिन्हों को आपस में बदलना होगा ? 24 - 12 div 4 + 8 xx 2 = 11

Which two signs and two numbers should be interchanged to make the given equation correct? दिए गए समीकरण को सही बनाने के लिए किन दो चिन्हों तथा दो संख्याओं को आपस में बदलने की आवश्यकता है ? 17 + 11 - 12 xx 36 div 6 = 80

Which two signs should be interchanged to make the given equation correct? दिए गए समीकरण को सही बनाने के लिए किन दो चिन्हों को आपस में बदलने की आवश्यकता है ? 36 div 2 xx 12 + 3 - 6 = 24

Which two signs should be interchanged in the following equation to make it correct? निम्नलिखित समीकरण को सही बनाने के लिए कौन से दो चिन्हों को आपस में बदलना होगा ? 9 - 3 + 12xx 8 div 4 = 11

Two numbers are in the ratio 4:9. If both the numbers are increased by 12, the ratio becomes 11:21, the sum of the original numbers is: दो संख्याएँ 4 : 9 के अनुपात में है | यदि दोनों संख्याओं में 12 की वृद्धि होती है, तो अनुपात 11 : 21 हो जाता है | मूल संख्याओं का योग है :

In a class of 100 students, every student has passed in one or more of the three subjects, i.e. History, Economics and English. Among all the students , 24 students have passed in English only , 14 students have passed in History only, 11 students have passed in both English and Economics only, and 12 students have passed in both English and History only. A total of 50 students have passed in History. If only 5 students have passed in all three subjects, then how many students have passed in Economics only? 100 छात्रों की एक कक्षा में, प्रत्येक छात्र तीन विषयों यानी इतिहास, अर्थशास्त्र तथा अंग्रेजी में से एक या अधिक विषय में पास हुआ है | सभी छात्रों में से, 24 छात्र केवल अंग्रेजी में पास हुए हैं, 11 छात्र अंग्रेजी तथा अर्थशास्त्र दोनों में पास हुए हैं तथा 12 छात्र केवल अंग्रेजी और इतिहास में पास हुए हैं | इतिहास में कुल 50 छात्र पास हुए हैं | यदि सभी तीन विषयों में केवल 5 ही छात्र पास हुए हैं, तो केवल अर्थशास्त्र में पास करने वाले छात्रों की संख्या कितनी है ?

गोदान' प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भारत की आत्मा का करुण चित्र साकार हो उठा है। इसी कारण कई मनीषी आलोचक इसे ग्रामीण भारतीय परिवेशगत समस्याओं का महाकाव्य मानते हैं तो कई विद्वान् इसे ग्रामीण-जीवन और कृषि-संस्कृति का शोक गीत स्वीकारते हैं। कुछ विद्वान् तो ऐसे भी हैं कि जो इस उपन्यास को ग्रामीण भारत की आधुनिक 'गीता' तक स्वीकार करते हैं, जो कुछ भी हो, 'गोदान' वास्तव में मुंशी प्रेमचन्द का एक ऐसा उपन्यास है जिसमें आचार-विचार, संस्कार और प्राकृतिक परिवेश, जो गहन करुणा से युक्त है, प्रतिबिम्बित हो उठा है। डॉ। गोपाल राय का कहना है कि 'गोदान' ग्राम-जीवन और ग्राम संस्कृति को उसकी सम्पूर्णता में प्रस्तुत करने वाला अद्वितीय उपन्यास है न केवल हिन्दी । के वरन् किसी भी भारतीय भाषा के किसी भी उपन्यास में ग्रामीण समाज का । ऐसा व्यापक यथार्थ और सहानुभूतिपूर्ण चित्रण नहीं हुआ है। ग्रामीण जीवन और संस्कृति के अंकन की दृष्टि से इस उपन्यास का वही महत्त्व है, जो आधुनिक युग में युग जीवन की अभिव्यक्ति की दृष्टि से महाकाव्यों का हुआ करता था। इस प्रकार डॉ। राय गोदान को आधुनिक युग का महाकाव्य ही नहीं स्वीकारते वरन् सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य भी स्वीकारते हैं। उनके इस कथन का यही आशय है कि प्रेमचन्द जी ने ग्राम-जीवन से सम्बद्ध सभी पक्षों का न । केवल अत्यन्त विशदत्ता से चित्रण किया है, वरन् उनकी गहराइयों में जाकर उनके सच्चे चित्र प्रस्तुत कर दिए हैं। प्रेमचन्द जी ने जिस ग्राम-जीवन का चित्र गोदान में प्रस्तुत किया है, उसका सम्बन्ध आज ग्राम परिवेश से न होकर तत्कालीन ग्राम-जीवन से है। ग्रामीण जीवन को वास्तविक आधार प्रदान करने के लिए प्रेमचन्द जी ने चित्र के अनुरूप ही कुछ ऐसे खाँचे अथवा चित्रफलक निर्मित किए हैं, जो चित्र को - यथार्थ बनाने में सहयोगी सिद्ध हुए हैं। ग्रामीण किसानों के घर-द्वार, खेत-खलिहान और प्राकृतिक दृश्यों का ऐसा वास्तविक चित्रण अन्यत्र दुर्लभ है। 'गोदान' है